अयोध्‍या में होना है उपचुनाव, बीजेपी में दिखी फूट; पूर्व सांसद ने दिखाए बागी तेवर

यूपी में 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है. इनमें अयोध्‍या की मिल्‍कीपुर सीट बीजेपी के लिए प्रतिष्‍ठा का प्रश्‍न बन गई है. इस सीट से सपा विधायक रहे अवधेश प्रसाद ने लोकसभा चुनावों में बीजेपी के लल्‍लू सिंह को हरा दिया. राम मंदिर प्राण प्रतिष्‍ठा कार्यक्रम के बाद इस सीट को बीजेपी की प्रतिष्‍ठा से जोड़कर देखा जा रहा था. अब हारने के बाद बीजेपी किसी भी तरह मिल्‍कीपुर को जीतकर यूपी में सपा के नेतृत्‍व वाले इंडिया गठबंधन से हिसाब चुकता करना चाहती है.

लल्‍लू सिंह ने अचानक छोड़ा मंच
दरअसल इस वक्‍त बीजेपी का यूपी समेत पूरे देश में सदस्‍यता अभियान भी चल रहा है. लिहाजा अयोध्या सर्किट हाउस में सदस्यता अभियान के संबंध में भाजपा के प्रदेश महासचिव संजय राय द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई थी. उस कार्यक्रम में भाजपा नेता और फैजाबाद के पूर्व सांसद लल्लू सिंह भी मौजूद थे लेकिन अचानक गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच में ही उठे और कार्यक्रम को छोड़कर चले गए. उन्‍होंने आरोप लगाया कि ‘‘मंच पर माफिया तत्व मौजूद हैं. मैं माफिया के साथ नहीं बैठ सकता.’’

अयोध्या में भाजपा के प्रदेश नेतृत्व द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस से अचानक बाहर निकलते के बाद उन्‍होंने आरोप लगाया कि मंच पर माफिया तत्व मौजूद थे जिसके बाद उन्हें उठकर परिसर से बाहर जाना पड़ा. लल्लू सिंह ने सीधे किसी का नाम नहीं लिया. लेकिन, उनका इशारा स्पष्ट रूप से मंच पर बैठे भाजपा नेता शिवेंद्र सिंह की ओर था. सिंह ने मीडियाकर्मियों से कहा, ‘‘मंच पर माफिया मौजूद थे और मैं खुद को ऐसे तत्वों से कभी नहीं जोड़ सकता. मैंने माफिया के खिलाफ लगातार लड़ाई लड़ी है, क्योंकि वे समाज का शोषण और उत्पीड़न करते हैं.’’

गौरतलब है कि शिवेंद्र सिंह पर हत्या के प्रयास और गैंगस्टर अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था और वह वर्ष 2018 में फैजाबाद जेल में बंद थे. बाद में उन्हें बाराबंकी जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था. शिवेंद्र सिंह ने कहा, ‘‘पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने अपने पूरे चुनाव में कुख्यात अपराधियों और खूंखार हिस्ट्रीशीटर के साथ व्यक्तिगत रूप से प्रचार किया जिसके कारण अंततः चुनाव में उनकी हार हुई.’’

बीजेपी का सदस्‍यता अभियान
यूपी बीजेपी के अंदरखाने से खबर आ रही है कि प्रदेश में सदस्यता अभियान पूरा होने के बाद बड़ा बदलाव होगा. लोकसभा चुनाव में जिन सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था उनके जिला और महानगर अध्यक्ष बदले जाएंगे. करीब 50 ऐसे जिला अध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष हैं जिनको हटाया जाएगा. बड़े पैमाने पर संगठन में बदलाव होगा. मंडल से लेकर ऊपर तक दिखेगा असर. बीजेपी ने प्रदेश को संगठनात्मक 98 जिलों में बांट रखा है. 15 अक्‍टूबर के बाद सबसे पहले गाज जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष पर गिरेगी.

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