क्या देश को दलाली के दलदल से निजात दिलाएंगे दल..!

देश में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार सुशासन और विकास के नए आयाम स्थापित करने का दावा तो करती रही पर भ्रष्टाचार चरम पर रहा है। सरकारी ऑफिसो में आउटसोर्सिंग दलाल रखकर घूस लेने की नई व्यवस्था लागू है। आजकल ऑफिस में पांच हजार के वेतन पर टेबल के नीचे से घूस का पैसा पकड़ने वाले कर्मचारी रखें जा रहे। शिक्षा विभाग तो इस मामले में आंकठ तक डूबा है।लगता है इस बार मोटी माल स्तर  तक नहीं पहुंची तभी मामला मिडिया तक गया और मिडिया वाले बेचारे नाराज हो गए और राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री कार्यालय के दबाव में जाँच करवाए और अंततः परीक्षा रद्द करनी पड़ी। खैर ये सब तो बड़ी परीक्षाएं प्रोफेसर और डॉ बनाने वाली है जहां से देश का भविष्य दांव पर लगा कर नेता और विभाग की मोटी  कमाई हो रही है तो मंत्री जी लुट की छूट सबको दिए हुए हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि देश के करोड़ों नौनिहाल बच्चे जो सीबीएससी बोर्ड के स्कूल लूट रहे उसका जिम्मेदार कौन ! इस बोर्ड से मैट्रिक और इंटर की परीक्षा में 90+ मार्क  देते है आखिर उनके भविष्य से खेलने के लिए शिक्षा मंत्रालय को मोटा माल पहुँचाया जाता है। आखिर शिक्षा मंत्रालय ने करप्शन पर कौन सा ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाया जिसके तहत लगभग 100 साल पुरानी सीबीएससी बोर्ड एक झटके में दुनिया के सामने बदनाम कर हो रही ! सीबीएसई के लगभग सौ वर्षों के इतिहास में ऐसी घटिया स्कूली परीक्षाए कभी आयोजित नहीं होती थी जिसमें देश के करोड़ों नौनिहाल बच्चों के भविष्य को ही बर्बाद कर दिया हो।प्रधानमंत्री मोदी को ये विषय मन की बात में शामिल करनी ही चाहिए की सीबीएसई स्कूलों पर नकेल क्यों नहीं शिक्षा मंत्रालय का  ! क्यों सेम ड्रेस कोड नहीं  ! क्यों सेम सिलेबस और सेम फी स्ट्रक्चर नहीं ! राजनीति का नहीं अपितु देश के करोड़ों नौनिहाल बच्चों के भविष्य का है, ऐसी लापरवाही का मूल्य यह देश नहीं चुका सकता। बीएसए ऑफिस ऐसे भ्रष्टाचार का बड़ा केंद्र है। पुलिस और ट्रैफिक वसूली कर्मचारी तो इसी दावे के बल पर सरकार चलवा रहे।
देश में गाय बचाने और हिंदू बहुजनो के  अस्तित्व को बचाने के लिये ब्राह्मणो को  निर्णायक तौर पर लडने को कहा जाता रहा है। कल तक दहशत मे रहेने वाले हिंदू बहुजन युवा आज ब्राह्मणवाद के खिलाफ ही खड़े होकर निर्णायक लडाई लड रहे। और झूठे बौद्धवाद के अनुसार पिछले पांच हजार  सालो से लडते ही आ रहे है।राजकुमार भाटी जैसी  विचारधारा, सत्ता पर , संस्थाओ पर , अदालत पर अपना कब्जा जमाकर बैठे है। भाजपा जिस नैतिकता , सुशासन और पारदर्शिता की बात करती है और करप्शन  पर जिस जीरो टॉलरेंस की बात करती है उस दावे की धज्जियां शिक्षा  मंत्रालय उड़ा रही है जिसमें विभागीय अधिकारीयों  का सीधे हस्तक्षेप माना जा रहा  है। शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी जब से संघ वाले धर्मेंद्र प्रधान संभाल रहे है तब से ही यह मंत्रालय विवादों का अड्डा बना हुआ है।
