अस्सी करोड़ से ज़्यादा लोग पांच किलो राशन पर पल रहे तो आख़िर सोना ख़रीद कौन रहा है..?

मोदी सरकार नें इस बार सुनार को टास्क दिया है। वैसे ये बाभन और सुनार लोग बीजेपी के कोर वोटर रहे है। हाँ भाजपा में टास्क बारी बारी सबको मिलेगा किसी को पद फ्री में नहीं मिलता और किसी जाति के ब्रांड नेता को यूँ ही मंत्री नही बनाया जाता। उधर सोना ना खरीदने के अपील नें मुझे तब अचंभित किया ज़ब मेरे सामने बस में एक महिला बैठी। महिला तो इस लिए कह रहा हू कि उसके दो हाथ एक सर दो आँख और एक जोड़ी हाई हिल थी अन्यथा स्लीवलेस टी शर्ट पहने जो नाभि तक ही थी । फिर जिस्म का तीन विस्वा का प्लॉट हवा में तैर रहा था जहां ना सोना था ना चांदी। कमर से नीचे आसमानी रंग की जींस पहने है। जिसमें बेल्ट नही थी। इसीलिए वो बार बार सरक रही है। जींस में कई जालीदार विंडोज है। शायद हवा पास होने के लिए है।
इस महिला ने फैशन में अपने पति को बाईपास कर दिया है। क्योंकि माथे पर गोल गोल बहुत छोटी बिंदी का टीका लगा रखा है। जिसकी नोक बालों के सेंटर की तरफ़ है। जो बहुत बारीक इशारा कर रहा है कि शादीशुदा है। उसके बगल में एक और उम्रदराज लड़की बैठी थी कान में रोलगोल की बाली और हाथ में चांदी का ब्रेसलेट, वह  शायद इसकी सास थी।  उसका पहनावा भी कुछ ऐसा ही था। बस जिस्म थोड़ा ढीला ढाला कपड़े में अच्छादित था। पूरे बस के लोग इन दोनो का दर्शन करके मोदी जी के सोना ना खरीदने के कथन का अनुमान लगा रहे थे। मैने देखा एक बगल वाली महिला नें 555 निकाला, रगड़ा और खा लिया। मै आंख मूंदकर भगवान का ध्यान कर नें लगा। और कहा प्रभु !
वाकई देश गर्त में जा रहा है। 60 साल की अमीर बुढ़िया जींस टी शर्ट पहन के लड़की लग रही है। जबकि मेरे जैसा 42 साल का ईमानदार पढ़ा लिखा बेरोजगार आदमी चार चार लाइफ टाइम डिजीज लेकर पत्रकारिता में जिंदगी खफा रहा है। अब कुछ कुछ मुझे भगवान पर शंका होने लगा है। उधर सोना खरीदने वाले डीजी, आई जी, मंत्री जी, स्कूल प्रबंधक जी, सरकारी ऑफिस के बाबू जी जिनके यहाँ 100 करोड़ से ज्यादा की सम्पति मिल सकती है या यूँ कहे मिलती ही है। मतलब अगर ईडी सीबीआई तबियत से चापा छापा खेले और बरामद माल थूक लगा कर गिनने लगे तो निर्जलीकरण से मृत्यु हो जाएगी गिनने वाले की। अकेले 100 करोड़ का साम्राज्य स्थापित कर गए सोचो ऐसे कितने ही अधिकारी होंगे ज़ब  एक छोटे से दरोगा जी के पास इतने मिले थे ।
जांच सबकी होनी चाहिए जितने भी पुलिस अधिकारी है, ऑफिसो के बाबू है, निजी स्कूलों के प्रबंधक है, निजी डॉक्टर, नेता है, मंत्री है और न्यायाधिकारी है सबकी जांच होनी चाहिए पर अफ़सोस के ये सब  मिलकर ही अपने आप में  पूरी व्यवस्था है और बदनाम कौन सरकारी मास्टर प्राइवेट कर्मचारी। उपरोक्त के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए भी दम चाहिए नहीं तो ये शिकायतकर्ता को वैसे ही मार दें। सरकार अपने काम पर लगी है और अधिकारी अपने काम पर और झेलना जनता को पड़ता है। पूरे सिस्टम को मजाक बना कर रख दिया इन लोगों ने और यह हमारे ज्यूडिशरी के यह है हमारे देश के यह है भारत के जनता के रखवाले हैं, यह जनता के रखवाले नहीं जनता को नोच खाने वाले हैं।
मोदीजी के “तेल बचाओ” आह्वान के बाद आजकल माननीय मंत्री महोदयगण कभी बुलेट से, कभी साइकिल से, कभी ई-रिक्शा, बस, मेट्रो, तो कभी सिर्फ “दो गाड़ी” में सफर करते दिखाई दे रहे हैं…और पूरा सोशल मीडिया उनके इस ऐतिहासिक यात्रा के फोटो-वीडियो से भरा पड़ा है। मतलब साफ है —देश सुरक्षित, सड़क सुरक्षित है…जनता सुरक्षित और अब माननीयों को भी कोई खतरा नहीं है। फिर ये जेड + सुरक्षा। गाड़ियों का काफिला, सायरन, बैरिकेडिंग और पूरा ट्रैफिक जाम किसलिए ? जब माननीय मंत्रीजी आराम से ई-रिक्शा में निर्भीक होकर घूम सकते हैं, तो जनता के टैक्स से करोड़ों की भारी-भरकम सुरक्षा किस बात की ?
