करूंगा शिकायत
रब के दर पर
जिन्होंने मुझे रुलाया है।
मुस्कुरा कर
औरों के संग
मेरी आंखों में आंसू लाए है।
थक चुका हूं
हर रिश्ते को निभा कर
अब जाकर
अपने रब के घर
उसको अपना
हर गम सुनाऊंगा।
दुआएं जिनको
रास न आई मेरी
देकर बददुआएं उनको
अपनी बिरहा की कहानी
सब को सुनाऊंगा।

डॉ.राजीव डोगरा
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश (युवा कवि लेखक)
