9 मई को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों का कानपुर की जनता को संदेश

  • निर्धन के द्वार तक पहुंचेगा न्याय, आपसी रजामंदी से निपटाए जाएंगे हजारों लंबित मुकदमे
कानपुर। आम जनता के कानूनी विवादों को बिना किसी सजा और आपसी समझौते के माध्यम से निस्तारित करने के लिए आगामी 9 मई को कानपुर न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन होने जा रहा है। “न्यायालय निर्धन के द्वार” की विशेष थीम पर आधारित इस अदालत के माध्यम से जनता को कानून के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ मुकदमों के बोझ से मुक्ति दिलाई जाएगी। इस बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए कानपुर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निरंतर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति भी इसका लाभ उठा सके।
इसी सिलसिले में आज  *अपर जिला जज- प्रथम श्रीमती सपना त्रिपाठी, अपर जिला जज-द्वितीय / (एससी/एसटी) श्रीमती शुचि श्रीवास्तव और  अपर प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय- प्रथम राजीव महेश्वरम* ने एक प्रेस वार्ता के माध्यम से आयोजन की विस्तृत जानकारी साझा की। न्यायिक अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक वसूली, किरायेदार वाद, मोबाइल फोन व केबल नेटवर्क संबंधी प्रकरणों के साथ-साथ आयकर, बैंक व अन्य वित्तीय संस्थानों से संबंधित मामलों का मौके पर निस्तारण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त दीवानी वाद, पारिवारिक विवाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर वाद और चेक बाउंस के गंभीर मामलों में भी समझौते के आधार पर राहत प्रदान की जाएगी।
प्रेस वार्ता में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनोपयोगी सेवाओं, वाणिज्य कर, राजस्व, चकबंदी और श्रमवाद से जुड़े प्रकरणों को भी इस लोक अदालत का हिस्सा बनाया गया है। चलानी वाद और शमनीय प्रकृति के फौजदारी मुकदमों को भी आपसी सहमति से सुलझाया जाएगा जिससे पक्षकारों को कचहरी के चक्करों से हमेशा के लिए निजात मिल सके।
उक्त वरिष्ठ श न्यायिक  अधिकारियों ने शहरवासियों से अपील की है कि वे इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपने विवादों को खत्म कर शांतिपूर्ण जीवन की शुरुआत करें। लोक अदालत में होने वाले इन समझौतों को कानूनी मान्यता प्राप्त होती है और इनके खिलाफ कहीं अपील भी नहीं की जा सकती, जिससे विवाद का हमेशा के लिए अंत हो जाता है।

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