- अधिवक्ता संशोधन विधेयक 2026 पर हुई बैठक
कानपुर। अधिवक्ता कल्याण संघर्ष समिति की प्रस्तावित अधिवक्ता संशोधन विधेयक 2026 पर हुई बैठक में बोलते हुए संयोजक पं रवीन्द्र शर्मा पूर्व अध्यक्ष लॉयर्स एसोसिएशन ने बताया कि अधिवक्ता अधिनियम 1961 में पुनः प्रस्तावित संशोधन विधेयक 18 जुलाई 2026 को बी सी आई ने सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी कर सभी अधिवक्ताओं से सुझाव मांगे है प्रमुख रूप से प्रस्तावित संशोधन की धारा 24 से पंजीकरण शुल्क रुपया 750 से बढ़कर 22500 हो जाएगा जिसमें 18 000 राज्य विधिज्ञ परिषद और 4500 रुपया बार काउंसिल आफ इंडिया का होगा।
कहा कि पंजीकरण शुल्क 22500 होने से सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के होनहार और बुद्धिमान बच्चे वकालत करने से वंचित हो जाएंगे। पहले कुलीन और जमींदार घरानों के लोग अधिवक्ता बनते थे आज जन सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के होनहार बच्चे भी वकालत में आ रहे है और विधि विशेषज्ञ बन रहे है । प्रस्तावित संशोधन की धारा 12 से विदेशी अधिवक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता में भाग लेने की अनुमति देने का प्रस्ताव ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह विदेशी अधिवक्ताओं को भारत में प्रवेश की शुरुवात होगी। धारा 24 सी के अनुसार किसी मुकदमें में अधिवक्ता को 2 साल या उससे अधिक की सजा पर अधिवक्ता का नाम राज्य के अधिवक्ता पंजीकरण से हटा दिया जाएगा।
अपील निर्णयन से पूर्व हटाना विधि विरुद्ध है। सामाजिक सुरक्षा और कल्याण के नाम पर बीमा पेंशन चिकित्सा आदि की बात तो प्रस्तावित की किंतु कब होगा कैसे होगा और कितने समय में कौन सी पालिसी लागू होगी की निश्चित समयावधि और प्रारूप न दिया जाना अधिवक्ताओं के साथ धोखा है । कानून मंत्री मेघवाल प्रस्तावित संशोधन तो ले आए किंतु अधिवक्ताओं की सुरक्षा हेतु प्रस्तावित संशोधन में अधिवक्ता संरक्षण जिसके अंतर्गत अधिवक्ताओं पर मुकदमा लिखे जाने या गिरफ्तारी से पूर्व बार संघों की अनुमति आवश्यक हो का प्रस्ताव न होना अधिवक्ता समाज के साथ धोखा है हम इसका विरोध करते है।ऐसी क्या जल्दी है कि प्रस्तावित संशोधन विधेयक पर 31 जुलाई 2026 को दोपहर 3 बजे तक देश भर से सुझाव लेने है इसी से साबित है कि सरकार प्रस्तावित संशोधन विधेयक को लागू करने की कितनी जल्दी में है। प्रदेश और देश के सभी अधिवक्तागण इस प्रस्तावित संशोधन विधेयक का भी अधिवक्ता संशोधन विधेयक 2025 की तरह तब तक विरोध करेंगे जब तक पंजीकरण शुल्क पूर्व की भांति होने के साथ निश्चित समयावधि में अधिवक्ताओं की सुरक्षा बीमा पेंशन सहित अधिवक्ताओं को सपरिवार कैसे लेश इलाज लागू करने का प्रस्ताव नहीं दिया जाता।
प्रमुख रूप से भानु द्विवेदी, देवी प्रसाद मिश्रा, संजीव सोनकर, दिनेश यादव, संजीव कपूर, शिवम गंगवार, भारत पाल, आयुष शुक्ला, अमर दीप शौर्य, सौरभ चैतन्य जायसवाल, साजिद खान, इंद्रेश मिश्रा, आदित्य वीर जोशी आदि रहे।
