भावनानी के भाव – मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं

लेखक, चिंतक, कवि, एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं
अटके काम पल भर में पूरे होते हैं
सुखी काया की नींव होते हैं
मानवता का प्रतीक होते हैं
मुस्कान में हम सुखी ज़िन्दगी जीते हैं
प्रेम रस बहुयात में पीते हैं
दिलों में प्रेम भाव वात्सल्य सीते हैं
मानव से मानव की प्रेम कड़ी जोड़ते हैं
स्वभाव की यह सच्ची कमाई है
इस कला में अंधकारों में भी
भरपूर खुशहाली छाई है
मुस्कान में मिठास की परछाई है
मीठी जुबान का ऐसा कमाल है
कड़वा बोलने वाले का शहद भी नहीं बिकता
मीठा बोलने वाले की
मिर्ची भी बिक जाती है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Breaking News
'दो दर्जन से ज्यादा सपा सांसद हमारे संपर्क में...', ओपी राजभर के बाद अब संजय निषाद का बड़ा दावा, सियासी हलचल तेज | संजय राउत ने बागी सांसदों को दी गाली, बवाल होने पर कहा- 'मराठी में चलता है, जिसे जो भाषा समझ आती है...',संजय निरुपम ने किया पलटवार | 'ईरान समझौते के दौरान समुद्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो', PM मोदी ने ट्रंप के सामने उठाया मुद्दा | 2027 में सैफई तक सिमट जाएगा सपा का प्रभाव’, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के दावों से चढ़ा सियासी पारा, कहा- 25-26 सांसद टूटने को तैयार
Advertisement ×