24 घंटे की भूख हड़ताल एवं अनशन का हुआ समापन

कानपुर। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), कानपुर जिला कमेटी द्वारा शिक्षा व्यवस्था में सुधार, प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाओं, छात्र अधिकारों तथा कानपुर के विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में व्याप्त छात्र समस्याओं को लेकर आयोजित 24 घंटे की भूख हड़ताल एवं अनशन का शुक्रवार को विभिन्न जनसंगठनों के समर्थन और एकजुटता के बीच समापन हुआ।
इस अनशन में जिला संयोजक महबूब आलम, विधि छात्र एसएफ़आई उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी सदस्य एवं एसएफ़आई कानपुर जिला सहसंयोजक आराध्य बाजपेयी, जुनैद मंसूरी तथा अश्वनी मिश्रा अनशन पर बैठे। अनशन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का बढ़ता निजीकरण, प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताएँ, पेपर लीक, युवाओं में बढ़ती बेरोज़गारी तथा छात्रों की अनदेखी देश की शिक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती हैं। उन्होंने इन समस्याओं के समाधान की मांग करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने की भी मांग उठाई। कार्यक्रम में सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस, जनवादी महिला समिति, जनवादी नौजवान सभा, दलित शोषण मुक्ति मंच, सद्भावना समिति कानपुर सहित विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकारों और शिक्षा बचाने की लड़ाई का महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों और युवाओं की न्यायसंगत आवाज़ को दबाने के बजाय उसे गंभीरता से सुनना और उसके समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाना सरकार की जिम्मेदारी है। भूख हड़ताल का समापन सीटू (CITU) के जिला कोषाध्यक्ष कॉमरेड मोहम्मद वसी ने अनशनकारियों को जूस पिलाकर कराया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि एसएफ़आई ने शिक्षा और छात्र अधिकारों के सवालों को मजबूती से उठाया है तथा भविष्य में भी संगठन जनहित और छात्रहित के मुद्दों पर और व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन खड़ा करेगा। एसएफ़आई कानपुर ने स्पष्ट किया कि 24 घंटे की भूख हड़ताल आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, समान अवसर और छात्र अधिकारों की लड़ाई को और व्यापक रूप से आगे बढ़ाने का संकल्प है। संगठन ने कहा कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सामाजिक न्याय सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक लोकतांत्रिक संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।

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