दुर्गा पूजा में उत्पात मचाया तो अब खैर नहीं….. देखते ही गोली मारने का आदेश… CM बोले- वापस नहीं होगा फैसला

हमारे देश में अब पर्व और त्योहारों का सीजन शुरू होने जा रहा है। इसकी शुरुआत नवरात्र यानी दुर्गा पूजा से होने वाली है। इस बार देश में दुर्गा पूजा की शुरुआत 28 सितंबर से हो रही है। इसको लेकर देश की कई जगहों पर पंडाल और मां दुर्गा की प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं।
वहीं, दुर्गा पूजा में कानून व्यवस्था तगड़ी रहे और कोई भी इस दौरान उत्पात ना मचाए, इसके लिए असम की सरकार ने एक बड़ा आदेश किया है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने इस आदेश को लेकर फिर से आज दोहराया है कि वे इसे वापस नहीं लेने जा रहे हैं।

‘Shoot at Sight’ का आदेश

असम में अभी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और यहां के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा हैं। उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए एक बड़ा आदेश दिया है। मिली जानकारी के अनुसार, असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने आदेश दिया है कि जो भी दुर्गा पूजा के दौरान कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाएगा, जो उत्पात मचाएगा, उसके लिए देखते ही गोली मारने का आदेश है। मिली जानकारी के अनुसार, सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने धुबरी में दुर्गा पूजा के दौरान ‘Shoot at Sight’ का आदेश दिया है।

देखते ही गोली मारने के आदेश को वापस नहीं ले रहे हैं- सीएम

सीएम सरमा ने आज भी अपने उस आदेश को लेकर कहा कि हम देखते ही गोली मारने के आदेश को वापस नहीं ले रहे हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने आज कहा, “…कल भी हमने 26 बांग्लादेशियों को खदेड़ा। इसलिए, असम आंदोलन के समय से ही, आपको कभी यह सुनने को नहीं मिलेगा कि एक भी बांग्लादेशी को खदेड़ा गया हो…और यह सच है कि असम और पूर्वोत्तर को एक गलियारे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसलिए इसे नकारा नहीं जा सकता। यह प्रामाणिक जानकारी है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमें अन्य क्षेत्रों में कोई समस्या नहीं है क्योंकि लोग शांति और सौहार्द बनाए हुए हैं। लेकिन हमारी चिंता हमेशा धुबरी और दक्षिण सलमारा को लेकर है क्योंकि ये दो सीमावर्ती जिले हैं। हालांकि, दक्षिण सलमारा में पिछले पांच वर्षों में कोई भी प्रतिकूल घटना दर्ज नहीं की गई है। धुबरी में काफी गतिविधियां चल रही हैं… हम पहले जारी किए गए देखते ही गोली मारने के आदेश को वापस नहीं ले रहे हैं…”
फैसले का कई लोगों ने किया विरोध 

विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, असम में सीएम के इस आदेश और फैसले के बाद से कई लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि इस फैसले से प्रदेश में साम्प्रदायिक तनाव बढ़ सकता है। वहीं, कई लोगों का आरोप है कि सरकार 2026 चुनाव से पहले माहौल को तनावपूर्ण करना चाहती है। इससे हिंदू और मुसलमानों के बीच तनाव की भी आशंका जताई गई है।

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