बर्खास्तगी के बाद फूट-फूटकर रोए गहलोत के मंत्री रहे राजेंद्र गुढ़ा!

मणिपुर की आग अभी बुझी नहीं है और दूसरी तरफ सियासत भी जारी है. लेकिन इसी मणिपुर को लेकर मोदी सरकार को घेरने वाली कांग्रेस अपने ही राज्य राजस्थान में हो रही हिंसा के मामले में सवालों के घेरे में खड़ी नजर आने लगी हैं. सबसे पहले बात राजस्थान की करते हैं. राजस्थान के एक मंत्री थे राजेंद्र गुढ़ा. राजेंद्र गुढ़ा ये वही नाम है जिनके एक बयान से उनका मंत्री पद छिन गया. राजेंद्र गुढ़ा ने अपनी ही सरकार को निशाने पर लेते हुए हमला बोला है. उन्होंने यहां तक कह डाला है कि मणिपुर के बजाय हमें अपने गिरेबां में झांकना चाहिए.

विधानसभा में मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने अपने ही सरकार को घेरते हुए कहा कि हमें ये बात स्वीकार करना चाहिए कि हम महिलाओं की सुरक्षा में असफल हो गए. राजस्थान में जिस तरह से महिलाओं पर अत्याचार बढ़े हैं मणिपुर के बजाय हमें अपने गिरेबां में झांकना चाहिए. राजेंद्र सिंह गुढ़ा का ये बयान राजस्थान की सियासत में भूचाल साबित हुआ.

राजेंद्र सिंह गुढ़ा के बयान के बाद राजस्थान की गहलोत सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई. बीजेपी नेताओं ने राजस्थान के हालात पर चिंता जाहिर की. इसके बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी और चुनाव प्रभारी प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस पर निशाना साधा. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा कि राजस्थान में रोज घटनाएं सामने आ रही हैं. मुख्यमंत्री के गृह जिले में भी घटनाएं हो रही हैं. अब तो मुख्यमंत्री के सहयोगी भी स्वीकार कर रहे हैं.

‘मणिपुर के बजाय हमें अपने गिरेबां में झांकना चाहिए’, राजस्थान के मंत्री राजेंद्र गुढ़ा को मिली ‘सच’ बोलने की सजा ? अशोक गहलोत ने किया बर्खास्त

वहीं, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में गैंग रेप होता है. कम से कम किसी ने तो सत्य बोलने का साहस किया. इसके अलावा चुनाव प्रभारी प्रहलाद जोशी ने कहा कि राजस्थान महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित राज्य बन गया है. जाहिर है राजेंद्र सिंह गुढ़ा के बयान के बाद बीजेपी को हमलावर होना ही था. लेकिन आननफानन में गहलोत सरकार ने गुढ़ा को बर्खास्त कर दिया. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सिफारिश को राज्यपाल कलराज मिश्र ने मंजूर कर लिया. राजेंद्र सिंह गुढ़ा के खिलाफ हुए एक्शन पर भी उन्होंने एक बार फिर निशाना साधा.

बर्खास्तगी के बाद राजेंद्र गुढ़ा इमोशनल नजर आए हैं. उन्होंने कहा कि अल्पमत में सरकार को मजबूती देने में कसर नहीं छोड़ी. डायरी नहीं निकालता तो अशोक गहलोत की उसी दिन छुट्टी हो जाती. महाराव शेखा के डीएनए से आता हूं महिला उत्पीड़न पर बोलना गलत नहीं. राजस्थान महिला अत्याचार में नंबर वन हुआ ये शर्म की बात है. मुझे जो सच लगा वह सदन में मैंने बोला. राजेंद्र गुढ़ा अंतरात्मा की आवाज पर चलता है. मुझे सच बोलने की सजा मिली. युवा बेरोजगारी से त्रस्त हैं. हताश युवा आत्महत्या कर रहे हैं.

इधर, राजस्थान कांग्रेस के नेता और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह ने राजेंद्र सिंह गुढ़ा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गुढ़ा बीते कई दिनों से गहलोत सरकार के खिलाफ बयान दे रहे थे. वहीं, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि राजेंद्र गुढ़ा कई दिनों से पार्टी लाइन के खिलाफ बोल रहे थे. मुझे भी मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है कि आलाकमान और मुख्यमंत्री ने ये फैसला लिया है. सोच-समझकर ही फैसला लिया होगा. ये बात सही है कि कई दिनों से वो पार्टी विरोधी बयान लगातार दे रहे थे.

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