‘कानून सबको स्वीकार करना पड़ेगा’ वक्फ बिल पर अमित शाह ने पूछा- CAA से नागरिकता गई?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में कहा कि मैं अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगी द्वारा पेश किए गए वक्फ विधेयक का पूर्ण समर्थन करता हूं। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि एक सांसद ने पहले धमकी दी थी कि अल्पसंख्यक इस कानून को स्वीकार नहीं करेंगे; यह भारत सरकार का, संसद का कानून है, सभी को इसे स्वीकार करना होगा। उन्होंने कहा कि वक्फ परिषदों और बोर्डों में गैर-मुस्लिमों को शामिल किया गया है; ये निकाय पूरी तरह से घोषित उद्देश्यों के अनुसार संपत्तियों का प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए हैं।

अमित शाह ने दावा किया कि अगर 2013 में वक्फ में संशोधन नहीं किया गया होता तो इस (संशोधन विधेयक) विधेयक की जरूरत ही नहीं पड़ती। सब कुछ ठीक चल रहा था। लेकिन 2014 में चुनाव हुए और 2013 में रातों-रात तुष्टीकरण के लिए वक्फ अधिनियम में बदलाव कर दिया गया। उन्होंने कहा कि नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस सरकार ने लुटियंस दिल्ली में 123 वीवीआईपी संपत्तियों को वक्फ को सौंप दिया, जबकि चुनाव आने में बस 25 दिन बचे थे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि तीन तलाक, सीएए पर भी डर फैलाया गया। उन्होंने सवाल किया कि बताइए CAA से किसकी नागरिकता गई?

उन्होंने कहा कि एक और भ्रांति फैलाई जा रही है कि यह विधेयक पिछली तिथि से लागू होगा। जब आप इस सदन में बोलें तो जिम्मेदारी से बोलें। विधेयक में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि विधेयक पारित होने के बाद सरकार द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद कानून लागू होगा। इसलिए, कोई पिछली तिथि से लागू होने वाला कानून नहीं है। लेकिन मुसलमानों को डराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वक्फ का कानून किसी के द्वारा दान की गई संपत्ति को विनियमित करना है, चाहे उसका प्रशासन ठीक से चल रहा हो या नहीं, चाहे वह कानून के अनुसार चल रहा हो या नहीं। दान जिस उद्देश्य के लिए दिया जा रहा है, वह इस्लाम धर्म के लिए दिया जा रहा है, गरीबों के उत्थान के लिए दिया जा रहा है या नहीं। या उसका उपयोग उस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है या नहीं।

अमित शाह ने कहा कि धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन में किसी गैर-मुस्लिम को शामिल करने का कोई प्रावधान नहीं है, हम ऐसा नहीं करना चाहते। यह बहुत बड़ी भ्रांति है कि यह कानून मुसलमानों के धार्मिक आचरण में हस्तक्षेप करेगा और उनके द्वारा दान की गई संपत्ति में हस्तक्षेप करेगा। यह भ्रांति अल्पसंख्यकों में अपने वोट बैंक के लिए डर पैदा करने के लिए फैलाई जा रही है। शाह ने कहा कि वक्फ बिल मुस्लिम धार्मिक प्रथाओं में हस्तक्षेप नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि तुष्टिकरण की राजनीति चल रही है।

गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि नए कानून के तहत वक्फ बोर्ड में किसी गैर-मुस्लिम की नियुक्ति नहीं की जाएगी। अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि आप लोग अपने मिथकों से देश को तोड़ देंगे। यह विधेयक वक्फ बोर्ड में चल रहे भ्रष्टाचार को रोकने के लिए है। अगर 2013 में संशोधन लाया गया होता, तो मैं कह सकता हूं कि आपको विधेयक लाने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड धार्मिक संस्था नहीं बल्कि प्रशासनिक संस्था है। 2014 के नतीजों से डरकर उन्होंने ये संशोधन नहीं लाए, बल्कि इसे अतिवादी बना दिया।

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