देश के सभी विश्व विद्यालयों में कट्टर आरएसएस प्रचारकों की वीसी के रूप में नियुक्ति हो या एनसीआरटी  की किताबों में आधे से ज्यादा भारत पर मुगलो के शासन का फर्जी दावा तो पहले से ही विवाद का मुद्दा बना ही हुआ है लेकिन करप्शन में तो शिक्षा ने नया इतिहास ही बना डाला है। जब से धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री बने है  देश में एक भी परीक्षाए साफ सुथरी और पारदर्शी तरीके से नहीं हो रही है पिछले वर्ष यूजीसी नेट की परीक्षा हो या लगातार दूसरे वर्ष नीट की परीक्षा  सभी महत्वपूर्ण परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक हो जा रहे हैं और मजे कि बात है कि सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगते है। क्या आपको लगता है कि धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लिया जाएगा ? नहीं, बिल्कुल भी नहीं क्योंकि यूजीसी जैसे मुद्दे और व्यवस्था में इस्तीफा नहीं लिया गया तो अब क्यों ! नीट और यूजीसी नेट जैसी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक का विरोध कर रहे बच्चों की सीधी लड़ाईं उसी संघ के अवतार से है जिसे  सर्वश्रेष्ठ धर्मेंद्र प्रधान कहते है तो उसके पराजित होने का प्रश्न ही नहीं उठता। यह सर्वविदित है कि हरेक गैर-कानूनी धंधे में धन कद्दू कटता है और सब में बँटता है।  वैसे भी जिसके खून में व्यापार हो तो धन उसे सर्वाधिक प्रिय होता ही है। कमाऊ पूत सबका प्यारा। अब जब पेपर लीक अरबों रुपए का धंधा है तो अपने धंधे को कोई भी समझदार व्यापारी खराब नहीं करता।
अब अगर मान ले जन-दबाव से जो हार मान ले, वह शिक्षा मंत्री कैसा तो पिछले वर्ष देश ने देखा कि कैसे मीडिया और सोशल मीडिया में खबरें चली की नीट की परीक्षा के प्रश्न पत्र 30-40 लाख में एक एक पेपर बेचा गया, मेधावी छात्र छात्राएं सड़को पर उतरे, कोर्ट गए मगर गूंगे और बहरे शिक्षा मंत्रालय  के कान तक जूं तक नहीं रेंगी और मिडिया हंगामें के अनुसार सारे अयोग्य और पैसे से पेपर खरीदने वाले छात्रों का दाखिला देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में हो भी गया। वैसे भी इस देश में कोई भी यूनिवर्सिटी ऐसी नहीं है जो विश्व की  बेहतरीन 50 विश्व विद्यालयों में शुमार हो, हमारी उच्च शिक्षा जो सीधे सरकार के नियंत्रण में है वह तो गर्त में जा ही चुकी है कम से कम सीबीएसई बोर्ड जिसके अन्तर्गत करोड़ों बच्चे जो निजी विद्यालयों में लाखों रुपए की फीस देकर पढ़ते हैं और परीक्षा देते हैं उनके भविष्य को भी ऐसे नहीं रौंद दिजिए कि इस देश की शिक्षा व्यवस्था से ही जन मानस का विश्वास उठ जाए।
इससे पहले कि देश के छात्र, युवा और नौजवान इस शिक्षा मंत्री के विरुद्ध सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाएं और एक बार फिर देश में इंडिया अगेंस्ट करप्शन की तर्ज पर आंदोलन शुरू हो जाए आप यथा शीघ्र घूसखोर बाबुओ को सरकारी ऑफिसो  से बाहर का रास्ता दिखाएं। यह राजनीति का अहम हिस्सा है कि कार्यवाही अब आगे  इस तरह से पैर पसारेगा। किसको बेगुनाह छोड़ा जाएगा, यह देखना दिलचस्प है। बेरोजगारी और लूट पर चुप रही  कांग्रेस से  निपटने के लिए देश के युवा कार्यकर्ता भी  बीजेपी का साथ देंगे और अगली बार फिर भगवा लहरायेगा, वैसे भी कांग्रेस में संघ के लोग ही होते है जो कांग्रेस को निपटाकर बीजेपी में चले जाते है। अगर कांग्रेस चाहती है तो उसे सत्ता मोह त्यागकर कांग्रेसी विचारधारा से पार्टी का पुनर्गठन करना चाहिए़ और क्षेत्रीय दलों के साथ पूरे भारत में खुले मन से गठबंधन करके ही बीजेपी को आरक्षण और बेरोजगारी, भ्रष्टाचार के मुद्दों से हराया जा सकता है।
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Breaking News
Bengal से रोजाना 5 से 10 हजार घुसपैठिये वापस Bangladesh जा रहे, Holding Centers की संख्या भी तेजी से बढ़ी  | उत्तर प्रदेश में बिजली की कीमतें बढ़ीं, जून से बिल में 10% की बढ़ोतरी होगी | Karnataka में खत्म हुआ CM पद का सस्पेंस, DK Shivakumar पर Congress ने लगाई अंतिम मुहर, 3 जून को ले सकते हैं शपथ | West Bengal BJP अध्यक्ष का दावा: TMC के कई MLA-MP आना चाहते हैं, पर अभी 'दरवाजा बंद'
Advertisement ×