वफ्फ बोर्ड के नए कारनामें से सेक्लयुरिज्म भाईचारे को करारा आघात 

वाराणसी का प्रसिद्ध यूपी कॉलेज जिसे  राजा उदय प्रताप सिंह जूदेव ने 115 साल पहले किया था स्थापित और अब वक्फ बोर्ड ने वाराणसी के 115 साल पुराने उदय प्रताप कॉलेज पर अपना दावा ठोका जिसके बाद लोगो नें कहा इसीलिए भाजपा जरुरी थी और 400 पार जरुरी था पर कुछ जयचंदो नें विश्वासघात किया और अब कुछ लालची सेक्युलर नेताओं नें भारत में हिन्दुओं को खतरे में डाल दिया। मिडिया के दावे के अनुसार वफ्फ बोर्ड नें  कॉलेज परिसर में बना ली अवैध मस्जिद-मजार और कॉलेज की बिजली चोरी कर जलाते हैं बल्ब-पंखा। यूपी कॉलेज करीब 500 एकड़ में फैला है। इसके द्वारा प्रदेश में डिग्री कॉलेज, इंटर कॉलेज, रानी मुरार बालिका स्कूल, राजर्षि शिशु विहार, राजर्षि पब्लिक स्कूल संचालित किया जाता है। इन सबमें करीब 20,000 विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। उदय प्रताप कॉलेज की स्थापना लगभग 115 साल पहले सन 1909 में भिनगा (बहराइच, उत्तर प्रदेश) के राजा उदय प्रताप सिंह जूदेव ने की थी। सन 1886 में संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य रहे राजा उदय प्रताप सिंह जूदेव ने 25 नवम्बर 1909 को वाराणसी में ‘हेवेट क्षत्रिय हाई स्कूल’ की स्थापना की। आगे चलकर यह उदय प्रताप सिंह स्वायत्त महाविद्यालय के रूप में विकसित हुआ। उन्होंने 1909 में ही ‘उदय प्रताप कॉलेज एंड हेवेट क्षत्रिय स्कूल इंडाउमेंट ट्रस्टट का गठन किया था, जिसके तहत यह कॉलेज संचालित है। उधर वक्फ बोर्ड ने एक बार फिर चुनौती दी है। उत्तर प्रदेश वक्फ बोर्ड ने वाराणसी में स्थित प्रसिद्ध उदय प्रताप कॉलेज (यूपी कॉलेज) की संपत्ति पर अपना दावा ठोका है। लखनऊ स्थित यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने यूपी कालेज की जमीन को वक्फ की संपत्ति होने का दावा किया है। इसकी जानकारी सामने आने के बाद कॉलेज के शिक्षकों एवं छात्रों में आक्रोश फैल गया है।
यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सहायक सचिव आले अतीक ने वक्फ एक्ट 1995 के तहत 2018 में कॉलेज प्रबंधक को नोटिस भेजा। नोटिस में कहा गया है कि वसीम अहमद निवासी भोजूबीर तहसील सदर, वाराणसी ने कहा है कि ग्राम छोटी मस्जिद नवाब टोक मजारात हुजरा उदय प्रताप कॉलेज भाेजूबीर की संपत्ति कॉलेज के नियंत्रण में है। इसे सुन्नी बोर्ड कार्यालय में पंजीकृत कराया जाए।
नोटिस में आगे कहा गया कि 15 दिनों में जवाब दें। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन की बात नहीं सुनी जाएगी। इसका जवाब देते हुए उदय प्रताप शिक्षा समिति के तत्कालीन सचिव यूएन सिन्हा ने कहा था कि यूपी कॉलेज की स्थापना 1909 में हुई है। कॉलेज की जमीन इंडाउमेंट ट्रस्ट की है और चैरिटेबल इंडाउमेंट एक्ट के तहत आधार वर्ष के बाद ट्रस्ट की जमीन पर किसी का मालिकाना हक खुद समाप्त हो जाता है। यूपी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर डीके सिंह ने मिडिया से बातचीत में  बताया कि नोटिस 6 दिसंबर 2018 को भेजा गया था। इसका 21 दिसंबर 2018 को जवाब दिया गया था कहा गया था कि यह ट्रस्ट द्वारा संचालित है। इसलिए इस पर किसी का मालिकाना हक समाप्त हो जाता है। डीके सिंह ने कहा कि इसके बाद वक्फ बोर्ड की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
पंकज सीबी मिश्रा/राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार

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