कानपुर। सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर किसी की भी छवि को धूमिल करना बड़ा आसान हो गया है कोई भी कभी भी किसी की भी छवि धूमल की जा सकती है वह चाहे कोई राजनेता हो या पुलिस अधिकारी या फिर सेंट्रल गवर्नमेंट का अधिकारी वर्ग किसी का भी नाम लेकर उसकी छवि को धूमिल कर उनकी इज्जत को तार तार कर दिया जाता है ऐसा ही मामला काफी समय से कानपुर सेंट्रल में ड्यूटी कर रहे आरपीएफ और जीआरपी के कुछ सिपाही और थाना अध्यक्षों को बेडर के नाम पर अवैध वसूली के नाम पर उनको सोशल मीडिया पर ब्लैकमेल करने का एक चलन सा शुरु हो गया है।
काफी समय से अपनी ईमानदारी से ड्यूटी कर रहे स्टाफ को सोशल मीडिया के माध्यम से ब्लैकमेल किया जाता है और स्टाफ काफी टेंशन में रहने लगा है जिसकी शिकायत आरपीएफ जीआरपी के स्टाफ ने अपने अधिकारियों को शिकायती पत्र के माध्यम से जानकारी भी उपलब्ध कराई कि फर्जी ट्विटर अकाउंट बनाकर स्टेशन पर फर्जी तरीके से अपने बेडर को चालवाने के लिए कुछ कथा कथित वेंडर ठेकेदार पुलिस की छवि को धूमिल कर रहे जिसकी वजह से हम ड्यूटी नहीं कर पा रहे हैं ऐसी शिकायतें देने के बाद भी आखिर बिना सच के आरोप लगाने वाले फर्जी ट्विटर हैंडल पर जिम्मेदार अधिकारी क्यों नहीं कार्यवाही कर रहे हैं।
शिकायत करने वाले के पास अगर पुलिस विभाग के किसी भी अधिकारी का गलत कार्य करते हुए कोई साक्ष्य हो तो वह उच्च अधिकारियों को देकर उन पर कार्रवाई करें ना की मानसिक पीड़ा दी जाए अगर पुलिस विभाग अपने ड्यूटी ना करके मानसिक तनाव में रहेगा तो इस देश की सुरक्षा करेगा कौन आखिर जिम्मेदार अधिकारी साइबर क्राइम के इन मुद्दों पर सोशल मीडिया पर क्यों नजर नहीं रख पा रहे है।
बिना सच के किसी के ऊपर आरोप लगाना कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है इन गंभीर विषयो पर अधिकारियों को विचार करना चाहिए।
