अमेरिका में शपथ लेते ही ट्रंप का दे दनादन-पहले ही दिन 100 से अधिक महत्वपूर्ण फैसले 

  • ट्रंप के फ़ैसलों से दुनियाँ दंग-बाईडेन क़े 78 फैसले भंग- क्या रुकेगी रूस यूक्रेन जंग?- अमेरिकी बर्थ राइट सिटीजनशिप कानून भंग! 
गोंदिया – दुनियाँ का हर देश हैरत भरी नजरों से देख रहा है कि जिस तरह शपथ ग्रहण के बाद अपने पहले ही संबोधन में दनादन फ़ैसलों की  की घोषणा कर पदभार ग्रहण कर उनपर हस्ताक्षर भी कर दिए गए,जिसमें बाईडेन प्रशासन के 78 फ़ैसलों  को तुरंत भंग कर दिया, टिकटाक पर फिलहाल बैन पर रोक लगा, कनाडा मैक्सिको पर 25 पेर्सेंट टैरिफ लगा दी, विश्व स्वास्थ्य संगठन व पेरिस जलवायु संगठन से बाहर होने की घोषणा की, जिसमें अमेरिका एक बहुत बड़ा सहयोगी था जिससे उनकी वैश्विक योजनाओं पर असर पड़ने की संभावना है। इन सबसे महत्वपूर्ण अब अवैध प्रवासियों की एंट्री बंद करने के अलावा अब जन्मजात नागरिकता याने बर्थ राइट सिटीजनशिप कानून को समाप्त करने को लेकर भी एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स जारी कर दिए गए हैं, जिससे भारत सहित अनेक देशों पर फर्क पढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, हम नीचे पैरा  में जिसकी चर्चा करेंगे। चूँकि अमेरिका में शपथ लेते ही ट्रंप का दे दनादन, पहले ही दिन 100 से अधिक महत्वपूर्ण फैसले, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, ट्रंप के फ़ैसलों  से दुनियाँ दंग, बाईडेन प्रशासन के 78 फैसले भंग, क्या रुकेगी रूस यूक्रेन जंग? जन्मजात नागरिकता कानून भंग! 
साथियों बात अगर हम ट्रंप द्वारा बर्थ राइट सिटीजनशिप एक्ट को निरस्त करने की करें तो, अमेरिका में 150 साल से जन्मजात नागरिकता कानून अमेरिकी संविधान का 14 वां संशोधन बच्चों को जन्मजात नागरिकता की गारंटी देता है।
अमेरिका में यह कानून 150 साल से लागू है। ट्रम्प ने जन्मजात नागरिकता को खत्म करने का फैसला किया है। ट्रम्प ने उन माता-पिता के बच्चों को जन्मजात नागरिकता देने से इनकार करने का आदेश दिया है जो अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे हैं या फिर अस्थायी वीजा लेकर रह रहे हैं। ट्रम्प ने इस आदेश को लागू करने के लिए 30 दिन का समय दिया है।प्यू रिसर्च सेंटर की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक 16 लाख भारतीय बच्चों को अमेरिका में जन्म लेने की वजह से नागरिकता मिली है।हालांकि ट्रम्प के आदेश में कहा गया है कि यह केवल उन लोगों पर लागू होगा जो इस आदेश की तारीख से 30 दिनों के बाद अमेरिका में जन्मे हैंइसका मतलब है कि अमेरिका में भारतीयों की आने वाली पीढ़ी इसके दायरे में होगी।  इसका मतलब ये है कि अब जिन लोगों के पास अमेरिकी नागरिकता के वैध डॉक्यूमेंट नहीं हैं और इस दौरान अगर वे अमेरिका में अपने बच्चे को जन्म देते हैं तो उन बच्चों को स्वतः अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलेगी। डोनाल्ड ट्रंप के इस कार्यकारी आदेश का नागरिकता संबंधी फैसले का सबसे ज्यादा प्रभाव प्रवासी भारतीयों पर पड़ेगा।प्यू रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका 48 लाख भारतीय मूल के निवासी बसे हुए हैं, इनमें से 16 लाख को जन्म के आधार पर ही नागरिकता मिली है। 
