कृष्‍ण का अवतार बताता खुद को, जिसने कई लड़कियों की कर दी जिदंगी बर्बाद, IITIAN बाबा अब हुआ गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में मथुरा के गोवर्धन से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां पुलिस ने खुद को आध्यात्मिक गुरु बताने वाले एक IIT पासआउट फर्जी बाबा अभिषेक मिश्रा को युवतियों के साथ दुष्कर्म, ब्रेनवॉश और ब्लैकमेलिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे आरोपी के काले कारनामों को चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।

आरोप है कि यह फर्जी बाबा ऑनलाइन प्रवचन देकर अच्छी खासी पढ़ी-लिखी लड़कियों को अपने जाल में फंसाता था। वह खुद को भगवान कृष्ण का अवतार भी बताता था। अपने प्रभाव में लेने के बाद वह कथित रूप से उनका ब्रेनवॉश करता था। बताया जाता है कि वह तथाकथित गंधर्व विवाह कराता था। बाद में उन्हीं लड़कियों को नशीला पदार्थ देकर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाता और फिर उनकी अश्लील वीडियो और तस्वीरें बना लेता था।

ब्लैकमेलिंग का खेलता था खेल

29 साल के आईआईटियन बाबा की करतूत यही तक सीमित नहीं थी। वह इन वीडियो के दम पर पीड़िताओं और उनके परिवारों को लंबे समय तक ब्लैकमेल करता था।

पीड़िता की हिम्मत से खुला राज

हालांकि, उसके इस घिनौने खेल की उम्र ज्यादा लंबी नहीं थी। उसकी काली करतूत का पर्दाफाश तब हुआ जब एक पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर आरोपी के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई। तहरीर के आधार पर मथुरा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी बाबा अभिषेक मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया।

पढ़ी-लिखी लड़कियों को बनाता था शिकार?

पुलिस जांच में सामने आया है कि इस ढोंगी बाबा के संपर्क में आने वाली ज्यादातर लड़कियां पढ़ी-लिखी थीं। अब तक जिन पीड़ितों के नाम सामने आए हैं, उनके पास बीटेक (B.Tech), एमटेक (M.Tech) और एमबीए (MBA) जैसी उच्च डिग्रियां थी।

कौन है अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास?

इस ढोंगी बाबा अभिषेक मिश्रा खुद उर्फ आदिकर्ता नारायण दास ने साल 2017 से 2021 तक आईआईटी रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसके बाद उसने करीब 1 साल तक मुंबई की मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पढ़ाई के दौरान ही उसने गीता ज्ञान से प्रेरित होकर ऑनलाइन भगवत गीता ज्ञान देने की प्लानिंग की थी। इसके बाद वो साल 2022 में अपनी मां के साथ राधाकुंड आ गया और किराये के मकान में रहने लगा। बाद में उसने अपना खुद का मकान खड़ा कर लिया।

फिर उसने साल 2023 में संन्यास लेकर अपना नाम आदिकर्ता नारायण दास रख लिया। इस दौरान उसने राधाकुंड में अपना आश्रम बनाया। इस बीच अच्छे खासे पढ़े-लिखे लड़के और लड़कियां उसके संपर्क में आए। रिपोर्ट्स की माने तो उसका प्रभाव इस कदर था कि कई लड़के-लड़कियां अपनी नौकरी छोड़कर गोवर्धन में रहने लगे। बाबा आईआईटी बैकग्राउंड का भी बखूबी फायदा उठाता था। वो बोलने से पहले अध्ययन करता और फिर जरूरत पड़ने पर वैज्ञानिक नजरियां जोड़कर देता था। इससे प्रभावित होकर युवा जल्द ही उसके शिष्य बन जाते थे। मूल रूप से ओड़िशा के भुवनेश्वर में रहने वाला अभिषेक मिश्रा पिछले तीन साल से गोवर्धन में रह रहा था। जब बाबा के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की भनक लगी तो कई युवा गोवर्धन छोड़कर निकल गए। फिलहाल पुलिस आरोपी के मोबाइल डेटा और उसके नेटवर्क की तफ्तीश में जुटी हुई है, जिससे की अन्य पीड़िताओं के बारे में पता लगाया जा सके।  गहराई से तफ्तीश कर रही है ताकि अन्य पीड़ितों का पता लगाया जा सके।

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