नगर निगमों की स्वायत्तता पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं, मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन

  • नेता सदन नवीन पंडित के नेतृत्व में भाजपा पार्षदों ने उठाई नगर निगमों के अधिकारों की रक्षा की मांग
कानपुर। नगर निगमों की संवैधानिक स्वायत्तता एवं लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा को लेकर भाजपा पार्षद दल ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री को विस्तृत ज्ञापन प्रेषित किया है। यह ज्ञापन नगर निगम भाजपा पार्षद दल के नेता सदन नवीन पंडित के नेतृत्व में भेजा गया, जिसमें नगर निगमों में उद्घाटन शिलापट्टों के नामकरण संबंधी प्रस्तावित व्यवस्था पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नगर निगमों में उद्घाटन शिलापट्टों हेतु एक निर्धारित नामकरण प्रारूप लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। पार्षदों का मत है कि बिना नगर निगम बोर्ड की स्वीकृति के इस प्रकार के निर्देश लागू करना संविधान की 74वीं संशोधन भावना, नगर निगम अधिनियम तथा स्थानीय स्वशासन की अवधारणा के विपरीत है। पार्षदों ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया कि नगर निगमों को विकास कार्यों के लिए प्राप्त होने वाली बड़ी धनराशि 15वें वित्त आयोग के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में शिलापट्टों पर वास्तविक वित्तीय स्रोतों का उचित उल्लेख होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि केवल राज्य सरकार आधारित प्रारूप लागू करना वित्तीय पारदर्शिता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि नगर निगम एक स्वतंत्र स्थानीय स्वशासी संस्था है तथा उसके नीति निर्धारण एवं निर्णय लेने का अधिकार निर्वाचित नगर निगम बोर्ड को प्राप्त है। नगर आयुक्त अथवा प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा एकतरफा नीति संबंधी निर्देश जारी करना विधिक एवं संवैधानिक मर्यादाओं के विपरीत माना जाएगा। भाजपा पार्षद दल ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रस्तावित निर्देशों को अनिवार्य आदेश के बजाय केवल परामर्शात्मक (एडवाइजरी) स्वरूप में रखा जाए, नगर निगमों में इसके क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा विषय को संबंधित नगर निगम बोर्डों के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किया जाए। ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न महत्वपूर्ण निर्णयों एवं उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 के प्रावधानों का भी उल्लेख करते हुए नगर निकायों की स्वायत्तता को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
नेता सदन नवीन पंडित ने कहा कि नगर निगम जनता द्वारा चुनी गई लोकतांत्रिक संस्था है और उसके अधिकारों एवं स्वायत्तता की रक्षा करना प्रत्येक जनप्रतिनिधि का दायित्व है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी राजनीतिक विवाद का नहीं, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था, लोकतांत्रिक अधिकारों और स्थानीय निकायों की गरिमा से जुड़ा हुआ विषय है।
ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री कार्यालय, नगर विकास मंत्री उत्तर प्रदेश, महापौर कानपुर, मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश एवं नगर आयुक्त कानपुर नगर निगम को भी प्रेषित की गई है। इस अवसर पर नेता सदन नवीन पंडित के नेतृत्व में पार्षद तौसीफ खान, निरंजन शुक्ला, जितेन्द्र अवस्थी, अनुराग द्विवेदी, डी.के. गुप्ता, विकास सिंह, दीपक चौहान, जीशान गुड्डा सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने नगर निगमों के अधिकारों एवं स्वायत्तता की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज बुलंद की।

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