भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव – मेरे पास पचासों काम रहते है 

लेखक चिंतक कवि किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
तुम्हारे समान खाली हूं क्या
मेरे पास टाइम नहीं
मैं बहुत बिजी रहता हूं
मेरे पास पचासों काम रहते है
सिर्फ चार घंटे मित्रों से बतियाता हूं
सिर्फ दो घंटे धूप में बैठता हूं
सिर्फ दो घंटे नावेल पढ़ता हूं
मेरे पास पचासों काम रहते है
संस्थाओं का काम अपने मतलब से करता हूं
स्वार्थी मतलबी बिजी आदमी हूं
कोई मुझसे बात करने आया तो छोड़ता नहीं
मेरे पास पचासों काम रहते है
लोगों की बेकार की बातें ध्यान से सुनता हूं
मोहल्ले कॉलोनी के दो-चार चक्कर काटता हूं
टाइम कैसे कटे सोचता हूं पर दिखावा करता हूं
मेरे पास पचासों काम रहते है
साथियों को अगर खाली हूं यह बताता हूं
दस काम फोकट में निकालते हैं
बिना फीस या मुनाफा दिए चले जाते हैं इसलिए
 मेरे पास पचासों काम रहते है
हकीकत है काम एक पैसे का नहीं पर फुर्सत
भी एक मिनट की नहीं दिखावा ऐसा करता हूं
बिजी बताने से प्रतिष्ठा बढ़ती है इसलिए
 मेरे पास पचासों काम रहते है

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