यूट्यूबर शिक्षकों का मायाजाल : व्यूज से पैसा और शोहरत कमाने का भयानक कुचक्र 

पेरेंट्स एक बात याद रखना, उम्मीद एक बार मुँह फेर लें तो सफलता कभी नहीं आती  इसलिए बचिए इन दो कौड़ी के नक्कालो से जो यूट्यूबर शिक्षक यूट्यूब एजुकेशन के नाम से एजेंडा चला कर बच्चों को मोबाईल स्टडी का आदी बना रहे। यूट्यूब पर कुछ भी परोस कर व्यूज जुटाने और पेआउट कमाने वालों के दुखती रग पर जैसे ही जाबांज पत्रकार अंजना ओम कश्यप ने हाथ रखा यूट्यूबर बिलबिला उठे। खान सर के नाम से मशहूर फैजल खान की पोल खुल गई। जेल जाने तक की नौबत आ गईं उधर रौशन आजाद यादव ने भी खूब बवाल काटा। पूरा बिहार अंजना ओम को कह उठा  वाह दीदी वाह, तुमने तो धो के रख दिया इन धोखेबाज सड़ जी लोगो को !
शिक्षा के नाम पर प्राइवेट स्कूलों से लेकर यूट्यूब तक को व्यवसाय बना चुके लुटेरों को जैसे ही बेनक़ाब किया गया सभी मिमिया उठे। आखिर क्या गलत बोल दिया अंजना ओम कश्यप ने ! दो कौड़ी को दो कौड़ी ही बोला जाना चाहिए, और इस तरह कई सड़ जी तो पढ़ाने के नाम पर छात्रों को मोबाईल का आदी बना रहे। बिहार के फ़ौजी डॉक्टर की बेटी अंजना कश्यप पहले डॉक्टर बनने की तैयारी की फिर डीएम बनना चाहा, लेकिन लुटेरों की वज़ह से बन नहीं पाई तो अब इनको बेनक़ाब करने के मुहिम में है और अब जब वह नामी पत्रकार बन गई है तो दो कौड़ी के लोगो को चुभ रही। पहले जी न्यूज़ फिर न्यूज़ 24 और 2012 में सबसे तेज आज तक के लिए लंबी पारी खेलने वाली अंजना एक तेज तर्रार सामाजिक चिंतक भी है।
हर साल कांग्रेस गठबंधन की गिरती सत्ता या भाजपा की अराजकता.. चुनाव की चक्कलस या नेताओं के घोटाले,  गिरता रुपया, डायन होती महंगाई सब पर बेबाक अंजना आई और छा गईं।  कभी टू जी घोटाले पर गरजीं तो कभी रूपये की पतली हालत पर बरसीं, लगता था सबसे तेज को वाकई तेज मिली है। अंजना के अक्स में कभी फ़ौजी पिता तो कभी आईपीएस पति की ईमानदारी दिखती तो है। हिंदुस्तान में नए युग की शुरुआत का साल 2014 जिसमें मीडिया में गोदी मीडिया का बोलबाला हुआ, जो सच लिखें बोले वह गोदी मिडिया कहलाता और जो विपक्ष के लिए लिखें वह निष्पक्ष कहलाता। तमगा देता कौन था  ! प्रियंका भारती, राजकुमार भाटी, अनुराग भदौरिया, इत्यादि जिन्हें निष्पक्ष का नि तक नहीं पता । उनके अनुसार सबसे तेज वाले भी गोदी में चले गए।
इसके साथ बदल गईं कई धारणाएं, बरसना तो जारी था, मगर घोटालों पर नहीं अब मुद्दों पर, विपक्ष पर नहीं अब एजेंडो पर, ईमानदारी पर नहीं अब बेईमानो पर ! तेवर भी दिखता है लेकिन अब केवल मूल मुद्दों के लिए… कभी-कभी तो ऐसा लगता रहा कि दीदी अब मुद्दों की लड़ाई लेकर बैठी हैं। सरकार पर सवाल उठाने वालों को विपक्ष निपटा रहा और सिस्टम पर सवाल उठाने वालों को पक्ष निपटा रहा। कोई सवाल उठाकर तो देखें ! भाजपाई प्रवक्ता नोटबंदी का समर्थन से लेकर साहेब के हर कदम पर न्योछावर होने में कोई कसर नहीं छोड़ते पर अंजना ने किसी को नहीं छोड़ा। पिछले दिनों बंगाल चुनाव याद है ना, 10 रूपये की झालमुड़ी से सरसों के तेल की खुश्बू का अहसास पूरे देश को करवा दिया इसी मिडिया ने और इसकी ताकत ऐसी की ममता ताकती रह गईं। हाथ में झालमुड़ी के पैकेट को लेकर बात शुरू की और ऐसे चबाया कि विपक्ष की फौज भी पानी-पानी हो गईं।
