भूतों ने रातों-रात कराया था इस मंदिर का निर्माण! जानें इसका रहस्य

भारत में लाखों मंदिर हैं. हर मंदिर की अपनी मान्यता और खास कहानी है. ऐसे में आपको जानकर इस बात की हैरानी होगी कि उत्तर प्रेदश के मेरठ जिले में सिम्भावली के दतियाना गांव में शिव का एक प्राचीन मंदिर मौजूद है. ऐसा माना जाता है कि ये मंदिर किसी इंसान या संस्था ने नहीं, बल्कि भूतों ने रातों रात बना डाला था. इस मंदिर को ‘भूतों वाला’ या लाल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है.

ऐसा कहा जाता है कि ये मंदिर बनाते वक्त भूत इसे पूरा नहीं बना पाए थे. मंदिर का निर्माण करते वक्त सूर्योदय हो गया था और भूतों को मंदिर का शिखर बनाए बिना ही भागना पड़ा. साल 1980 में इस मंदिर के शिखर में कई दरारें पड़ गई, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने इसे फिर से बनवाया.

स्थानीय लोगों की मानें, तो इस मंदिर में बहुत ज्यादा शक्ति है, यहां न जाने कितनी बार प्राकृतिक आपदाएं आई, लेकिन मंदिर जस का तस खड़ा रहा, इस पर कोई आंच तक नहीं आई.

इस मंदिर की खास बात ये है कि इसे सीमेंट से नहीं, बल्कि लाल रंग की ईंटों से बनाया गया है. गांववालों की मानें तो हर तरह की आपदा से ये मंदिर उनकी रक्षा करता है.

हालांकि, इतिहासकारों ने भूतों वाले इस मंदिर की बात को साफ तौर पर महज एक अफवाह बताया है. उनका कहना है कि मंदिर के पत्थरों को देखकर यह प्रतीत होता है कि यह तीसरी शताब्दी में गुप्ता साम्राज्य में बनाया गया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Breaking News
'जम्मू-कश्मीर भारत का अहम हिस्सा, इस खूबसूरत जगह को देख कर रोमांचित हूं', CM उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद बोले अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर | कोलकाता होटल अग्निकांड में CM सुवेंदु अधिकारी का बड़ा एक्शन, जांच के लिए 5 सदस्यी SIT टीम का गठन, हादसे में 9 लोगों की मौत....... Gujarat के Bhavnagar में मिलावटी शराब पीने से 2 लोगों की मौत | सपा नेता आजम खान के ठिकानों पर सुबह-सुबह ED की रेड, दिल्ली-रामपुर टू सहारनपुर, 10 जगह एक साथ छापेमारी.... बार-बार समन के बावजूद गैर-हाजिरी: Mahua के खिलाफ Court ने जारी किया Arrest Warrant | दिल्ली के टिकरी कलां में CNG पंप पर ब्लास्ट, 3 की मौत 6 घायल; गैस रिफिलिंग के दौरान ट्रक में हुआ जोरदार धमाका... Swati Maliwal का बड़ा आरोप: Arvind Kejriwal ने Delhi-Punjab को बनाया भ्रष्टाचार का अड्डा
Advertisement ×