विपक्ष के पार्टी छाप नेता की ओछी राजनीति..!

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मणिपुर दौरे पर गए पर बंगाल नहीं गए और अब जिस तरह पार्टीछाप नेता की तरह मिस इंडिया में दलित आदिवासी आरक्षण का मुद्दा उठाया उससे कुछ दिनों पहले उन्हें बालकबुद्धि वाला टाइटल देनें वालों की बातें सही प्रतीत होती नजर आने लगी। हास्यास्पद राजनीति के किंग खान राहुल गाँधी को बतौर नेता प्रतिपक्ष सामने आकर यह बताना चाहिए की वह बंगाल और अयोध्या का दौरा क्यों नहीं किए ! वहां के रेप पीड़िता परिवारजनों के न्याय के समर्थन में मार्च और न्याय यात्रा क्यों नहीं कर रहें !  राहुल गांधी बतौर नेता प्रतिपक्ष भाजपा पर बार-बार सवाल उठाकर,  एक अक्षम नेता साबित होने में लगे हुए  है। अगर बारीकी से देखा जाए तो राहुल गांधी अब सपा के लिए बैटिंग कर रहे हैं, जो पहले स्वर्गीय  मुलायम कांग्रेस के लिए  करते नजर आये थे। जिन कामों पर देश का ध्यान तोड़ा जा सकता है और भारत की छवि धूमिल की जा सकती हो वही काम राहुल और अखिलेश की जोड़ी लगातर कर रहीं। भारत जोड़ो यात्रा के समय से अब तक  राहुल गांधी ने हमेशा वंचितों और शोषितों के पीछे खड़े होकर अपनी राजनीतिक छवि सुधारने की कोशिस की है । साथ खड़ी होने वाली राजनीतिक पार्टी सपा को सवारने पर जोर दिया। जब यूपीए सत्ता में थी तो वे भट्टा परसौल और नियामगिरि में भी किसान आंदोलन हुए। संसद में इसी विपक्ष के सांसदों ने ‘मणिपुर को न्याय दो’ के नारे लगाये। विपक्ष के हंगामे और नारेबाज़ी के वीडियो को सोशल मीडिया पर ख़ूब प्रचारित किया गया और भाजपा की ओर से इसमें राहुल गांधी पर ही सवाल उठाये गये हैं कि नेता प्रतिपक्ष होने के नाते वो पश्चिम बंगाल और अयोध्या क्यों नहीं गए ! उन्होंने जानबूझ कर किसान आंदोलन और महिला पहलवानों के  हंगामे को बढ़ावा दिया। बहरहाल, भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी ने आम जनता से सीधे संवाद का सिलसिला दिखाया पर वह स्क्रिप्टेड थी। चुनाव  खत्म होने के बाद राहुल गांधी किसानों, गिग वर्कर्स, कुलियों, बढ़ईयों, छात्रों के बीच अब नहीं जा रहें। युवा, नारी, किसान, श्रमिको के लिए संसद में न्याय नहीं मांग रहें बल्कि जाति जाति का मंतर रट रहें। जाति जनगणना पर उथल पुथल कराना चाह रहें। चुनाव खत्म होने के बाद मोदी फिर से सत्ता में हैं और राहुल गांधी विपक्ष में, लेकिन न नरेन्द्र मोदी अपना ट्रैक बदल रहे हैं, न राहुल गांधी अपने नौटंकी से पीछे हट रहे हैं। भाजपा के नेता  संसद में भी गांधी परिवार को और राहुल गांधी को कोसते दिखे और  संसद में  नीट से लेकर मणिपुर के लोगों के लिए न्याय की बात सपाई करते रहे  राहुल बस अंबानी अडानी करते रहें । संसद से बाहर भी राहुल गांधी बालक बुद्धि वाला काम कर रहे हैं। राहुल गांधी दो बार  मणिपुर जा चुके थे पर पश्चिम बंगाल हिंसा पर चुप्पी मार बैठे यह कायरता और अवसरवादिता की राजनीति है। खास वोटबैंक के प्रति नरमी है।  इससे पहले राहुल गांधी हाथरस गये थे, जहां भगदड़ में मारे गए लोगों के लिए उन्होंने योगी सरकार से न्याय की बात की और इसके लिए चिट्ठी भी लिखी। राहुल गांधी अहमदाबाद में उन कांग्रेस कार्यकर्ताओं के परिजनों से मिले, जिन्हें कांग्रेस कार्यालय में हुई तोड़ फोड़ के बाद गिरफ़्तार किया गया है और राजकोट अग्निकांड के पीडि़तों से मिलकर उन्हें न्याय का आश्वासन दिया। भाजपा ने राहुल गांधी को  पार्ट टाइम और पार्टी टाईम राजनेता होने का आरोप लगाया और सही साबित कर दिया है।

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