व्यंग्य: साईकिल के संग चलेगी झाड़ू, दिल्ली की टोटी में बहेगी दारू

चूंकि वो पेशे से इनकम टैक्स इंजीनियर था और अन्ना के मंच से दिल्ली की पंच में घुसा एक चैप्टर था जो एक रुपया में तीन अठन्नी खोजता था सो नाना प्रकार का प्रपंच करना उसकी आदत हो चुकी थी । पहले यमुना में भाजपा ने जहर बोया का शोर मचाया फिर जब मामला बिगड़ता हुआ पाया और जनता ने पिछला वादा याद दिलाया साथ ही दिल्ली जलबोर्ड से फटकार मिली तो मफलर वाले मुसाफिर ने कहा यमुना का पानी अब स्वच्छ है , भाजपा ने जहर वापिस ले  लिया है । अभी सब ठीक हो पाता इससे पहले ही लाल टोपी वाले जातिवाद के व्यापारी ने कहा न हम उनका विरोध करेंगे ना तुम्हारे खिलाफ जायेंगे और तब तक सोशल मीडिया पर चल निकला कि साइकिल के संग चलेगी झाड़ू, दिल्ली की टोटी में बहेगी दारू।  इंसान यदि पूरी लगन से सही दिशा में काम करे तो उसे सफलता मिलती ही मिलती है, आज एक व्यक्ति के बारे में जानने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जो अभी कुछ ही साल पहले बिल्कुल फटीचर टाइप हुआ करता था, पर आज वह जेल रिटर्न नेता  है ।
ये किया हो गया साहब !  पर किसी में कामयाब नहीं हुआ, तत्पश्चात उसने बड़ा रिस्क लिया औरदिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने एक बयान जारी कर अरविंद केजरीवाल को उनके गैर जिम्मेदाराना बयानों के लिए फटकार लगाई । केजरीवाल का दिल्ली चुनाव में कई बयान तथ्यात्मक रूप से गलत है , बिना किसी आधार के और भ्रामक हैं। सच्चाई यह है कि डीजेबी नियमित रूप से पानी की गुणवत्ता की निगरानी करता है और विभिन्न मापदंडों के आधार पर आपूर्ति को नियंत्रित करता है।इसके बावजूद, यह केजरीवाल का जानबूझकर बड़े पैमाने पर भय और दहशत फैलाने का प्रयास है, जिससे हिंसा भड़क सकती है। यह एक प्रकार का दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार है। दिल्ली में केजरीवाल की सड़ चुकी राजनीति का खत्मा करने के लिए बीजेपी पहली बार आक्रामक होकर खेल रही है । इंडी के मृतप्राय गठबंधन को ठोकर मार कर केजरीवाल ने अलग ताल ठोकी तो कांग्रेस पार्टी मुकाबले पर उतर आई । बात और है , जेल से शर्तों पर रिहा केजरीवाल जीत जाएं तो क्या अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं ? उन पर तो सीएम कार्यालय जाने तक की रोक लगी हुई है ? दिल्ली चुनाव में बड़े झोल हैं । सचमुच कईं मामले गोलमगोल हैं । केजरीवाल हरियाणा में भी वही कर चुके हैं जो अब यूपी में अखिलेश कर रहे हैं आग लगाओ की राजनीति । केजरीवाल की मुसीबतें बढ़ाने के लिए अखिलेश भी दिल्ली कूंच कर गए है। 
योगी आदित्यनाथ दिल्ली के दंगल में उतर चुके हैं जिसे लेकर अखिलेश अब बैकफुट पर है । अभी कुछ ही दिनों में दो बार संगम में डुबकी लगा अखिलेश खुद को सनातनी साबित करना चाह रहे थे पर हेमंता बिस्वा सरमा आए तापमान बढ़ा कर चले गए । जाहिर है आम आदमी पार्टी की मुसीबतें बढ़ गई हैं ।  हालांकि विगत महीनों में हरियाणा और महाराष्ट्र में भी बीजेपी ने आक्रामक गेम खेला था । लेकिन खुद को बार बार कट्टर ईमानदार बताने वाले केजरीवाल को इस बार लोहे के चने चबाने पड़ रहे हैं । केजरीवाल की मुसीबत यह है कि जिन शीला दीक्षित को अभद्र गलियां देते हुए केजरीवाल ने अन्ना को ठेंगा दिखाकर दिल्ली कब्जाई थी , उन्हें के बेटे संदीप दीक्षित और आम आदमी पार्टी के सख्त विरोधी अजय माकन मैदान में उतर आए हैं । मुस्लिम वोट काटने के लिए असाउद्दीन ओवैसी ने भी ताल ठोक दी है।
इस मौके का लाभ उठाने और केजरीवाल की तमाम नाकामियों को भुनाने के लिए आरएसएस का कैडर जिस तरह दिल्ली की गली गली फैल गया है , उसने केजरीवाल की मुसीबत और बढ़ा दी है। उधर सीएम आतिशी की तपिश पर विधूड़ी ने जिस तरह से शब्दों की बौछार की है , उसके कारण वे खुद संकट में फंस गईं हैं । लोकसभा चुनाव से सबक सीखने के बाद बीजेपी अब आक्रामक तेवर दिखा रही है । राहुल गांधी एक के बाद एक पराजय से अपनी राजनीति रद्द क्यूं करवा रहे हैं ? क्या दिल्ली में कांग्रेस की संभावित पराजय का बोझ अपने कंधों पर नहीं उठाना चाहते राहुल ? बीजेपी एक से एक स्टार प्रचारक लेकर आई है । तो कहां हैं कांग्रेस के स्टार सोनिया गांधी , खड़गे और प्रियंका गांधी ? क्या पराजय का ठीकरा संदीप दीक्षित और अजय माकन के सिर फोड़ना चाहते हैं ?  बहरहाल आधे अधूरे राज्य दिल्ली का चुनाव काफी रोचक हो चला है।
पंकज सीबी मिश्रा/राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी 

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