साथियों बात अगर हम बर्थराइट सिटीजनशिप एक्ट को समाप्त करने की चुनौतियों की करें तो,ट्रंप ने कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन इसकी वैधता सवालों के घेरे में है।14 वां संशोधन अमेरिकी संविधान का हिस्सा है, और इसके प्रावधानों को बदलने के लिए आम तौर पर एक संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होती है। एक ऐसी प्रक्रिया जो लंबी और कठिन होती है। आज तक किसी भी राष्ट्रपति ने कार्यकारी आदेश का उपयोग करके एकतरफा रूप से जन्मसिद्ध नागरिकता को समाप्त नहीं किया है। कानूनी विशेषज्ञ पहले से ही संघीय न्यायालयों में आदेश के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियों की भविष्यवाणी कर रहे हैं। यूएस सुप्रीम कोर्ट ने जन्मसिद्ध नागरिकता को बरकरार रखा है, जिसमें यूनाइटेड स्टेट्स बनाम वोंग किम आर्क (1898) का ऐतिहासिक मामला भी शामिल है। इस मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि गैर- नागरिक माता-पिता से यूएस में पैदा हुआ बच्चा अभी भी यूएस का नागरिक है। ट्रंप के कार्यकारी आदेश के खिलाफ तर्क यह है कि यह संशोधन प्रक्रिया का पालन किए बिना संवैधानिक गारंटी को रद्द नहीं कर सकता है, जिसके लिए कांग्रेस में बहुमत और राज्यों में दो-तिहाई वोट की आवश्यकता होगी। फिर भी इस आदेश से कानूनी लड़ाई भड़कने की संभावना है जो सालों तक चल सकती है, जिससे प्रभावित लाखों लोगों के लिए अनिश्चितता पैदा हो सकती है। 
साथियों बात अगर हम अमेरिकी आबादि में भारतीय अमेरिकी समुदाय की करें तो, भारतीय- अमेरिकी समुदाय, जो अमेरिका में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अप्रवासी आबादी में से एक है, इस बदलाव से बहुत प्रभावित होगा। अमेरिकी जनगणना के अनुसार अमेरिका में 4.8 मिलियन से अधिक भारतीय- अमेरिकी रहते हैं। इनमें से लाखों जन्मसिद्ध अधिकार के आधार पर अमेरिकी नागरिकता रखता है। यदि नीति कार्यकारी आदेश के अनुसार बदलती है, तो अस्थायी कार्य वीजा (जैसे एच -1बी वीजा) पर रहने वाले या ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा कर रहे भारतीय नागरिकों के बच्चों को अब ऑटोमैटिक रूप से अमेरिकी नागरिकता प्राप्त नहीं होगी। इससे हर साल अमेरिका में भारतीय अप्रवासियों के हज़ारों बच्चे प्रभावित हो सकते हैं।वर्तमान में भारतीय माता-पिता के अमेरिका में जन्मे बच्चे, (चाहे वे एच -1बी वीजा पर हों, ग्रीन कार्ड पर हों या बिना किसी दस्तावेज़ के हों) को अमेरिकी नागरिकता प्राप्त होती है। हालांकि नए आदेश के तहत केवल कम से कम एक अमेरिकी नागरिक या स्थायी निवासी माता-पिता से पैदा हुए बच्चों को ही नागरिकता मिलेगी। यह उन परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा जो स्थायी निवास और अंततः खुद नागरिकता के लिए अपने बच्चों की नागरिकता की स्थिति पर निर्भर हैं। कई भारतीय माता-पिता, विशेष रूप से एच-1बी वीजा पर काम करने वाले लोगों के लिए, अमेरिका में बच्चे का जन्म उनके बच्चों के लिए अमेरिकी नागरिकता हासिल करने का एक रास्ता रहा है।
