
पंकज कुमार मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी
नीट और नेट दोनों परीक्षाओं ने सरकारी एजेंसियों की पोल खोल कर रख दी। पेपर लीक को लेकर जो विवाद सामने आया है वह नया नहीं है आहिस्ता आहिस्ता उसका एक बड़ा स्वरूप कुछ गलतियों के कारण अब खुलकर सामने आया है। इससे पहले भी यह होता रहा पर सब गुपचुप तरीके से पर तब सारी व्यवस्था नीट और क्लीन ही समझी जाती रही। नीट परीक्षा की सुचिता पर अनगिनत सवाल उठाए गए । नीट में जो कुछ हुआ उसके तमाम सच सामने आ गए हैं किन्तु यदि कार्रवाई भी हुई तो वह किसी अदने कारखास पर होकर समाप्त हो जाएगी या पुनः परीक्षा की एक नौटंकी । आला अधिकारी एक बार फिर बच जायेगा राम गोविन्द चौधरी की तरह। तिकड़मी लोगों के गिरोह इस दस साल में इतने पनपे हैं कि उन्हें किसी का डर नहीं। इन तिकड़मी लोगों को विपक्ष से जोड़कर देखें तो यह इंगित करता है कि किस तरह हर तरह के षड्यंत्रों और घपलों की इसे खरीदने वालों को दी गई है ।जब विज्ञापन 48 और 50 की हायर एजुकेशन के सीटे पचीस पचीस लाख में बिकने की खबर वायरल हुईं उससे अब यें नीट या नेट परीक्षा में जो कारगुजारियां दिखाई दी हैं वह तो सामान्य ही लगती हैं।सब जांच के घेरे में आनी चाहिए। पर निष्पक्ष जांच की उम्मीद अब कहां है ? जहां तक पेपर लीक का मामला है वह नया नहीं है सब चल रहा है बरसों से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, गुजरात प्रदेशों की बोर्ड परीक्षाओं में जब शिक्षकों से यह कहा जाता है कि रिजल्ट बिगड़ा तो उसकी खैर नहीं तो वह विद्यार्थियों के लिए नकल की तरकीबें निकाल लेता है मेरिट चाहिए तो वह भी। आसान तरीका बता देता है कि फलां फलां सेंटर में इतने लाख जमा करो परीक्षा में बैठो और जैसा चाहो वैसा रिजल्ट बनाओ। ये सब खुलेआम होता रहा किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो नीट जैसी परीक्षाएं कैसे अछूती रह सकती हैं। बड़ी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा है बहुत मायने रखती हैं और बहुत कमाई का जरिया भी पनपती है।
उत्तर प्रदेश 2011 टीईटी मेरिट घोटाला और मध्यप्रदेश प्रदेश में व्यापम काफ़ी चर्चित रहे। जो इस प्रकार के धांधली के जीते जागते गवाह थे। इसकी नाटकीय कितनी जांच पड़तालें चली पर सब धुआं बन के उड़ गई। सुधार ये हुआ कि व्यापम नाम बदल दिया गया और 2011 के योग्य बेरोजगार आज भी दर दर की ठोकरे खा रहें । पिछले सालों में यहां पटवारी भर्ती परीक्षा का हाल भी ठीक नीट की तरह ही था एक सेंटर से पांच छै ढपोरशंख मेरिट में आए, जाँच कराइये देखिए जितने लेखपाल बने है सब जुगाड़ से बने है । ऐसे टॉपरो से ज़ब पत्रकार मिलने पहुंचे तो उनमें से चयनित उम्मीदवार सामान्य यूपी और मध्यप्रदेश की जानकारी और पेपर में आए सरल सवाल के उत्तर नहीं दे पाए मुंह चुराते रहे और कुछ भाग खड़े हुए। तब भी खूब विरोध हुआ पर हुआ कुछ नहीं वे सब सरकारी नौकरी शान से कर रहे हैं। बाकी पुलिस से पिटे लोग ठगे से घर में बैठे हुए हैं। इस दौर में चुनावों के आस पास वोट लालच में राज्यों में नौकरियां दबाव वश साज़िश के तहत खूब खूब निकाली जाती रहीं आवेदन के नाम पर बेरोजगार युवाओं से लंबी फीस वसूली गई। परीक्षाएं सालों बाद विलंब से हुई फिर पेपर आउट किए जाते रहे परीक्षाएं निरस्त होती रहीं 2011 के शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए तीन-तीन बार आवेदन शुल्क वसूला गया, करोड़ों लूट लिए गए बेरोजगार छात्रों से पर रोजगार किसी को नहीं मिला उनकी उम्र निकल गई। मिडिया ने इस मुद्दे को खूब सिलसिलेवार उछाला पर इक्का दुक्का परीक्षा के सिवा कोई बात नहीं बनी। आज़ नीट और नेट परीक्षा के प्रभावित छात्र आंदोलन रत हैं विपक्ष उनके साथ खड़ा है पर क्या इस सरकार से आप उम्मीद कर सकते हैं जो पिछले ओवर एज बेरोजगार है उन्हें बुलाकर ससम्मान नौकरी दें सकती है ! ईडी, सीबीआई वगैरह कब ऑफिस बाबुओ और बड़े अधिकारीयों के घर छापेमारी करेंगी ! इस प्रणाली के ज़रिए येन-केन प्रकारेण फिर कोई सीन नहीं होगा क्या गारंटी ! नीट और क्लीन शिक्षा और रोजगार की हमारी उम्मीदें समाप्त है और युवाओं के भविष्य की बुनियाद ना केवल परीक्षाओं से बल्कि हमारे चर्चाओं से समाप्त हो जाएगी। चारों और गंदगी अव्यवस्था से हम घिरे है । नीट परीक्षा और नेट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों का प्रायश्चित करने से कुछ हासिल नहीं होगा, जब तक देश, खासकर युवा इस अव्यवस्था और गंदगी के ख़िलाफ़ एकजुट नहीं होगा ।
