सीएम जनसुनवाई पोर्टल में फर्जीवाड़ा, दूसरे की रिपोर्ट से किया निस्तारण

  • मुख्यमंत्री कार्यालय से भेजी शिकायत में मुख्य अभियंता ने लगाई असंबंधित आख्या, नगर आयुक्त से शासन स्तर तक किसी ने नहीं किया मिलान
कानपुर। जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। गोविन्द नगर ब्लॉक-8 स्थित सार्वजनिक पार्क से संबंधित शिकायत में आरोप है कि मुख्य अभियंता स्तर से किसी अन्य प्रकरण की आख्या लगाई गई और उसके बाद नगर आयुक्त से लेकर शासन स्तर तक अधिकारियों ने शिकायत और आख्या का मिलान किए बिना उसे आगे बढ़ा दिया। अंततः इसी असंबंधित आख्या के आधार पर शिकायत निस्तारित कर दी गई।  मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से कर उच्चस्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।
व्यापारी नेता प्रकाश वीर आर्य के अनुसार उन्होंने 24 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री को सीधे स्पीड पोस्ट के माध्यम से गोविन्द नगर ब्लॉक-8 स्थित सार्वजनिक पार्क में अवैध अतिक्रमण एवं निर्माण तथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन के संबंध में शिकायत भेजी थी। मुख्यमंत्री कार्यालय से यह मामला जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए भेजा गया। इसके बाद 25 अगस्त को शिकायत संख्या 12164260159269 दर्ज हुई।
पोर्टल के विवरण के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष सचिव  नवनीत सिंह चहल की ओर से प्रकरण शासन के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव, नगर विकास तथा नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन विभाग को भेजा गया। वहां से 27 अगस्त को मामला नगर आयुक्त, नगर निगम को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा गया। नगर आयुक्त स्तर से इसे मुख्य अभियंता को अग्रसारित किया गया। यहीं से मामले में सबसे गंभीर सवाल खड़ा होता है। मुख्य अभियंता स्तर से उनकी शिकायत के जवाब में जो आख्या लगाई गई, वह उनकी शिकायत से संबंधित ही नहीं है। 09 सितंबर की उस आख्या में शिकायतकर्ता का नाम जितेन्द्र कुमार तथा विषय जोन-5, वार्ड संख्या 50, कालिन्दी नगर स्थित पार्क की सफाई बताया गया है। जबकि आर्य की शिकायत गोविन्द नगर ब्लॉक-8 के सार्वजनिक पार्क, अतिक्रमण एवं उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन से संबंधित थी।
आर्य का कहना है कि यह भी जांच का विषय है कि उक्त आख्या मूल रूप से किस अन्य शिकायत के निस्तारण के लिए तैयार की गई थी और मुख्य अभियंता कार्यालय ने उसे उनकी शिकायत में कैसे और किस आधार पर लगा दिया। शिकायतकर्ता, स्थान, पार्क और विषय अलग होने के बावजूद आख्या को उनकी शिकायत से जोड़ दिया गया। इसके बाद भी मामला आगे बढ़ता रहा। नगर आयुक्त से लेकर शासन स्तर तक किसी अधिकारी ने यह जांचने की आवश्यकता नहीं समझी कि प्रस्तुत आख्या वास्तव में उसी शिकायत का उत्तर है या किसी दूसरे प्रकरण की। अंततः उसी असंबंधित आख्या के आधार पर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया।
आर्य ने कहा कि यह कोई छोटी-मोटी प्रशासनिक गलती नहीं है। शिकायतकर्ता अलग, स्थान अलग, पार्क अलग और शिकायत का विषय अलग होने के बावजूद रिपोर्ट लगाकर शिकायत निस्तारित कर देना जनसुनवाई पोर्टल की प्रक्रिया के साथ गंभीर खिलवाड़ है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या शिकायतों को वास्तव में पढ़कर उनका परीक्षण किया जा रहा है अथवा केवल उपलब्ध आख्या को पोर्टल पर अपलोड कर निस्तारण की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि विपक्षी दल लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि अधिकारी कार्यालयों में बैठे-बैठे जनसुनवाई शिकायतों की निस्तारण रिपोर्ट लगा देते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री कार्यालय से भेजी गई शिकायत में भी यदि किसी दूसरे प्रकरण की रिपोर्ट लगाकर निस्तारण कर दिया जाता है तो इससे जनसुनवाई व्यवस्था पर लगाए जा रहे सवालों को बल मिलता है।
प्रकाश वीर आर्य ने कहा, “मेरी शिकायत मुख्यमंत्री जी से सीधे की गई थी और मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्वयं उसे जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से अधिकारियों को कार्रवाई के लिए भेजा था। इसके बावजूद मुख्य अभियंता स्तर से किसी दूसरे व्यक्ति की शिकायत की आख्या उठाकर मेरी शिकायत में लगा दी गई और नगर आयुक्त से लेकर शासन स्तर तक किसी ने शिकायत और आख्या का मिलान करना जरूरी नहीं समझा। यह छोटी-मोटी प्रशासनिक भूल नहीं, बल्कि जनसुनवाई पोर्टल के साथ गंभीर खिलवाड़ और प्रथमदृष्टया फर्जीवाड़े का मामला है। अधिकारियों ने यह भी नहीं सोचा कि मुख्यमंत्री कार्यालय से भेजी गई शिकायत को इस तरह गलत आख्या के आधार पर निस्तारित करने से जनता में संदेश क्या जाएगा। ऐसे फर्जी निस्तारण से अधिकारियों की नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार और माननीय मुख्यमंत्री जी की जनसुनवाई व्यवस्था की ही बदनामी होगी।उन्होंने मुख्यमंत्री को इस संबंध में पत्र लिखकर गलत आख्या लगाने से लेकर उसे आगे बढ़ाने और अंततः निस्तारण कराने तक प्रत्येक स्तर के जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका तय कर कठोर कार्रवाई की मांग की है।”

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