पिछले कुछ वक्त से दुनियाभर में कार्डियोवेस्कुलर डिजीज के मामले तेजी से बढ़े हैं, हमने देखा है कि आम से लेकर खास लोग कम उम्र में हार्ट अटैक या दिल से जुड़ी दूसरी बीमारियों की वजह से मौत के शिकार हो रहे. इनमें से काफी लोग यंग एज ग्रुप के भी है. ऐसी बीमारियां अलार्मिंग रेट से बढ़ रही है, जिसे वक्त रहते ध्यान देना जरूरी है, वरना ऐसा न हो कि कई और लोगों को अपनी जान गंवानी पड़े.
वर्ल्ड हेल्थ फेडरेशन के मुताबिक दुनियाभर में कार्डियोवैस्कुलर डिजीज से होने वाली मौत की संख्या काफी ज्यादा बढ़ गई है. 1990 में में ये आंकड़ा 1 करोड़ 21 लाख का था ज साल 2021 में बढ़कर 2 करोड़ 5 लाख तक पहुंच गया. दिल की बीमारियां वर्ल्ड वाइड डेथ का एक बड़ा कारण बन चुका है. लो और मिडिल इनकम वाले देशों में ये तदाद ज्यादा है.
भारत की बात करें तो कार्डियोवेस्कुलर डिजीज एक साइलेंट किलर बन चुका है, जो खासकर बुजुर्गों को तो शिकार बनाता ही है, लेकिन युवा वर्ग भी इससे काफी ज्यादा प्रभावित हो चुका है. ऐसे में इस बात का पता लगाने की जरूरत है कि ऐसा आखिर क्यों हो रहा है.
मौत और बीमारी पर किसी का कंट्रोल नहीं होता, लेकिन हम कुछ खास बातों का ध्यान रखकर हार्ट अटैक के खतरे को कम कर सकते हैं. बेहतर है कि आप अपनी डेली लाइफस्टाइल और फूड हैबिट्स को हेल्दी बनाएं. ऑयली, स्वीट और सॉल्टी फूड्स से दूर रहें, डेली एक्सरसाइज के लिए एक घंटे निकालें, शराब-सिरगेट से तौबा करें और अपना रेग्युलर हेल्थ चेक-अप कराते रहें.
