बीपीएस न्यूज़, ब्यूरो
कानपुर। कल्याणपुर में हुए किडनी रैकेट के संबंध में विश्लेषण के आधार पर हम आपको स्वास्थ्य विभाग के निगरानी तंत्र वी एन अधिकारियों की कार्यशैली का वास्तविक सच बताएंगे।
हमारे चैनल को दिए गए इंटरव्यू में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने इस बात को स्वीकार किया की किडनी रैकेट जो पूर्व में कब से संचालित हो रहा की जांच का विषय है लेकिन उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को नहीं थी। उन्होंने उन्होंने हमारे संवाददाता को बताया की पुलिस आयुक्त द्वारा उनको सूचना देकर स्वास्थ्य विभाग की एक टीम मांगी गई थी।
कानपुर के इस किडनी कांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया…है। इस किडनी कांड की जाँच अब मेरठ के अल्फा अस्पताल तक पहुंच गई है।
वही कानपुर के एसपी पश्चिमी ने सराहनीय कार्य करते हुए दो ओटी टेक्नीशियन को भी गिरफ्तार कर लिया है। अब उस पर एक बड़ा फॉलो-अप सामने आया है…
सवाल सिर्फ रैकेट का नहीं… बल्कि सिस्टम की खामियों का है…”
“कानपुर पुलिस ने किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े एक बड़े रैकेट का खुलासा करने में स्वास्थ्य विभाग की लचर और संवेदनहीन कार्यशैली उजागर हुई है
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई ने कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे…”
“BPS डिजिटल न्यूज़ से बातचीत में मुख्य चिकित्साधिकारी ने बड़ा बयान दिया…
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को इस रैकेट की जानकारी पहले से नहीं थी। बल्कि लोकल खुफिया इनपुट के आधार पर… पुलिस कमिश्नर द्वारा सूचना देने के बाद ही विभाग को इस पूरे मामले का पता चला…”
“अब सवाल उठता है…
जब शहर में संदिग्ध ट्रांसप्लांट हो रहे थे… तब स्वास्थ्य विभाग का निगरानी तंत्र कहाँ था? क्या नियमित निरीक्षण और जांच केवल कागजों तक सीमित रह गई थी?”
“मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत… हर ट्रांसप्लांट के लिए कड़ी जांच और सर्जिकल ऑडिट अनिवार्य होता है… तो फिर इतनी बड़ी संख्या में संदिग्ध ऑपरेशन कैसे हो गए? क्या ऑडिट सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया?”
“जब डॉक्टरों के नाम सामने आ रहे हैं… और विभाग को समय पर जानकारी तक नहीं थी… तो जिम्मेदारी किसकी है? क्या यह सिर्फ लापरवाही है… या सिस्टम की बड़ी विफलता?”
“पुलिस ने अपना काम किया… लेकिन अब बारी है स्वास्थ्य विभाग की… कि वह जवाब दे… और सिस्टम को मजबूत बनाए… क्योंकि सवाल सिर्फ कानून का नहीं… इंसानियत का है…”
