होली पर राजनीतिक रंग धोने की वाशिंग मशीन…….

यह होली मोदी जी और समस्त जी परिवार के लिए यादगार होली होगी क्यूंकि जोगीरा इस बार सवर्ण गायेंगे और अलग – अलग जातिगत रंगों की पिचकारी लेकर राजनीतिक दल हुडदंग मचाएंगे। सभी पार्टियों के पास सपेशल होली कलाकार और हुडदंगी है जैसे यादवों के पास कंचना, जाटवो के पास प्रियंका, समूल धरा और मूलनिवासी ग्रह के पास उनके पर्सनल उदित राज और भाजपा के पास कई राज्यों के सीएम और खुद पीएम इस बार मुंह पर करिया रंग लगाए घूमते घामते दिखेंगे उधर  कायदे से देखे तो होली आश्रम की भी स्थापना हुई है जिसमें रावन की मूर्ति लगी है और ढंपली गैंग उसी मूर्ति के आगे जातिवाद  होली एक्सपर्ट संत  लछुमन यादव के सानिध्य में ब्राह्मणवाद पर भजन गा रही। रंगों के इस त्योहार पर सर्व सी नमो रंगीन दाढ़ी और मिटरो वाला गमोछा लिए ओबीसी के पर्सनल बाबा साहब बने फिर रहें, साहेब भी ट्रेंडिंग में हैं जो जातिवाद के रंगों के सिद्ध परुष है।
कोई इतिहासकार नहीं दिख रहा था इस होली वाली लिस्ट में तो इतिहासकार के रूप में रोमिला यादव भी जुड़ गई और टीवी एंकर के रूप में कोई मोंटी कुर्मी है दस्तक से दस्त करने वाला। तो कुल मिलाकर इस बार एक जगह हुड़दंग, चूंकि मैं व्हाट्सअप यूनिवर्सिटी का छात्र हूँ इसलिए अपने अध कचरे ज्ञान का थोड़ा नमूना शब्दों की  पिचकारी पेश कर दे रहा हूँ। सिद्ध संत लछूमन यादव के अनुसार प्रथम रंगीन  होली स्तूप अतिपिछड़े, चौथी सदी के दौरान एक छत्रप थे रूद्रदेव आहार ने बनवाया था। जिसके नीचे रोमारियो उर्फ़  रामरूप पाल रंगों के अफ्रीकन देवता का आह्वाहन करता  था। ज़ब रामरूप छोटा था तो  सुबह शाम अपनी भेड़ें चराता और दोपहर को स्कूल जाता। एक बार सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में अध्यापक ने पूछा युगांडा के अफ़्रीकी नस्ल किस जाति जीव हैं ? सभी पंडित और ठाकुर के बच्चो के मुंह उतर गए। तभी सवाली शक्ल वाला रामरूप पाल खड़ा हुआ और बोला यह नस्ल मूलनिवासी होती है। सही उत्तर सुनकर क्लास टीचर दामोदर पॉल  खुश हुए और जेब से दस का नोट नजराने में देते हुए बोले। इन पैसों से तुम विज्ञान और संविधान की पिचकारी खरीदना तुम्हारे अंदर मुझे किसी बहुजन नायक का अक्स दिखता है।
पैसे देख कर, पंडित के बच्चो को रामरूप आंखों में चुभ गया। जातिवादी ब्राह्मनो ने  एक साजिश रची उन्होंने अपनी कुटिल बुद्धि का इस्तेमाल कर पड़ोस गांव के एक मुस्लिम से बोल कर रामरूप की भेड़ का गलत परिचय देते हुए उसे मुर्गा बम बना कर पेश किया । इसकी शिकायत करने जब रामरूप थाने में गया तब एमपी प्रदेश के मुख्यमंत्री यादव जी ने फोन कर के थानेदार को साफ मना कर दिया कि रामरूप  को कोई हाथ नहीं लगाएगा। इससे आहत होकर ब्राह्मण  समाज ने प्रदेश सरकार के खिलाफ होली