जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र व प्राथमिक विद्यालय का किया औचक निरीक्षण

कानपुर।  जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, नर्वल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सुबह 10ः45 पर डा0 अपर्णा अनुपस्थित पायीं गयी। इस केन्द्र में कुल तीन डॉक्टर कार्यरत हैं, जिनमें से दो डॉक्टर हीं उपस्थित मिले। निरीक्षण के दौरान जितेन्द्र नामक एक 04 वर्ष का बच्चा इलाज के लिये आया था और उसका इलाज डॉक्टर के द्वारा होने के बजाय फार्मासिस्ट अंजलि द्वारा ही किया जा रहा था, फार्मासिस्ट ने हीं दवा का पर्चा लिख दिया जब कि दो अन्य नियमित डॉक्टर अनिल और राशि केन्द्र में उपस्थित थे। जिलाधिकारी द्वारा अंजलि से पूछे जाने पर कि आप मरीज को क्यो देख रहीं हैं, इस पर फार्मासिस्ट ने चुप्पी साध ली। जिलाधिकारी ने पाया कि डॉक्टर राशि सामुदायिक केन्द्र में अपने बच्चे को लेकर आयीं थी और वह अपने बच्चे पर हीं ध्यान केन्द्रित कर रहीं थी। उन्होंने ओ0पी0डी0 की स्थिति खराब पायी। उक्त प्रकरण में मुख्य चिकित्साधिकारी व सम्बन्धित अपर मुख्य चिकित्साधिकारी की जिम्मेदारी हैं कि वे उक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का नियमित परीक्षण कर मरीजो को समय से अच्छा इलाज देने में सजगता बरतें। जिलाधिकारी ने सम्बन्धित को अनुपस्थित डॉक्टर का वेतन रोकते हुये आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया।
         
इसके पश्चात् जिलाधिकारी द्वारा प्राथमिक विद्यालय, टांस का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि विद्यालय में कार्यरत 02 स0अ0 जयति चन्द्रा व स0अ0 नीलम चंचल अनुपस्थित रहीं। जिलाधिकारी ने उपस्थिति रजिस्टर की जॉच की तो पता चला स0अ0 जयति चन्द्रा 03 फरवरी, 2025 से सी0सी0एल0 पर हैं व स0अ0 नीलम चंचल को कैंसर होने के कारण 07 फरवरी, 2025 से चिकित्सा अवकाश पर हैं। जिलाधिकारी इस नाराजगी व्यक्त किया कि विगत 06 फरवरी से उक्त विद्यालय बिना किसी अध्यापक के संचालित हो रहा हैं व सम्बन्धित खण्ड़ शिक्षा अधिकारी ने उक्त विद्यालय में अध्यापन हेतु अन्य अध्यापक की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की और न ही इसकी सूचना जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को दी। गरीब बच्चों के प्रति इस लापरवाही और अकर्मण्यता पर जिलाधिकारी ने सम्बन्धित खण्ड़ शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी तय करते हुये उनके विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही करने के लिये सम्बन्धित को निर्देश दिये। इसके पश्चात् जिलाधिकारी ने रसोईया के मानदेय का भुगतान, एम0डी0एम0 पंजिका, एम0डी0एम0 ग्रहण करने वालों की संख्या, शुद्ध पेयजल व शौचालय का भी निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही हेतु सम्बन्धित को निर्देश दिये। 

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