कानपुर। चुन्नीगंज में स्मार्ट सिटी के तहत बना कन्वेंशन सेंटर आखिर किसके लिए बनाया गया है? शहर की जनता के लिए या कुछ खास आयोजनों के लिए? करोड़ों रुपये की लागत से बने इस सार्वजनिक परिसर को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। आम नागरिकों को यह जानने का इंतजार है कि यह केंद्र नियमित रूप से कब चालू होगा, इसकी बुकिंग की व्यवस्था क्या होगी और शहर के सामाजिक, सांस्कृतिक व व्यावसायिक आयोजनों के लिए यह कब उपलब्ध होगा। लेकिन जैसे ही क्राफ्टरूट्स की प्रदर्शनी का कार्यक्रम आता है, इसी कन्वेंशन सेंटर में गतिविधियां शुरू हो जाती हैं। पिछले साल भी प्रदर्शनी के दौरान यह परिसर चर्चा में आया था और अब एक बार फिर उसी प्रदर्शनी के लिए इसके इस्तेमाल की बात सामने है।
तो सवाल स्वाभाविक है—क्या सार्वजनिक संपत्तियों के इस्तेमाल के नियम सबके लिए एक समान हैं?
यदि कन्वेंशन सेंटर अभी नियमित संचालन के लिए तैयार नहीं है, तो किसी विशेष आयोजन के लिए इसे खोलने का आधार क्या है? यदि संचालन और हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो आम जनता के लिए इसकी बुकिंग क्यों स्पष्ट नहीं है? और यदि संचालन से जुड़े निर्णय लिए गए हैं, तो क्या उनमें निर्धारित संस्थागत प्रक्रियाओं और संबंधित निकायों की सहमति का पालन हुआ है? इन सवालों का जवाब किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी करके नहीं, बल्कि संबंधित दस्तावेजों, नियमों और प्रशासनिक पारदर्शिता से मिलना चाहिए।
राज्यपाल का संवैधानिक पद सम्मान का पद है। उनकी पुत्री द्वारा आयोजित प्रदर्शनी भी अपने निर्धारित नियमों के तहत हो सकती है। लेकिन सार्वजनिक संपत्ति के मामले में नागरिकों का यह पूछना भी उतना ही स्वाभाविक है कि जो सुविधा एक आयोजन के लिए उपलब्ध हो सकती है, वह कानपुर की आम जनता के लिए उपलब्ध क्यों नहीं है?
कानपुर को सिर्फ एक शानदार इमारत नहीं चाहिए। उसे ऐसी सार्वजनिक सुविधा चाहिए, जिसका लाभ शहर के हर नागरिक, हर संस्था, हर कलाकार और हर व्यापारी को समान नियमों के तहत मिल सके। कन्वेंशन सेंटर जनता के पैसे से बना है, इसलिए जनता को उसके इस्तेमाल का अधिकार, नियमों की जानकारी और प्रशासन से जवाब मांगने का हक है। अब जरूरत है कि नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रशासन सामने आएं और स्पष्ट करें—कन्वेंशन सेंटर के संचालन की वर्तमान स्थिति क्या है, इसे किस प्रक्रिया के तहत संचालित किया जा रहा है और आम जनता के लिए इसे नियमित रूप से कब खोला जाएगा? कानपुर का सवाल सीधा है: सार्वजनिक संपत्ति के नियम सबके लिए एक समान कब होंगे?
