एक तरफ चीनी के दाम बढ़ गए तो हाहाकार मच गया और दूसरी ओर बिहार भाजपा के मंत्री ने कहा कि डायबीटीक बढ़ रहें इसलिए चीनी के दाम बढ़वा दिये। ऐसे उलूल जुलूल लॉजिक से आगे के चुनाव जितना अब भाजपा के लिए आसान नहीं। उधर जंतर-मंतर पर सवर्णों और आरक्षण रिफार्म की मांग कर रहें युवा प्रदर्शनकारियों पर पुलिस बर्बरता को लेकर पूरा सवर्ण समाज उद्दवेलित है । राहुल गाँधी पैलेट गन चलाने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराने निकल पड़े थे। राहुल गाँधी घायल छात्र साहिल लोचब और उनके माता-पिता को साथ लेकर संसद मार्ग थाने पहुँचे और एफआइआर दर्ज होने तक वहाँ से न हटने की घोषणा करके मोदी-शाह के लिए नया संकट खड़ा कर दिया था । सवर्ण सभा के विभिन्न संगठनों ने यूजीसी रोल बैक और आरक्षण को आर्थिक आधार पर कराने के मुद्दे पर जोरदार प्रदर्शन किया है जिसे लेकर अब भाजपा को दोहरा झटका लगना तय है। एक तरफ कॉकरोच पीछे पड़े है दूसरी तरफ सवर्णो का साथ छूटता दिखाई दें रहा। दिल्ली में 21 अगस्त , 2026 को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों व युवा प्रदर्शनकारियों पर डंडे चलाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने की मांग उठ रही। तत्काल एफआइआर दर्ज नहीं की गई तो पूरे दिल्ली के लुटियन्स नेताओं को अशांत करने का सवर्ण प्लान धरातल पर उतरता दिख रहा।
सवर्णों के प्रदर्शन पर पुलिस अधिकारियों ने उन्हें बताया है कि “ऊपर से आदेश” है और वे धरने का आदेश नहीं कर सकते; भाजपा के रामदास अठावले के बयान से सवर्ण और रघुराज सिंह के बयान से मुसलमान अब भाजपा से नाता तोड़ रहा जो विपक्ष के लिए बड़ी राहत कि खबर है। सूत्रों के अनुसार रघुराज तो यहाँ तक बोल गए कि – भाजपा को मुसलमानों का वोट नहीं चाहिए और अठावले बोला कि आरक्षण खत्म कराने कि हिम्मत किसी के बाप में नहीं। ऐसे में सवर्णों की हुंकार ने भाजपा को चिंता में डाल दिया है। केंद्रीय मंत्रीयों ने अपने बयान में दलित और पिछड़ो की हितैषी करार देते हुए भाजपा को अहंकार की राजनीति का प्रमुख आधार बताते हुए सवर्ण वोटरों को लेकर पार्टी की स्थिति पर टिप्पणी की। जंतर मंतर पर सवर्णों के उग्र प्रदर्शन के बाद राजनीतिक हलकों में भाजपा की चुनावी रणनीति और सवर्ण मतदाताओं को लेकर बहस तेज हो सकती है।दिल्ली पुलिस महत्वपूर्ण तथ्य है कि संसद मार्ग थाने की जनरल डायरी की प्रविष्टि में पहले ही यह सामने आ चुका है कि 20 जुलाइ को आरएएफ ने एक डीसीपी-स्तरीय अधिकारी के निर्देश पर दो राउंड प्लास्टिक पैलेट चलाए थे। इसके साथ ही साथ घायल प्रदर्शनकारियों की चिकित्सा जाँच रिपोर्टों में उनके शरीर में पैलेट गन के छर्रे मिलने का स्पष्ट उल्लेख है लेकिन सरकार द्वारा इसे ढकने की कोशिश की जा रही है।
इसलिए राहुल गाँधी का यह सवाल महत्वपूर्ण है कि जब पुलिस की अपनी जनरल डायरी में पैलेट गन चलाए जाने और अधिकारी के निर्देश का उल्लेख है, तो एफआइआर क्यों नहीं दर्ज की जा रही है ? राहुल गाँधी पहले ही दिन से पूछते रहे हैं कि पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था? इस सवाल का जवाब देने से बचने के लिए ही प्रधानमंत्री और गृहमंत्री दोनों ही संसद के पावसकालीन सत्र में सदन में उपस्थित होने के बजाय मुँह छिपाते रहे। अब मामला उससे भी ज्यादा बिगड़ गया लगता है जो सत्ता पर कब्जा जमाये बैठे इन दोनों नेताओं को भारी पड़ सकता है।विश्वगुरु बनने का सपना और हमारी वास्तविकता
देश में आजकल एक नारा बार-बार सुनाई देता है—“हम विश्वगुरु बनेंगे।” यह सपना निश्चित रूप से सुंदर है और हर भारतीय की इच्छा होनी चाहिए कि हमारा देश ज्ञान, विज्ञान, शिक्षा, मानवता और लोकतांत्रिक मूल्यों के क्षेत्र में दुनिया का मार्गदर्शन करे। लेकिन केवल नारा लगाने से कोई देश विश्वगुरु नहीं बनता। इसके लिए हमें अपनी उपलब्धियों के साथ-साथ अपनी कमियों को भी ईमानदारी से स्वीकार करना होगा।
यदि हम वास्तव में विश्वगुरु बनना चाहते हैं तो सबसे पहले शिक्षा की गुणवत्ता को विश्वस्तरीय बनाना होगा। चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधाएँ हर नागरिक तक पहुँचानी होंगी। आरक्षण व्यवस्था को अधिक सरल, सुलभ और आर्थिक आधार पर लाना होगा। विज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार में निवेश बढ़ाना होगा। बेरोजगारी, गरीबी और भुखमरी जैसी समस्याओं का गंभीरता से समाधान करना होगा। इसी तरह भ्रष्टाचार, अपराध, सामाजिक असमानता और प्रशासनिक लापरवाही पर प्रभावी अंकुश लगाना होगा। लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित न रहे, बल्कि उसमें असहमति का सम्मान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थाओं की स्वायत्तता भी सुरक्षित रहनी चाहिए। और सबसे महत्वपूर्ण बात—हमें धर्म और जाति के नाम पर समाज में बढ़ती दूरी तथा हिंदुत्व के अलावा अन्य धर्मों में भी अंधविश्वास और पाखंड से लोगो को मुक्त होने का प्रयास कराना होगा। जिस समाज में मनुष्य की पहचान उसकी जाति, धर्म या आर्थिक स्थिति से अधिक महत्वपूर्ण हो जाए, वही समाज वास्तव में प्रगतिशील कहलाता है।
विश्वगुरु बनने के लिए दुनिया को उपदेश देने से पहले हमें अपने भीतर सुधार की शुरुआत करनी होगी। हमें यह पूछना चाहिए कि हमारा देश शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान, न्याय, रोजगार, समानता और मानवीय मूल्यों के क्षेत्र में कहाँ खड़ा है और कहाँ पहुँचना चाहता है।विश्वगुरु का दर्जा किसी घोषणा से नहीं, बल्कि ज्ञान, चरित्र, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामाजिक न्याय, मानवीय संवेदना और उत्कृष्ट संस्थाओं से प्राप्त होता है। इसलिए “हम विश्वगुरु बनेंगे” कहना बुरा नहीं है; बल्कि यह एक महान लक्ष्य है। लेकिन उस लक्ष्य को पाने के लिए नारों से अधिक ईमानदार आत्ममंथन, ठोस नीतियाँ और निरंतर मेहनत की आवश्यकता है।

राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार, जौनपुर यूपी
