नेताओं, अफसरों और जजों के अवैध संपत्तियों की निष्पक्ष जांच कराए सरकार..!

राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर यूपी के पूर्व बाहुबली हरिशंकर तिवारी की संपत्तियों की जांच करवाते है और ईडी उनके पुत्र विनय शंकर तिवारी को गिरफ्तार कर लेती है किंतु आज भी कई अन्य जातियों के बाहुबली नेता सत्तारूढ़ दल में कालर टाइट किए शासन के शानो शौकत का मजा ले रहे और अकूत अवैध संपत्तियों के मालिक है । सरकार केवल द्वेषवश कुछ नेताओं और  छुटभैए अपराधियों की संपत्ति जब्त करेगी। ! यह तो अच्छी बात नहीं है । ऐसी कार्रवाई समान होनी चाहिए।  पर सत्ता और विपक्ष के नेताओं , अधिकारियों और जजों की अवैध तरीके से अर्जित बेसुमार संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई कब शुरू होगी इसपर सरकार का कोई मंत्री या अधिकारी कुछ नहीं बोल रहा है।  रेलवे में नौकरी के लिए लोगों से जमीन अपने नाम लिखवा लेने के मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियां पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव से पूछताछ कर रही हैं पर लालूजी के सुपुत्र तेजस्वी यादव  कह रहे हैं कि पूछताछ से कोई फर्क नहीं पड़ता। इसका मतलब तो यह भी निकलता है कि जांच वगैरह की वर्षों से चल रही यह प्रक्रिया आम लोगों को दिखाने के लिए सिर्फ एक कोरमपूर्ति है, नेताओं का कुछ होना-जाना नहीं। लोग मुगालते में रहें कि भ्रष्टाचार को बेनकाब किया जा रहा है और दोषियों को सजा दी जाएगी। यही सब होते-हवाते दशकों का समय बीत जाएगा और घोटालेबाज लूट की संपत्ति का उपभोग करके अपनी जीवन यात्रा पूरी कर लेंगे और अपनी अगली पीढ़ियों के लिए अकूत संपत्ति छोड़ जाएंगे। तब तक केस की फाइलें भी सड़-गल जाएंगी, पुरानी पीढ़ी के लोग भी जा चुके होंगे और लोग भी भूल जाएंगे। उस समय जो नए लोग रहेंगे वे कहेंगे कौन लालू, कौन सी नौकरी, कौन सी जमीन और कौन सा केस?  भाई साहब, यही दुनिया है और यही दस्तूर। भ्रष्टाचार का सारा केस उसी दिशा में जा रहा है और हम इस सब पर लिख-लिख कर और बकबक करके नाहक परेशान हो रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यह चुप्पी तोड़नी चाहिए की राज्य के बाहुबली नेताओं पर कार्यवाही कब  ! क्योंकि कई विपक्षी नेताओं और उनके कई मंत्रियों, विधायकों, करीबियों, इप्टियों-डिप्टियों इत्यादि-इत्यादि के पास ऐसी बहुत सारी जमीनें हैं जो कब्जाई हुई और रैयती किसानों से जबरन और भय दिखाकर हथिया ली गई अवैध जमीनें हैं। बहुत सारी सरकारी जमीनों, सरायों और व्यापारियों, मारवाड़ियों द्वारा दान में दी गई जमीनों पर बनवाए गए सरायों और धर्मशालाओं पर भी सत्ता और विपक्ष के बाहुबली नेताओं का कब्जा हो गया है। इन संपत्तियों को भी मुक्त कराकर उनके मूल मालिकों को लौटाया जाना चाहिए। जो संपत्तियां लोक सेवाओं और लोक कल्याण के लिए समर्पित थीं उनको अवैध कब्जे से मुक्त कराकर उन्हीं कल्याण कार्यों के लिए समाज को लौटा दी जानी चाहिए। उधर जज साहब भी इन सबसे अछूते नहीं । अधजले नोटों की बोरियां मिली पर हुआ कुछ नही  । दिल्ली हाईकोर्ट के  विद्वान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले में पिछले दिनों होली के दौरान आग लगने की हुई घटना में दिल्ली फायर ब्रिगेड को उनके बंगले के एक स्टोर रूम में कई बोरियों में भरे अधजले नोट मिले थे। कहते हैं ये नोट 4 या 5 बोरियों में भरे हुए थे। आग लगने की वजह से नोट कुछ जल गए थे।  नोटों से भरे ये बोरे जज साहब के बंगले में किसने  रखे ? क्यों रखे थे ? क्या उनसे कोई डील हुई थी ? या फिर ईमानदार जज साहब को फंसाने के लिए किसी ने यह बड़ी साजिश रची थी ? इस पर कोई जांच नहीं हुई  । मुझे कुछ नहीं कहना है और न मुझे इस बारे में कुछ मालूम ही है। सिर्फ तरह-तरह की चर्चाएं सुनने को मिल रही तो लग रहा की सब बीके है । अखबारों में छपी खबरों के मुताबिक अभी कुछ महीने पहले 12 दिसंबर 2024 को दिल्ली हाईकोर्ट का एक फैसला आया था जो एअरटेल के मोबाइल टॉवर को लेकर था। यह मामला टॉवर पर लगे टैक्स को लेकर था और एअरटेल को 5454 करोड़ रुपए का टैक्स सरकार को चुकाना था। टैक्स चुकाने के इस के मामले में जस्टिस वर्मा और उनके सहयोगी जज ने इंडस टावर को बड़ी राहत दे दी थी। इस मामले में फैसला तो केस की मेरिट पर ही हुआ होगा पर लोग बिना मतलब इस फैसले को उन अधजले नोटों से जोड़कर देख रहे हैं और फिजूल की उस तरह की चर्चा कर रहे हैं। अब अगर जज साहब इंडस टावर को जीएसटी के इस मामले में राहत नहीं देते तो एअरटेल को 5454 करोड़ रुपए का टैक्स सरकार को देना पड़ता। यानी सरकार को एक बहुत मोटी रकम देनी पड़ती।यह मामला ज्यादा पुराना नहीं, 12 दिसम्बर 2024 का है। अब इस मामले को जज साहब के सरकारी बंगले से मिले उन अधजले नोटों से भरे बोरों से डोड़कर देखने का कोई मतलब ही नहीं है। इस मामले को उस तरह से उन अधजले नोटों से भरे बोरों से मत जोड़िए। बस जांच करवाइए। देश और राज्य के कई बड़े आईएएस और पीसीएस के घर अकूत संपतियां है। पैसे नौकरों तक के नाम से बैंक अकाउंट खुलवाकर सेट किए गए है। जांच हो तो महंगाई घटकर सौ साल पहले वाली स्थिति में लौट आए।
पंकज सीबी मिश्रा/राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी 

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