जन्मसिद्ध नागरिकता के बिना, इन बच्चों को या तो खुद ही प्रक्रिया से गुजरना होगा या अपनी कानूनी स्थिति में अनिश्चितता का सामना करना होगा।भारतीय-अमेरिकी आबादी का एक बड़ा हिस्सा यूएस ग्रीन कार्ड बैकलॉग में फंसा हुआ है, जिसमें से कई लोग स्थायी निवास प्राप्त करने के लिए दशकों से इंतजार कर रहे हैं। वर्तमान में एच -1बी या अन्य अस्थायी वीज़ा पर भारतीय नागरिकों के जन्मे बच्चे ऑटोमैटिक रूप से यूएस नागरिकता प्राप्त कर लेते हैं, जो उन्हें परिपक्व होने पर अधिक सरल कानूनी विकल्प प्रदान करता है। यदि यह नीति रद्द कर दी जाती है, तो यूएस में भारतीय नागरिकों के जन्मे बच्चों को बहुत लंबी और अधिक जटिल प्रक्रिया के माध्यम से नागरिकता प्राप्त करने की आवश्यकता होगी, इसके कारण यूएस नागरिकता प्राप्त करने के उनके मार्ग में कई साल और लग सकते हैं।इसके अलावा अस्थायी वीज़ा पर यूएस में रहने वाले भारतीय अप्रवासियों को अपने बच्चों के लिए निवास सुरक्षित करने का प्रयास करते समय अतिरिक्त बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इससे संभवतःअधिक पारिवारिक अलगाव हो सकते हैं, क्योंकि माता-पिता को अधिक कठिन और लंबी इमिग्रेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।
भारतीय छात्र यूएस में अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के सबसे बड़े समूहों में से एक हैं। विशेष रूप से प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग के क्षेत्रों में इनकी संख्या काफी अधिक है। यदि जन्मसिद्ध नागरिकता नीति में बदलाव होता है, तो एफ -1 वीजा या अन्य गैर- आप्रवासी वीजा श्रेणियों पर भारतीय छात्रों के जन्मे बच्चों को ऑटोमैटिक रूप से यूएस नागरिकता नहीं मिलेगी, जिससे छात्रों और उनके परिवारों के लिए और अधिक कठिनाइयां पैदा होंगी क्योंकि वे ग्रेजुएट होने के बाद यूएस में रहने का प्रयास करते हैं।जन्मसिद्ध नागरिकता को समाप्त करने के कार्यकारी आदेश के यूएस में रहने वाले भारतीय परिवारों के लिए दूरगामी परिणाम होंगे। कानून में बदलाव की संभावना कानूनी रूप से अस्पष्टता पैदा करेगी, खासकर उन भारतीय अप्रवासियों के बच्चों के लिए जो अस्थायी कार्य वीजा पर हैं या ग्रीन कार्ड की कतार में प्रतीक्षा कर रहे हैं। ट्रंप का आदेश, अगर लागू होता है, तो इसका मतलब है कि अमेरिका में वर्क वीजा पर रहने वाले भारतीय अब अपने बच्चों को जन्म के समय अमेरिकी नागरिक बनते नहीं देख पाएंगे, इससे हर साल लाखों बच्चे प्रभावित हो सकते हैं, इससे ग्रीन कार्ड का इंतजार करने वालों को और भी ज्यादा देरी का सामना करना पड़ सकता है।10 लाख से ज्यादा भारतीय सालों से रोजगार से जुड़ा ग्रीन कार्ड पाने का इंतजार कर रहे हैं। 
अतः अगर हम अपनी बहन का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि ट्रंप के फ़ैसलों से दुनियाँ दंग-बाईडेन क़े 78 फैसले भंग- क्या रुकेगी रूस यूक्रेन जंग?- अमेरिकी बर्थ राइट सिटीजनशिप कानून भंग! अमेरिका में शपथ लेते ही ट्रंप का दे दनादन- पहले ही दिन 100 से अधिक महत्वपूर्ण फैसले।अवैध प्रवासियों, घुसपैठियों कीपहचान कर उन्हें बाहर करने का स्वतः संज्ञान अमेरिका की तर्ज़ पर भारत को भी लेना समय की मांग।
संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

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