कानपुर। आगामी 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क लगाए जाने तथा उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी जोड़ने से कुल प्रभावी शुल्क 0.472 प्रतिशत होने की प्रस्तावित व्यवस्था के विरोध में व्यापारियों ने आज प्रदेश के पचास से अधिक जिलों में सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।
संगठन से जुड़े कानपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी पदाधिकारियों एवं व्यापारियों ने बाजारों या मंदिरों के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ किया और यूपीआई पर एमडीआर शुल्क वापस लेने की मांग की।11 बार हनुमान चालीसा पढ़ने के उपरांत व्यापारियों ने हाथों में पोस्टर लेकर “ यूपीआई पर एमडीआर शुल्क मंजूर नहीं—मंजूर नहीं ” के नारे भी लगाए।
इस दौरान भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने कहा कि यूपीआई भुगतान पर आगामी 15 अक्टूबर से पर्सन टू मर्चेंट ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर एमडीआर शुल्क लगाए जाने की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर व्यापारियों में चिंता है। यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने से व्यापारियों की लागत बढ़ेगी और उनकी आय प्रभावित हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप कुछ व्यापारी डिजिटल भुगतान के बजाय नकद भुगतान को प्राथमिकता देने लगे हैं और अभी से, व्यापारियों ने ग्राहकों से नकद धनराशि देने के लिए कहना शुरू कर दिया है।
इस अवसर पर संगठन के जिलाध्यक्ष विजय गुप्ता गोरे ने कहा कि व्यापारी स्वाभाविक रूप से किसी भी अतिरिक्त लागत को अपनी व्यापारिक लागत में शामिल करने का प्रयास करेगा, जिसका अप्रत्यक्ष बोझ अंततः ग्राहकों पर पड़ सकता है। उन्होंने मांग की कि एमडीआर शुल्क को तत्काल वापस लिया जाए, अन्यथा पूरे प्रदेश में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
किदवईनगर उद्योग व्यापार मंडल के वरिष्ठ महामंत्री राजकुमार गुप्ता, युवा अध्यक्ष विनायक पोद्दार ,महामंत्री बालकृष्ण गुप्ता व सुबोध पांडे और युवा वरिष्ठ महामंत्री प्रखर श्रीवास्तव ने कहा कि* जब सरकार लगातार डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित कर रही है, तो यूपीआई पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के बजाय ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे व्यापारी और ग्राहक बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ के डिजिटल भुगतान का अधिक से अधिक उपयोग कर सकें।
