- 36 टीमें गांव-गांव और वार्डों में पहुंचकर करेंगी पंजीकरण व टीकाकरण
- 8 सितंबर तक चलेगा अभियान, पशुपालकों से सहयोग और पशुओं की टैगिंग कराने की अपील
कानपुर। जनपद में पशुओं को खुरपका-मुँहपका (एफएमडी) जैसी संक्रामक बीमारी से बचाने के लिए बुधवार से विशेष टीकाकरण अभियान शुरू हो गया। विकास भवन परिसर से मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन ने हरी झंडी दिखाकर 36 टीकाकरण टीमों को रवाना किया। ये टीमें जिले के सभी 10 विकास खंडों के गांवों और शहरी क्षेत्र के वार्डों में घर-घर पहुंचकर पशुओं का पंजीकरण और टीकाकरण करेंगी।
मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि जनपद में इस अभियान के तहत 5,26,370 पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि वे टीकाकरण टीमों का सहयोग करें और अपने सभी पात्र पशुओं का समय से टीकाकरण अवश्य कराएं। उन्होंने कहा कि खुरपका-मुँहपका अत्यंत संक्रामक रोग है और समय पर टीकाकरण ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
अभियान के शुभारंभ अवसर पर अपर निदेशक ग्रेड-2, कानपुर मंडल, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुराग सिंह, संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी तथा टीकाकरण दल के सदस्य उपस्थित रहे।
अपर निदेशक ग्रेड-2 ने बताया कि खुरपका-मुँहपका एक वायरल रोग है, जो मुख्य रूप से गाय, भैंस, बछड़े, बैल, बकरी, भेड़ और सूकर जैसे खुर वाले पशुओं को प्रभावित करता है। रोग होने पर पशुओं में तेज बुखार, अत्यधिक लार गिरना, खुरों के बीच छाले पड़ना, दूध उत्पादन में कमी तथा गर्भित पशुओं में गर्भपात जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि नियमित टीकाकरण से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुराग सिंह ने बताया कि जिन पशुओं के कानों में अभी तक टैग नहीं लगे हैं, उनकी टैगिंग कराकर भारत पशुधन ऐप पर पंजीकरण कराया जाए। पंजीकरण के लिए पशुपालक अपना मोबाइल नंबर और ओटीपी टीकाकरण टीम को उपलब्ध कराएं, ताकि पशुओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो सके और पशुपालकों को विभाग की अन्य योजनाओं का भी लाभ मिल सके।
उन्होंने बताया कि यह विशेष अभियान 22 जुलाई से 8 सितंबर 2026 तक चलेगा। ग्राम पंचायतों, नगर पालिका परिषदों और नगर निगम से भी अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार में सहयोग करने तथा अधिक से अधिक पशुपालकों को सामूहिक टीकाकरण के लिए प्रेरित करने की अपील की गई है। उन्होंने कहा कि अभियान की सफलता तभी संभव है, जब सभी पात्र पशुओं का समयबद्ध और व्यापक स्तर पर टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए।
