कानपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की कानपुर महानगर इकाई द्वारा शुक्रवार को छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर “लोकतंत्र अपनाओ–अराजकता हटाओ” के नारे के साथ प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन के माध्यम से अभाविप ने देश की संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक संस्थाओं, विशेषकर निर्वाचन आयोग और न्यायालय की गरिमा को धूमिल करने, उन पर निराधार प्रश्नचिह्न खड़ा करने और उनके विरुद्ध अविश्वास फैलाने के प्रयासों की कड़ी निंदा की। अपने राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति करने हेतु हिंसा एवं अराजकता का सहारा लेना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। प्रदर्शन में अभाविप कार्यकर्ताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं और राष्ट्रीय एकता के पक्ष में अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
सर्वविदित है की भारत का निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है, जो संवैधानिक मूल्यों और निर्धारित प्रक्रियाओं के आधार पर देश में निष्पक्ष निर्वाचन कराने एवं उससे संबंधित आवश्यक सुधारों को लागू करने के लिए पूर्णतः उत्तरदायी है। यदि इससे संबंधित किसी प्रक्रिया को लेकर किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल को कोई आपत्ति होती है, तो उसके लिए संविधान और कानून के तहत स्पष्ट नियम व वैधानिक मंच बने हुए हैं। SIR जैसी प्रक्रिया में भी किसी पात्र मतदाता का नाम छूट जाने पर उसे पुनः जोड़ने की एक निर्धारित प्रक्रिया मौजूद है, जिसका लाभ सभी ज़रूरतमंद नागरिक ले रहे हैं। इसके बावजूद, स्वायत्त संस्थाओं पर निराधार प्रश्नचिह्न लगाना और अराजकता के माध्यम से दबाव बनाकर उनकी स्वायत्त एवं पारदर्शी कार्यप्रणाली को प्रभावित करने का प्रयास करना भारत में लोकतंत्र को कमजोर करने का कुत्सित प्रयास है।
अभाविप का यह स्पष्ट मत है कि देश की संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और मर्यादा की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। भारत का जागरूक युवा और विद्यार्थी लोकतंत्र को कमजोर करने वाली और देश में अराजकता फैलाने वाली इन सभी शक्तियों तथा षड्यंत्रों का पूरी ताकत के साथ विभिन्न लोकतांत्रिक माध्यमों से कड़ा प्रतिकार कर रहा है। इसी संकल्प के साथ आज विश्वविद्यालय पर “लोकतंत्र अपनाओ–अराजकता हटाओ” के नारे के साथ यह विशाल प्रदर्शन आयोजित किया गया।
प्रदर्शन के दौरान अभाविप के प्रदेश मंत्री दिनेश यादव ने कहा कि “देश की संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और चुनावी सुधार प्रक्रियाओं पर निराधार प्रश्नचिह्न उठाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के सर्वथा विपरीत है। राजनीतिक असहमति की आड़ में देश में अराजकता और अव्यवस्था फैलाने का प्रयास अत्यंत निंदनीय है। विरोध के नाम पर भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसी अस्थिरता उत्पन्न करने की बात करना सीधे तौर पर हमारे संविधान और लोकतंत्र की आत्मा पर प्रहार है। देश विरोधी कृत्य करने वाली ऐसी शक्तियों और साजिशों को भारत का जागरूक युवा और छात्र समाज एकजुट होकर मुंहतोड़ जवाब देगा।”
प्रान्त सह मंत्री मयंक ने कहा कि “चुनाव सुधार की पारदर्शी प्रक्रियाओं को विवादित बनाकर और निष्पक्ष संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करके देश में अराजकता का वातावरण बनाना अलोकतांत्रिक मानसिकता का परिचायक है। भारत जैसे मजबूत लोकतंत्र में पड़ोसी देशों जैसी हिंसा और अस्थिरता फैलाने की बात करना राष्ट्रहित के विरुद्ध है। देश की शांति, अखंडता और संवैधानिक व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले ऐसे किसी भी देश विरोधी कृत्य को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और भारत की छात्रशक्ति व युवा इसका पूरी ताकत से कड़ा प्रतिकार करेंगे।”
कानपुर महानगर मंत्री सुधांशु त्रिपाठी ने कहा कि “लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार सभी को है, लेकिन यह अधिकार जिम्मेदारी और अनुशासन से बंधा हुआ है। चुनावी सुधारों और SIR जैसी प्रक्रियाओं पर स्वस्थ चर्चा होनी चाहिए, न कि उन्हें विवाद और अविश्वास का माध्यम बनाया जाना चाहिए। जनता के बीच भ्रम फैलाकर या संवैधानिक संस्थाओं पर प्रश्नचिह्न लगाकर लोकतंत्र को मजबूत नहीं किया जा सकता। यह प्रदर्शन राष्ट्रहित और संवैधानिक मूल्यों के प्रति विद्यार्थियों की अडिग प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
अभाविप ने देश के समस्त युवाओं और नागरिकों का आह्वान किया है कि वे तथ्यों के आधार पर राष्ट्रीय विषयों पर विचार करें। साथ ही अपने लोकतांत्रिक कर्तव्यों को समझते हुए किसी भी प्रकार की अराजकता को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों का खुलकर प्रतिकार करें। इस दौरान खुशी भारती, प्रभात, आरसी तिवारी, अनामिका, तरुण, प्रथम, मानस, अनुराग शर्मा, प्रखर दीक्षित, स्वतंत्र राजपूत, आर्यन तिवारी, कार्तिकेय राय सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
