नॉर्मल हेडफोन्स की तुलना में नॉइज कैंसलिंग हेडफोन्स की डिमांड आज के समय में तेजी से बढ़ती जा रही है. इसकी मदद से भीड़-भाड़ वाली जगहों पर भी आसानी से कॉलिंग और वीडियो, म्यूजिक को बिना किसी बाहरी शोर के इंजॉय किया जा सकता है.
इम्पीरियल कॉलेज हेल्थकेयर के ऑडियोलॉजी के विशेषज्ञ रेनी अल्मेडा बताती हैं कि सुनायी आने और सुनने में फर्क होता है. यदि व्यक्ति केवल वही सुन रहा है, जो वह सुनना चाहता है, तो मस्तिष्क स्वाभाविक रूप से अन्य ध्वनियों को फिल्टर करने में असमर्थ हो सकता है.
नॉइज कैंसलिंग हेडफोन्स का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और अनुमान है कि यह 2031 तक 45.4 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा. इस बढ़ते उपयोग के बावजूद, विशेषज्ञों का कहना है कि यह मस्तिष्क को ध्वनियों की सही प्रोसेसिंग में परेशानी दे सकता है. मस्तिष्क की नेचुरल आवाजों को पहचानने की क्षमता धीमी पड़ सकती है, विशेषकर युवाओं में, जो इस तकनीक का बहुत अधिक उपयोग कर रहे हैं.
नॉइज कैंसलिंग हेडफोन्स के अन्य साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं. लंबे समय तक इसका इस्तेमाल करने से कान में दबाव बन सकता है, जिससे सिरदर्द, चक्कर, थकान और असुविधा हो सकती है. इसके अलावा, गलत हाइजीन से कान में इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ सकता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि हेडफोन का इस्तेमाल सीमित समय तक करना चाहिए, ताकि मस्तिष्क और कान की नेचुरल सुनने की क्षमता बनी रहे. NHS के ऑडियोलॉजिस्ट डॉ. रुथ रीसमैन ने सिफारिश की है कि नॉइज कैंसलिंग हेडफोन्स का उपयोग दिन में दो से तीन घंटे से अधिक नहीं किया जाए.
