- जिस घर में होता है बुजुर्गों का सम्मान, उस घर में साक्षात बसते हैं भगवान
बीपीएस न्यूज़ की बुजुर्गों के अधिकारों पर विशेष सामाजिक जागरूकता मुहीम (भाग- 1)
प्रिय पाठकों, आज की आधुनिक और भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर उन हाथों को भूल जाते हैं, जिन्होंने हमें चलना सिखाया। समाज में बुजुर्गों के साथ बढ़ती उपेक्षा और अकेलेपन को देखते हुए ‘बीपीएस न्यूज़’ एक नई मुहिम शुरू कर रहा है। भारत सरकार द्वारा बनाए गए ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007’ की संपूर्ण जानकारी हम हर हफ्ते किस्तों में आप तक पहुँचाएंगे। हमारा उद्देश्य केवल कानून बताना नहीं, बल्कि हर बुजुर्ग को उसका हक और हर नागरिक को उसका कर्तव्य याद दिलाना है। आइए, इस मुहिम से जुड़ें और जागरूक बनें।
अंक- 1: क्या है वरिष्ठ नागरिक अधिनियम 2007 और क्यों पड़ी इसकी ज़रूरत?
अक्सर हमारे समाज में बुजुर्ग अपने अधिकारों से अनजान होने के कारण चुपचाप कष्ट सहते रहते हैं। उन्हें लगता है कि कोर्ट-कचहरी के चक्कर कौन काटेगा? लेकिन साल 2007 में बना यह कानून बुजुर्गों के लिए एक वरदान की तरह है।
यह कानून क्यों ज़रूरी है?
सम्मान से जीने का हक: यह कानून सिर्फ कागजी नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी बुजुर्ग पैसे, भोजन, कपड़े, आवास या इलाज के अभाव में लाचार न रहे। साथ ही सुरक्षा सुनिश्चित कराना है ताकि वे समाज में सिर उठाकर सम्मान से जी सकें।
पारिवारिक शांति: इसका मकसद बच्चों को जेल भेजना नहीं, बल्कि उन्हें अपने माता-पिता के प्रति उनकी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी का अहसास कराना है।
कौन उठा सकता है इस कानून का लाभ?
1. वरिष्ठ नागरिक (Senior Citizens): भारत का कोई भी नागरिक जिसकी उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक है।
2. माता-पिता (Parents): चाहे वे सगे हों, सौतेले हों या गोद लेने वाले। खास बात यह है कि माता-पिता के लिए 60 वर्ष की आयु सीमा का होना अनिवार्य नहीं है; यदि वे अपनी संतान पर आश्रित हैं और असहाय हैं, तो वे भी इस कानून के दायरे में आते हैं।
बीपीएस न्यूज़ – सच्ची कहानी
कानून की जानकारी ने बदली 70 वर्षीय बिटान देवी की जिंदगी
कानपुर। माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 केवल एक कागजी कानून नहीं है, बल्कि बुजुर्गों का सच्चा संबल है। इसका जीवंत उदाहरण चकेरी थाना क्षेत्र के काज़ीखेड़ा, लाल बंगला, गल्ला मंडी, थाना चकेरी में देखने को मिला, जहाँ एक बुजुर्ग मां को इस कानून की बदौलत न सिर्फ मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति मिली, बल्कि उनका बिखरता परिवार भी दोबारा एक हो गया।
क्या था मामला?
काज़ीखेड़ा निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला बिटान देवी ने ‘बीपीएस न्यूज़’ को अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उनका बेटा कुंवर सिंह (40 वर्ष) और बहू सीमा देवी उर्फ छाया देवी उन्हें छोटी-छोटी बातों को लेकर रोज़ परेशान करते थे और घर में लड़ाई-झगड़ा आम बात हो गई थी। साल 2022 से प्रताड़ना और ज्यादा बढ़ गई। बहू द्वारा बार-बार संबंधित पुलिस चौकी पर फर्जी प्रार्थना पत्र देकर बुजुर्ग माता-पिता का जीना दुश्वार कर दिया गया था।
एक जानकारी और बदल गई किस्मत
प्रताड़ना से तंग आ चुकी बिटान देवी को करीब दो महीने पहले एक परिचित के माध्यम से ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007’ की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने बिना डरे सीधे एसडीएम (SDM) कोर्ट में वाद दाखिल कर दिया।
डेढ़ महीने में त्वरित न्याय और सुलह
एसडीएम कोर्ट में इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया गया। कोर्ट में तेजी से कार्रवाई हुई और मात्र डेढ़ महीने के भीतर 5 तारीखें पड़ीं। एसडीएम कोर्ट में बुजुर्ग बिटान देवी ने साफ मांग रखी थी कि या तो बेटा-बहू उन्हें प्रति महीने ₹15000 का गुजारा भत्ता दें, अन्यथा उनका मकान खाली कर दें।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों पक्षों की बातें सुनी गईं। इस दौरान सुलह अधिकारी डॉ. धीरेंद्र कुमार दोहरे ने बेहद अहम और सराहनीय भूमिका निभाई। उन्होंने दोनों पक्षों को समझाकर उनके बीच सम्मानजनक सुलह कराई।
बहू-बेटे ने मांगी माफी, घर में लौटी खुशहाली
बुजुर्ग पीड़िता बिटान देवी ने बताया कि सुलहनामे के दौरान बहू और बेटे को अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्होंने सबके सामने हाथ जोड़कर माफी मांगी और लिखित आश्वासन दिया कि वे भविष्य में कभी भी अपने माता-पिता को परेशान नहीं करेंगे।
मां का दिल तो आखिर मां का होता है; बच्चों के सुधरने के वादे पर बिटान देवी ने भी बड़प्पन दिखाते हुए सबके सामने कहा कि यदि बहू सीमा देवी और बेटा कुंवर सिंह भविष्य में उन्हें और उनके पति को परेशान नहीं करेंगे, तो वे खुशी-खुशी उनके साथ मकान में रह सकते हैं।
बीपीएस न्यूज़ की सीख:
बिटान देवी की कहानी हमें सिखाती है कि अन्याय सहना समाधान नहीं है। यदि बुजुर्गों को सही समय पर सही कानून की जानकारी मिल जाए, तो बिना कोर्ट-कचहरी भटके, बेहद कम समय (मात्र डेढ़ महीने) में घर का विवाद सुलझ सकता है। कानून का डर अपनों को सुधारने का जरिया भी बन सकता है।
अगले हफ्ते (अंक- 2) ज़रूर पढ़ें:
“हक की बात: भरण-पोषण (खर्चा) का दावा कौन, किस पर और कैसे कर सकता है? क्या पोते-पोतियों से भी खर्चा मांगा जा सकता है? साथ ही अगली नई सच्ची कहानी के साथ जानिए अगले हफ्ते केवल बीपीएस न्यूज़ पर।”
मदद के लिए यहाँ संपर्क करें:
राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन (Elderline): 14567 (टोल-फ्री नंबर)
नज़दीकी सहायता: अपने क्षेत्र के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) कार्यालय या स्थानीय पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।
