- मशाल मार्च को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर पूर्व विधानसभा प्रत्याशी ने जताई नाराजगी
कानपुर। गोविंद नगर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी एवं अधिवक्ता योगेन्द्र अग्निहोत्री ने कहा कि कानपुर में निकाला गया आक्रोश मशाल मार्च आरक्षण के विरोध में नहीं, बल्कि UGC के नए प्रावधानों को रोल बैक करने तथा आरक्षण व्यवस्था में न्यायसंगत सुधार और समीक्षा की मांग को लेकर आयोजित किया गया था।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग राजनीतिक स्वार्थों के कारण समाज के कम पढ़े-लिखे लोगों को गुमराह कर रहे हैं और इस मार्च को आरक्षण विरोधी आंदोलन के रूप में प्रचारित कर रहे हैं। यह पूरी तरह भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण प्रचार है। समाचार रिपोर्टों में भी मार्च का उद्देश्य UGC प्रावधानों की वापसी और आरक्षण व्यवस्था में सुधार बताया गया है।
एडवोकेट योगेन्द्र अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि आरक्षण में सुधार की मांग का अर्थ आरक्षण का विरोध करना नहीं है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था की समीक्षा इसलिए आवश्यक है, ताकि दलित, पिछड़े और वास्तविक रूप से वंचित वर्गों को आरक्षण का लाभ सही रूप में मिल सके तथा इसका लाभ बार-बार कुछ ही परिवारों तक सीमित न रहे।
उन्होंने कहा, “हम आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि आरक्षण के साथ हैं। हम देश के दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों के अधिकारों के साथ खड़े हैं। हमारा उद्देश्य किसी जाति या समाज का विरोध करना नहीं, बल्कि व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, न्यायपूर्ण और प्रभावी बनाना है।”
पूर्व विधानसभा प्रत्याशी ने समाज के लोगों से अपील की कि वे किसी भी राजनीतिक भ्रम या अफवाह का शिकार न हों और किसी आंदोलन के संबंध में राय बनाने से पहले उसके वास्तविक उद्देश्य और मांगों को समझें। उन्होंने कहा कि कानपुर का मशाल मार्च UGC रोल बैक, आरक्षण सुधार और समान अवसर की लोकतांत्रिक मांग को लेकर था, न कि आरक्षण समाप्त करने के लिए।