जो नेता जनता के बीच बिना डर के सार्वजनिक परिवहन से यात्रा की फोटो खिंचवा सकता है, उसे जनता के बीच बिना सायरन और सड़क जाम के चलने का साहस भी होना चाहिए। अब मोदीराज्य में जनता टैक्स दे मंत्रीजी सादगी का फोटो डाल और सुरक्षा में पूरा प्रशासन लगा रहे, सड़क पुरी खाली करा ली जाये ! ये कौन सा आत्मनिर्भर मॉडल है भाई ?  अगर सच में जनता के बीच जाना है, तो जनता जैसा भरोसा भी दिखाइए। दो गाड़ी काफी है तो फिर बाकी काफिला सायरन और जेड + वाली फौज जनता को लौटा दीजिए! आज सोचा कि चलो 4-5 किलो सोना खरीदते हैं, घर से कार निकाला ही था कि फिर सोचा कि अरे बैटरी रिक्शा कर के देशभक्ती का सबूत देते हैं।
बैटरी से चलने वाले टुक टुक वाले से बात की तो बोला ₹100 लूंगा, मुझे मोदी जी की बात याद आ गयी कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट से चलना है, मैंने कहा 5 लोगों को बिठा लो इससे देशप्रेम भी उमड़ेगा। टुक टुक वाला भी जोश‌ में आ गया और ज़ोर से बोला “भारत माता की जय” , खैर थोड़ी देर बाद उसे 4 और सवारी मिल गई, मुझे लगा कि अब देशभक्ति पुर्ण हुई, टुक टुक वाला “ये देश है वीर जवानों का अलबेलों का मस्तानों का” गाते हुए चलने लगा। तनिष्क का शो रूम अंतिम गंतव्य था जो मेरा था, जब आया तो मैंने उसे ₹20 दिया और बोला कि एक बार और जयकारा लगाओ। वह ज़ोर से बोला “भारत माता की जय” जयकारा सुनकर तनिष्क के गार्ड भागे आए , वह भी जयकारे लगाने ही वाले थे कि मैंने कहा कि यह हो गया, अब देशभक्ति का दूसरा स्वाद दो, वह लोग “वंदेमातरम” गाने लगे…. मैंने कहा आत्मा तृप्त हुई।
तनिष्क शोरूम के मालिक अहमद भाई (नाम बदला है) पुराने दोस्त… उन्होंने पूछा कितना चाहिए? मैंने पूछा 24 कैरेट वाला कितने रूपए पसेरी है? अहमद भाई बोले अरे ज़ाहिद भाई आपसे क्या मोलभाव, जो समझें दे दीजिएगा। फिर मुझे याद आया कि देशभक्ति में मोदी जी सोना खरीदने को मना किए हैं, मैंने कहा कि नहीं एक साल बाद, सारा स्टाफ मेरी इस देशभक्ति भावना से खुश हुआ। मुझे दस किलो सोना मुफ्त देने की पेशकस की पर मैंने मना कर दिया आखिर बात देश के पीएम के आह्वान का था। मैं देशभक्ति से ओतप्रोत वापस लौटा तो टुक टुक‌ वाला वहीं खड़ा, मैंने कहा कि अरे अभी तक खड़े हो ? बोला सियाचिन में हमारे जवान माईस टेंपरेचर में सीमा पर खड़े रहते हैं, तो क्या देशहित में मैं इतना भी नहीं कर सकता ?
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषण एवं पत्रकार जौनपुर यूपी 

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