पर पिचकारी बाजी की। पिचकारी बाजी की खबर जब  भाजपा के  बूथ अध्यक्ष भगेलू को पता चली तब उन्होंने भी कायदे से लाठी के जोर पर रामरूप का इलाज कर दिया। उधर  यादव, मुस्लिम से रंग – रंग के उनकी  यातना सहकर रामरूप टूट चुका था। घर में खाने को भोजन नहीं था तो बनिया की दुकान पर उधार समान लेने गया उधर ठाकुर साहब ने उस बनिया को मना कर दिया था उधार देने से। इन सभी से तंग आकर रामरूप छोटी गंगा में कूदने ही वाला था तभी फरिश्ता बन रावन  मास्टर साहब आए और उन्होंने इसको बचा लिया।
इसके बाद रावन मास्टर साहब ने अपने ओहदे का इस्तेमाल करते हुए बोको हराम के फ्रीडम फाइटर्स की गैंग में शामिल करवा दिया यह कहते हुए कि तुझे इन सबसे बदला लेना हैं अब्दुल को छोड़ कर। वक्त बिता रामरूप की ट्रेनिंग पूरी तो हो गई लेकिन सीने में धधकती बदले की आग बुझ चुकी थी। उसे रंगों का व्यापार भा गया और रंगो के लिए जाना था इंडिया चला गया युगांडा । वहां जाकर रामरूप पाल बस गया और अपना नाम रोमेरियो रख लिया। ब्राह्मण, ठाकुर, यादव, मुस्लिमो के सामूहिक शोषण की वजह से रामरूप का पलायन हुआ दुसरे मुल्क में। वरना आज ये लड़का भारत में ब्राह्मणवाद के लिए खेल रहा होता । मूलनिवासी कोटे से होली पर आरक्षण  मिलता सो अलग । दो दिन पहले मैने रामपाल का मुद्दा अखिल भारती होली हुड़दंग समिति के अध्य्क्ष अखिलेश के पास उठाया तो उन्होंने बताया कि रामरूप ने पढ़ाई के दौरान 22 किलो कॉपियां कबाड़ी को बेची।
ये वो कॉपियां थी जिन्हें बाबा साहेब ने  अपने हाथों से इतिहास  लिख कर भरा था । बेचते वक्त मोह से भर उठा था वह रामरूप । साहेब को अपनी पुरानी चीजों से बहुत लगाव हैं। जब नया इतिहास  खरीदा था तब पुराने वाले को छोड़ नहीं पा रहे थे,  कुल चार महीने लगे इन्हे  नए किताब  में अपना रेडीमेड रंगीन इतिहास  डालने में। रामरूप ने कहा कि मैने 2025 के बाद कोई होली नहीं मनाया। ररामरूप ने बताया सोशल मीडिया को छोड़कर मेरा कोई सुनता नहीं । युगांडा में  मुझे मेरे पुराने दोस्तों के साथ ही आनंद आता है। पता नहीं वो लोग मेरे पीठ पीछे क्या सोचते होंगे, बोलते होंगे मेरे बारे में नहीं पता। लेकिन मुझे उनसे बहुत लगाव हैं भले रोज किसी से बाते नहीं होती पर मन ही मन जिक्र जरूर करता हूँ। और भी होंगे मेरे जैसे लोग जिनसे पुरानी चीजें या लोग छूट ही नहीं पाते होंगे। मन के किसी कोने में आज भी अपनी यादों का डेरा बसाए टहल रहे हैं जेहन में। तो अब होली पर उनसे मिलने युगांडा जायेगा रामरूप रोमारियों बनकर क्यूंकि ब्राह्मणवाद से आजादी मिलेगी नहीं और मोनुवाद रंग लगाने में जातिवाद करता है। सबको मुंह से होली की शुभकामनायें।
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी 

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