जिस तरह सत्तर दिन बाद राष्ट्रवादी युवक स्वतंत्र भारद्वाज पर एक तरफ़ा कार्यवाही के लिए खास गैंग ने पुलिस पर दबाव बनाया और राजनीति की है उससे यह बिल्कुल स्पष्ट हो गया कि देश अघोषित अराजकता की तरफ तेजी से बढ़ चला है। आप सोचिये जिस अराजक लड़की का बाप स्वयं कबूल कर रहा कि उसने सवर्ण युवक को पीटा उसका विडिओ बनाया और पुलिस नहीं आती तो और पीटता फिर जब अपने बचाव में युवक ने हाथ चलाया तो ग़लती से उसके हाथ का कड़ा भीड़ में खड़े उस अराजक लड़की के अराजक बाप को लग जाता है वहीं पुलिस कम्प्लेन होती है जाँच में युवक सही पाया जाता है। लेकिन लड़की दलित वर्ग से है और उसे मामले के सत्तर दिन बाद याद आया कि अगर एट्रोसिटी एक्ट किसी जुगाड़ से लगवा दिया जाय तो मुआवजे के 12 – 13 लाख रुपयों का जुगाड़ बैठे बिठाये हो जायेगा ! फिर वह एजेंडेबाज लड़की अपने बाप को कन्विन्स करती है और विक्टिम कार्ड खेलने का प्लान बनाती है। राहुल गाँधी को वीडियो ट्विट कर नकली आँशु बहा न्याय की नकली गुहार लगाती है जिसके बाद श्रेय लेने का अंधा दौड़ शुरू होता है जिसमें रावन रांका और राहुल एक साथ पप्पू बने थानो की ओर दौड़ पड़ते है एक निर्दोष सवर्ण को फ़साने ! देश अब संविधान से नहीं उग्र धरने , जबरदस्ती और विक्टिम कार्ड से चल रहा। मुझे ऐसा लगता है कि देश एक अघोषित आरजकता की तरफ धकेला जा रहा है और इसके सारे किरदार दलित राजनीति एजेंडे के टूलकिट बने हुये है कोई जिन्ना की भूमिका में है तो कोई तुष्टिकरण के लिये बाबा साहब की भूमिका में है। राष्ट्रवादी दलित नेतृत्व समाप्त हो चुका है। दलितों का नेतृत्व पूरी तरह है जातिवादी और मजहबी लोगो के हाथ मे पहुंच चुका है। पप्पू यादव और रावन जैसे सांसद हिंदूओ में विभाजन की पूरी तैयारी करवा चुके है।
एक तरफ दलितों को उकसाया जा रहा है वह जमकर हिन्दू देवी देवताओं और हिन्दू धर्म का मजाक उड़ा रहे है वहीं पिछडो और सवर्णों को उकसाया जा रहा है। देश में अब सभी जातीय श्रेष्ठता के अहंकार से ग्रसित हो रहे है और बड़े बड़े नेता जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और देश के नेता विपक्ष राहुल गांधी शामिल है वह अपनी पार्टी सहित हर प्रकार से जातीय उन्माद फैलाने का काम कर रहे हैं। हर मुद्दे पर जाति एंगल ढूंढ करके लोगों को लडने के लिए प्रेरित किया जा रहा है दूसरी तरफ मुस्लिम तुष्टीकरण के सामने समर्पण किया जा रहा है चंद्रशेखर रावण और ओवैसी देश में अपनी विभाजनकारी भूमिका का निर्माण कर रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के नाम पर देश की व्यवस्था को अव्यवस्थित किये जाने का प्रयास किया जा रहा है। हिंदुओं से उनके धंधे पहले ही छुड़ा लिये गए हैं उनका ब्रेनवॉश इतना किया जा चुका है कि वह अपने धन्धों से दूर हो गए हैं हिंदूओ को अपनी सम्रद्धि सिर्फ नौकरी में दिखाई दे रही है। कौशल का काम अब हिंदुओं के बस का नहीं रहा है। चाहे ऑटो मोबाइल का काम हो चाहे फर्नीचर का काम हो फेब्रिकेशन का काम हो या फिर एसी फ्रिज कूलर का काम हो या फिर ऑनलाइन डिलीवरी करने का काम हो इन सारे कामों पर मजहबी लोगों का कब्जा हो चुका है। सवर्ण हिंदूओ को बताया जा रहा है कि तुम्हारे जीवन स्तर छोटे परिवार रखने से ही सुधरेगा इसलिए कम बच्चे पैदा करो और अपने कामों के लिए दूसरों पर निर्भर रहो। हिंन्दुओ का लक्ष्य बड़ी-बड़ी कंपनी में नोकरी करना है और खुद के प्रत्येक काम के लिये मजहबी लोगो पर निर्भर है । स्थिति यहां तक है कई घरों में काम करने वाले खाना बनाने वाले भी मजहबी लोग हैं क्योंकि हिंदुओं की महिलाएं घर का काम छोड़कर अपने बच्चों को नफरती आया कि भरोसे छोड़ करके किसी संस्थान में नौकरी करना ज्यादा पसंद कर रही। दूसरी तरफ वह एक मोहल्ले को एक शहर को या एक गांव को अपना निशाना बनाकर के अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। पलायन लवजिहाद धर्मान्तरण पूरी योजना के साथ किया जा रहा है। जरा जरा सी बात पर उनकी संगठित भीड़ पुलिस और सुरक्षा में लगे हुए अधिकारियों को निशाना बना रही है।
