कानपुर। उत्तर प्रदेश बार काउंसिल चुनाव में सदस्य पद के प्रत्याशी एवं कानपुर बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री व अध्यक्ष नरेश चंद्र त्रिपाठी एडवोकेट ने शनिवार को प्रेसवार्ता कर अपने खिलाफ रची जा रही कथित साजिशों का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं के अपार स्नेह और समर्थन से उनकी जीत सुनिश्चित होती देख कुछ प्रतिद्वंदी प्रत्याशी घबराए हुए हैं और उन्हें चुनाव लड़ने से रोकने का असफल प्रयास कर रहे हैं।नरेश चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि वे वर्ष 2009-10 में कानपुर बार एसोसिएशन के महामंत्री रहे और अधिवक्ताओं के संघर्ष व विश्वास के बल पर वर्ष 2022-23 में भारी मतों से अध्यक्ष निर्वाचित हुए। उन्होंने दावा किया कि उनके दोनों कार्यकाल अधिवक्ता हितों के लिए ऐतिहासिक रहे हैं।
वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के सदस्य पद के उम्मीदवार हैं और प्रदेशभर के अधिवक्ताओं से उन्हें व्यापक समर्थन मिल रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि इसी लोकप्रियता से घबराकर एक बाहरी व्यक्ति फखरूद्दीन अली अहमद के माध्यम से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वर्ष 2025 की एक रिट याचिका दाखिल कराई गई, जिसमें उनके खिलाफ निराधार आरोप लगाते हुए नामांकन निरस्त कराने का प्रयास किया गया। हालांकि, उच्च न्यायालय ने वर्ष 2015 से संबंधित पुराने मामले का परीक्षण कर याचिका को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया। इसी प्रकार, बार काउंसिल चुनाव अधिकारी ने भी दिए गए प्रार्थनापत्र को निरस्त कर दिया।
प्रेसवार्ता में उन्होंने अपने संघर्षपूर्ण कार्यकालों को याद करते हुए कहा कि वर्ष 2009-10 में पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच हुए टकराव के दौरान कई वकील गंभीर रूप से घायल हुए, चेंबरों में तोड़फोड़ और आगजनी हुई तथा वे स्वयं भी घायल होकर उर्सला अस्पताल में भर्ती हुए थे। उनके नेतृत्व में तीन महीने तक कानपुर कचहरी में हड़ताल चली, जिसके चलते न्यायिक कार्य इटावा जनपद स्थानांतरित करना पड़ा। प्रेसवार्ता के अंत में उन्होंने कहा मैं कभी हारा नहीं हूं और न ही हारूंगा। अधिवक्ताओं के अधिकार दिलाकर ही चैन से बैठूंगा।इस अवसर पर नरेश मिश्रा एडवोकेट, सियाराम पाल एडवोकेट और शशिकांत तिवारी एडवोकेट भी उपस्थित रहे।
