महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करना हर संस्थान की जिम्मेदारी: विजया राहटकर

  • सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में ‘पॉश अधिनियम’ पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
बीपीएस न्यूज़/ब्यूरो
कानपुर। कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कानपुर नगर के सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। यहाँ  “कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध एवं प्रतितोष अधिनियम, 2013” (POSH Act) के संबंध में एक दिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।
राष्ट्रीय और राज्य महिला आयोग की गरिमामयी उपस्थिति
इस कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय महिला आयोग की माननीय अध्यक्षा विजया राहटकर उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों की भी गरिमामयी मौजूदगी रही, जिनमें:
बबीता सिंह (सदस्य, राज्य महिला आयोग), अनीता गुप्ता (सदस्य, राज्य महिला आयोग), सरोज कुरील (माननीय विधायक, घाटमपुर), पुनीत मिश्रा (उपनिदेशक, महिला कल्याण विभाग) इसके साथ ही विभिन्न सरकारी व गैर-सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और शहर के गणमान्य नागरिक भी इस जागरूकता अभियान का हिस्सा बने।
सरल भाषा में समझे पॉश अधिनियम के कड़े प्रावधान
अपने संबोधन में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा विजया राहटकर ने ‘पॉश कानून’ को बेहद सरल और सहज भाषा में सभी के सामने रखा।
उन्होंने अधिनियम के प्रमुख कानूनी पहलुओं को समझाते हुए दो मुख्य स्तंभों पर विशेष जोर दिया:
 1. आंतरिक शिकायत समिति (Internal Committee – IC): इसका गठन, कार्यप्रणाली और संस्थानों में इसकी अनिवार्य भूमिका।
 2. स्थानीय समिति (Local Committee – LC): जिला स्तर पर काम करने वाली इस समिति की शिकायत निवारण प्रक्रिया।
“प्रत्येक कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए एक सुरक्षित, सम्मानजनक और बिना किसी भेदभाव वाला वातावरण तैयार करना केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि हर संस्थान की नैतिक जिम्मेदारी है।”
अधिकारियों और कर्मचारियों ने लिया सुरक्षा का संकल्प
इस कार्यशाला में कानपुर के विभिन्न विभागों से आए अधिकारियों और कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उपस्थित जनों ने न केवल पॉश अधिनियम से जुड़ी बारीकियों और महत्वपूर्ण जानकारियों को समझा, बल्कि अपने-अपने कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को पूरी निष्ठा से लागू करने का सामूहिक संकल्प भी लिया। यह कार्यशाला कार्यस्थलों को महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा और सराहनीय प्रयास साबित हुई।

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