ब्रेस्ट कैंसर फिजिकल ही नहीं, मेंटल हेल्थ को भी करता है प्रभावित

महिलाएं सबसे ज्यादा ब्रेस्ट कैंसर का शिकार होती हैं. ब्रेस्ट कैंसर से शारीरिक तकलीफ नहीं बल्कि इसका असर मन और दिल पर भी पड़ता है. ब्रेस्ट कैंसर मरीज की शारीरिक हेल्थ साथ-साथ मेंटल हेल्थ को भी नुकसान पहुंचाता है. आज के समय में भले ही ब्रेस्ट कैंसर के इलाज से महिलाएं जंग जीत रही हैं लेकिन इलाज के बाद भी इस बीमारी के गहरे निशान महिलाओं के जेहन में बैठ जाते हैं. सी.के. बिरला हॉस्पिटल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा ने बताया है कि कैसे ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं के मेंटल हेल्थ को प्रभावित करता है.

ब्रेस्ट कैंसर का पता चलते हीं मरीज सबसे पहले इनकार की स्थिति में होता है. शरीर में होने वाले बदलाव और ब्रेस्ट को खोने के डर से कई बार महिलाएं डॉक्टर्स परामर्श लेने से रुकती है जिस वजह से बीमारी का इलाज देर से होता है. कुछ महिलाएं ब्रेस्ट हटाने वाली सर्जरी के डर से जांच करवाने से डरती हैं या फिर कतराती है, जिस वजह से बीमारी बढ़ जाती है. इस देरी की वजह से इलाज में मुश्किल आती हैं वहीं मरीज पर तनाव भी बढ़ जाा है.

ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी के बाद महिलाओं के शरीर और मन पर गहरा असर पड़ता है. ब्रेस्ट का आकार बदले या फिर ब्रेस्ट को खोने के बाद महिलाएं खुद को कम आंकने लगती हैं. इस वजह से कई बार उनमें डिप्रेशन, अलगाव की भावना आती है. कई बार महिलाएं खुद को सोशल एक्टिविटीज से भी दूर कर लेती हैं.

ब्रेस्ट कैंसर का असर न केवल शरीर, मन बल्कि रिश्तों पर भी पड़ता है. रिसर्च के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर के बाद कई बार शादीशुदा लाइफ में दूरी या फिर तनाव आ जाता है, जिस वजह से रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच जाता है. ब्रेस्ट खोने और मानसिक तनाव की वजह से महिलाएं इंटिमेसी और आत्मविश्वास खो देती हैं जिस वजह से पति-पत्नी के रिश्ते में खटास आ सकती है.

आज के समय में मेडिकल साइंस में काफी तरक्की हुई है. अब ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में काफी प्रगति हुई है. रोबोटिक सर्जरी और ओंकोप्लास्टिक के द्वारा डॉक्टर कैंसर के ऊतक को हटाने के साथ-साथ बेस्ट के आकार को नेचुरल रखने में कामयाब हो सकते हैं. इसके अलावा पुनर्निर्माण की तकनीक से ब्रेस्ट को नेचुरल रूप दिया जा सकता है जो कि मरीज के आत्मविश्वास को बढ़ाने में मददगार साबित होगा.

ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों को मेंटल हेल्थ सपोर्ट की जरूरत होती है. काउंसलिंग, सपोर्ट ग्रुप और थेरेपी की मदद से उनके मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है.

प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों की मदद ली है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

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