31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सलवाद से मुक्त करना भारत सरकार का लक्ष्य?

भारत सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सलवाद से मुक्त करना है नक्सलवाद भारत की आंतरिक सुरक्षा के समक्ष एक सबसे गंभीर चुनौती है। नक्सलवादी आंदोलन एक हिंसक आंदोलन है और यह वामपंथी उग्रवाद के अंतर्गत अपनी उपस्थिति दर्ज करता है नक्सलवादी आदिवासियों  और गरीबों के अधिकार के लिए लड़ने का दावा करते हैं और इसके लिए वह हिंसक कार्रवाइयों बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाना तथा जबरन वसूली के तौर तरीके अपनाते हैं।

​भारत सरकार ने नक्सलवाद को खत्म करने के लिए बहुआयामी रणनीति बनाई है जिसमें सुरक्षा आधारभूत संरचना का विकास और वित्तीय समावेशन शामिल है भारत में नक्सलवाद का प्रारंभ पश्चिम बंगाल में 1967 में नक्सलबाड़ी गांव से माना जाता है वर्ष 2013 में नक्सलवाद से भारत के 126 जिले प्रभावित थे और यह नक्सलवाद पश्चिम बंगाल झारखंड बिहार छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश तेलंगाना आंध्र प्रदेश केरल और महाराष्ट्र के सीमावर्ती जिलों में फैला था तथा नक्सलवादियों की योजना नेपाल के पशुपति से आंध्र प्रदेश के तिरुपति तक लाल गलियारा स्थापित करने की थी किंतु वर्तमान सरकार की राजनीतिक इच्छा शक्ति प्रशासन की प्रतिबद्धता  तथा लोगों की भागीदारी से दिसंबर 2025 में यह नक्सलवादी आंदोलन सिर्फ तीन जिलों में सिमट कर रह गया है।
जिसमें मुख्य रूप से सुकमा जिला बीजापुर जिला और नारायणपुर जिला छत्तीसगढ़ शामिल है भारत सरकार ने सुरक्षा के लिए नक्सलवाद पीड़ित जिलों में पुलिस थानों का आधुनिकीकरण प्रारंभ किया तथा नक्सलवादियों के सफाई के लिए ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट प्रारंभ किया जो कि नक्सलियों के ठिकानों जिसमें उनके गोला बारूद हथियार खाद्य पदार्थ के स्थल शामिल थे को नष्ट करने का कार्य किया आधारभूत  अवसंरचना आधुनिकीकरण के तहत नक्सल प्रभावित जिलों में बैंक शाखाएं खोली गई जिनकी संख्या लगभग 1000 से अधिक रही डाकखाने लगभग 500 से अधिक खोले गए और लगभग 178 एकलव्य आवासीय विद्यालय खोले गए तथा लगभग लगभग 7704 मोबाइल टावरों की स्थापना की गई।
स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान करने के लिए उन्हें आईटीआई प्रशिक्षण दिया गया और आईटीआई केंद्रों की स्थापना की गई तथा विशेष प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना वहां पर की गई तथा भारत के  प्रधानमंत्री जी ने वर्ष 2024 में धरती आबा जनजाति उत्कर्ष अभियान 2024 का प्रारंभ किया। जिससे जो आदिवासी लोग हैं उनको उनका हक अधिकार प्रदान किया जा सके तथा उन्हें उनके जल जंगल और जमीन पर उनके अधिकार को भी मान्यता प्रदान किया गया। इस प्रकार वर्तमान सरकार की  राजनीति  इच्छाशक्ति प्रशासनिक प्रतिबद्धता तथा आदिवासियों के सहयोग से नक्सलवाद भारत से समूल नष्ट होने की और अग्रसर है।
बाल गोविन्द साहू  ​

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