बड़ी मेहनत से खोजकर लाई मुद्दों पर बेबाक हो और पूरे देश को बता रही कि ये बात सबकी बात है। विपक्ष झालमुड़ी निपटी तो मेलोडी क्यों चॉकलेटी शुरू कर दिया जबकि अंजना जनहित के मुद्दों पर बोलती रही। नीट पर हुआ प्रहार, चाटुकारिता बनीं ढाल, सबने अलापा दो कौड़ी का राग अंजना ने सवाल पूछा, 22 लाख बच्चों की परीक्षा नीट का पेपर लीक हुआ हर तरफ से सरकार पर हमले होने लगे कई बच्चों का डॉक्टर बनने का सपना टूटा तो जान दे दी इसका जिम्मेदार कौन कोचिंग संस्थान जिन्होंने पैसे देकर अपने छात्रों के लिए पेपर आउट कराए। विपक्ष से लेकर लूट तंत्र तक के जिम्मेदारों ने तो बस विरोध का कंबल ओढ़ रखा है । इंतजार मामला ठंडा करने का हो रहा था , लेकिन लाखों बच्चों को मोटी फीस लेकर पढ़ाने वाले आधुनिक यूट्यूबर शिक्षक भ्रष्टाचार के तीर पर तीर चला रहे ।
नीट एसएससी रेलवे जैसे परीक्षा में घोटाले, पेपर लीक को लेकर सरकार पर बिना डरे हमला चल रहा पर कोचिंग संस्थाओं के हेड और सड़ जी को कोई कुछ नही कह रहा । कॉकरोच भी निशाने लगा रहे थे। टीवी पर मुर्गा लड़ाई में ज्यादा तवज्जो पाने वाले प्रवक्ता भी नीट पेपर लीक पर हमलावर दिखने लगे। उन्हें मुद्दा दल के चुप कराया और शिक्षकों के वार रोकने के लिए प्रवक्ता ढाल बन गए। इस तरह स्क्रिप्ट पढ़ी मानों टेलीप्रॉम्पटर अचानक बंद हो जाए और कैमरा चालू रहे।  लाखों युवाओं के सपनो पर डाका डालने वाले यूट्यूबर शिक्षकों को दो कौड़ी बता डाला  तो क्या गुनाह कर डाला !
इन्हे आता जाता कुछ नहीं बस व्यूज जुटाने के लिए कुछ भी उलूल जुलूल लिख बोर्ड पर एक्सप्लेनर बनते हैं। भोले भाले बच्चों को ठगते हैं। इसके बाद तो मानों भूचाल आ गया। सब तरफ से दीदी पर निशाने चल रहे हैं। एक मैडम तो बच्चों के सामने फूटी कौड़ी ले आईं और बता दिया हम  दो कौड़ी के क्यों है ! अब सबसे तेज की किरकिरी भी हो रही है। शिक्षक लॉबी बौराई तो सबसे तेज वालों को भला बुरा पर उससे क्या हुआ ! उल्टे टीआरपी बढ़ गई। यह कोई नहीं दिखाता की साक्षात्कार पैनल में बैठे सड़ जी कितने पैसे लेकर चयन करते है ! दावो के अनुसार वैकेंसी की सीटे पहले से मंत्री नेताओं ले रिस्तेदारों को बेचे जाते है। चलते हैं उन मुद्दों की ओर जो अभी उठे ही नही जैसे कठिन सवाल पूछने वाली अंजना दीदी घेरी जा रही  हैं।
मोबाइल पर गरीबों को मुफ्त में पढ़ाने का दावा करने वालों का काला सच उजागर हुआ तो अंजना पर ही कीचड़ उड़ेल दिया। इन्हे लगता है दीदी इनके खिलाफ एजेंडा चलाना चाहती हैं मगर सबसे तेज, और बाल बच्चे वालों को तो देखना चाहिए कि लूट कहाँ से कहाँ तक पहुंचा ! कम से कम थोड़ा लिहाज तो रखते। ऐसा न हो कि इन दो कौड़ी वाले के साथ कॉकरोच की फौज भी खड़ी हो क्यूंकि आजकल सस्ती लोकप्रियता का दौर चल रहा। ये सब सबसे तेज पर हमला बोल दे। मोबाइल से ऐसा लिखना शुरू कर दे कि भरोसा सबसे धीमा हो जाए वैसे भी भरोसा टूट रहा था, अब और घट गया।
 पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी 

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