गांव – गांव में बौद्ध मंदिर और मस्जिद बन रही है मौलवी भी आ रहे हैं। योजना के तहत कल तक जिनका पूरा जीवन चक्र हिंदुओं की परंपराओं को करने में बीतता था वह होली दिवाली के त्यौहार मनाते थे आज वह सब भजन के बोल कान में सुनाई देने पर सड़कों पर उत्पात करने को उतारू दिखाई देते हैं। आपके अपने शहर में देख लीजिएगा पिछले 10 साल के मुकाबले देखेंगे तो निले झंडे और टोपी वालों की, ऊंचा पजामा पहनने वालों की और नीला गमछा और बुर्का पहनने वालों की संख्या आपको बढ़ती हुई दिखाई दे जाएगी दूसरी तरफ सवर्ण हिंदुओं के परिवारों में बच्चे भी पैदा नहीं हो रहे। 30-35 साल तक हिंदुओं के विवाह नहीं हो रहे विवाह के बाद भी उनके वैवाहिक संबंध खराब हो रहे हैं परिवार न्यायालय में उनके मामले चल रहे हैं हिंदू जनसंख्या तेजी के साथ घट रही है और मुस्लिम आबादी हिंदुओं की अपेक्षा कई गुना ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। आप महसूस करेंगे तो देखेंगे हर शहर के बाहर प्रवेश के नाके पर एक मजहबी बस्ती आपको मिलेगी क्या यह योजना बद्ध होता आपको महसूस नही हो रहा। लगातार खबरें आती है की एमएनसी या अन्य बड़ी कम्पनियों में काम करने वाले मजहबी लोग भी अपने एजेंडे को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे है । जिसकी जितनी आबादी उसकी उतनी हिस्सेदारी जैसे नारे तक दिये जा रहें। टीसीएस का मामला आप सबके सामने है घरेलू उत्पादन रोजमर्रा की चीजों पर हलाला उत्पादों की बाढ़ आ चुकी है उन्होंने एक समानांतर अर्थव्यवस्था पैदा कर रखी है । दलित हिंदू नेता अपनी जाति के लिए लड़ रहा है और दूसरी जाति को अपमानित कर रहा है। दलित और पिछड़ा हिंदू नेता सिर्फ जातीय गणित से अपना निर्वाचन क्षेत्र ढूंढ रहा है। मुस्लिम नेता किसी भी क्षेत्र से खड़ा हो रहा है उस क्षेत्र में चाहे सिया हो चाहे सुन्नी हो चाहे पसमांदा हो चाहे अहमदिया हो और चाहे बरेलवी या देवबंदी हो सब उनको एकमुश्त वोट देने को तैयार है हैदराबाद का एक नेता ओवैसी उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ने के लिए आता है बिहार में उसके विधायक थे कई प्रदेशों में उसके नेतृत्व में लोग चुनाव लड़ने को तैयार है और हम कभी यूजीसी के नाम पर कभी आरक्षण के नाम पर एक दूसरे को गालियां दे रहे है।
हमें समझ ही नही आ रहा की खतरा कहां का है अगर आज भी नहीं सम्भले और शत्रुबोध नहीं हुआ तो उनका जो एंजेंडा 2047 का था वह और शायद 2037 तक पूरा हो जाए लेकिन हिंदुओं को कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। कब तक हिंदू सरकारों के सहारे अपने पलायन को बचाएगा कब तक सरकारों के सहारे अपनी अस्मिता को बचाएगा शत्रुबोध होगा तभी आप अपने आप को बचा सकते हैं जीव जंतु में भी शत्रुबोध है लेकिन हिंदूओ में नहीं। आज बंगाल में भाजपा की सरकार बन गई तो वहाँ हिंदू अपने आप को सुरक्षित महसूस करने लगा अगर नहीं बनती तो बस अपमान ! असम में जो स्थिति थी वह भी सबके सामने है वहां भी भाजपा की सरकार बन गई इसलिये वहां हिंदू सुरक्षित महसूस कर रहा है । हमने कश्मीर की घटनाओं को भुला दिया हमने ममता के राज्य में बंगाल में हुए हिंदुओं पर हुये अत्याचार को भुला दिया लेकिन वह तुर्की के खलीफा की बात को याद रखते है वह ईरान के साथ भी खड़े होते हैं हमारे यहां पाकिस्तान के साथ दोस्ती करने के लिए लोग आज भी तैयार दिखाई देते हैं लेकिन वह इजराइल के साथ कोई बात नहीं करना चाहते हैं वह आज भी फालस्तीन के लिए माहौल बना रहे हैं जो आजादी के बाद बना था। आज भारत का ही विपक्ष जब भारत माता की जय और वंदे मातरम बोलने से इनकार कर रहा तो एजेंडा समझिए। आज भी वही किया जा रहा है राहुल गांधी सीधे तौर पर मनुस्मृति के सहारे हिंदुओं की अस्मिता को चुनौती दे रहे हैं और हिंदू सारे खेल को सिर्फ राजनीतिक बयान बाजी मान रहा है। हिंदू कह रहा है कि यह तो भाजपा के विरोध में राहुल गांधी ने कहा है। अरे ! राहुल गांधी जो कुछ कह रहे हैं, करवा रहें वह नफरत की राजनीति है, बाँटने की राजनीति है उसमें फसना नहीं है। वह भाजपा का नहीं हिंदुओं का विरोध कर रहे हैं और वह भी योजना के तहत कर रहे है।

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक
जौनपुर यूपी
