चिप्स, बिस्किट और नमकीन खाना सबसे बड़ी गलती! ये आदत मौत को दे रही दावत

आप आए दिन चिप्स, बिस्किट और भुजिया जैसी चीज़ें खाते होंगे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जायका बढ़ाने वाली ये चीजें आपकी उम्र को कम कर रही हैं. हाल ही में एक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. ये सभी चीजें सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रही हैं. भुजिया, बिस्किट या बर्गर ये सब वो चीजें हैं जिन्हें आप भी खाते हैं और मेहमानों को भी खिलाते हैं क्योंकि इनका स्वाद ही ऐसा है. क्या आप जानते हैं कि बाजार में मिलने वाले इन जैसे कई खाने के सामानों में एक चीज इतनी खतरनाक है, जो कि आपकी जिंदगी के कई साल कम कर सकती है. इसका नाम ट्रांस फैट है.

चिप्स, बिस्किट और नमकीन में होता है ट्रांस फैट

आपको बता दें कि किसी भी तेल को जब हाइड्रेजिनेशन की प्रक्रिया के जरिए जमाया जाता है और उसे जमे हुए फैट में बदला जाता है तो वो ट्रांस फैट या ट्रांस फैटी एसिड्स की शक्ल ले लेता है. आपको बता दें कि बिस्किट हो या नमकीन इनमें ट्रांस फैट का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है ताकि लंबे समय तक ये खराब ना हों और मजे से खाया जा सके.

ट्रांस फैट क्यों है खतरनाक?

जान लें कि देसी घी और मक्खन ट्रांस फैट नहीं है लेकिन तीन बार से ज्यादा तला जा चुका रिफाइंड आयल ट्रांस फैट बन जाता है. ट्रांस फैट शरीर में बैड कोलेस्ट्रोल को बढ़ाता है. इससे भी खराब बात ये है कि ज्यादा मात्रा में ट्रांस फैट्स लेने से शरीर में मौजूद गुड कोलेस्ट्रोल यानी जरूरी फैट भी बैड कोलेस्ट्रोल में बदलने लगता है. भारतीयों को दिल की बीमारी देने में ट्रांस फैट्स का बड़ा रोल है.

ऐसे नुकसान कर रहा ट्रांस फैट

डॉक्टरों के मुताबिक, ट्रांस फैट की जरूरत हमारे शरीर को है ही नहीं. ट्रांस फैट हमारे शरीर में मौजूद अच्छे फैट को भी खराब फैट में तब्दील कर देते हैं. ये केवल आर्टरी में जमा होकर दिल को ही नुकसान नहीं पहुंचा रहे, लिवर और ब्रेन पर भी बुरा असर डाल रहे हैं.

WHO की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में 5 अरब लोगों का जीवन ट्रांस फैट्स ने घटा दिया है और वो दिल की बीमारी के खतरे के साथ जी रहे हैं. 2018 में खाने में से ट्रांस फैट्स को घटाने और 2023 तक ट्रांस फैट्स खाद्य पदार्थों से पूरी तरह खत्म किए जाने की कोशिश शुरू हुई थी. हालांकि अब 43 देश इस मामले में आगे बढ़ गए हैं. 2022 में भारत भी इस लिस्ट में शामिल हो गया है.

आइए अब ये भी जानते हैं कि इन प्रोडक्ट में ट्रांस फैट की मात्रा कितनी होनी चाहिए? WHO के मानको के हिसाब से ट्रांस फैट्स की मात्रा प्रति 100 ग्राम में 2 ग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. WHO का ये भी कहना है कि डिब्बा बंद रिफाइंड तेल जिसमें हाइड्रोजन की मात्रा ज्यादा हो उसे बैन किया जाए. भारत में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथारिटी ने जनवरी 2022 में ये नियम लागू कर दिए हैं, लेकिन बाजार में बिक रहे कितने प्रोडक्ट इन मानकों का पालन करते हैं ये कहा नहीं जा सकता.

ये रिपोर्ट हर हिंदुस्तानी के लिए फायदेमंद साबित होगी क्योंकि इसी रिपोर्ट के जरिए हम आपको ये भी बताएंगे कि ट्रांस फैट से कैसे बचा जाए? साथ ही हम आपको ये भी बताने वाले हैं कि अगर ट्रांस फैट ने हमारे शरीर पर प्रभाव डालना शुरू कर दिया है तो हम इससे कैसे बच सकते हैं?

जाहिर है ट्रांस फैट सेहत के लिए बेहद घातक है. ऐसे में अब पूरी दुनिया में ट्रांस फैक्ट से जुड़े प्रोडक्ट्स पर लगाम लगाने के लिए एक विश्वव्यापी मुहिम जारी है. इस मुहिम में भारत के अलावा कई और देशों का नाम भी शुमार हो चुका है.

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