खेल से बड़ा खिलाड़ी, जीओ बिहारी – जीओ बिहारी..!

बिहार में पहला भाजपाई मुख्यमंत्री कैसा  होगा, किस बिरादरी से होगा,  सवर्ण होगा, ओबीसी होगा या फिर दलित समाज का होगा.! चिराग पासवान होंगे कि  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से होगा या फिर कांग्रेस अथवा आरजेडी से जुड़ा कोई नया भाजपाई होगा.! राजनीति में  काफी समय तक रहकर विपक्ष की रणनीतियों और खामियों को भलीभांति समझने वाला असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्वशर्मा जैसा होगा, सिर्फ अपनी मेहनत और लोकप्रियता के दम पर शरद पंवार और ठाकरे परिवार जैसे दिग्गजों की जड़ों में मट्ठा डालकर सूबे में दोबारा सरकार बनाने का दमखम रखने वाला देवेंद्र फडणवीस जैसा मझा हुआ खिलाड़ी होगा अथवा हर भाषा को समझने और समझाने वाला पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ जैसा होगा ? कुछ भी होगा कोई भी होगा पर नीतीश कुमार जैसा नहीं होगा ! क्यूंकि राष्ट्रीय राजनीति में नीतीश कुमार की एंट्री पर अटकले तेज है।
हां तो भाईयों..! आईटी सेल वालों ने कहा कि मोदी के कारण देश सुरक्षित है पर बिहार वाले कह रहे नीतीश सुरक्षित नहीं क्यूंकि उन्हें जबरन राज्य सभा भेजा जा रहा है। अब कहीं सायरन बज रहे हैं, कहीं मिसाइलें चल रही हैं, कहीं लोग बंकर ढूंढ रहे हैं, और कहीं रातें गोलियों की आवाज़ में कट रही है और इधर नितीश राज्यसभा के लिए बस निकल ही रहे जैसे की रजिया गुंडों में फंस गईं और हम सीनियर पत्रकार होने की फिराक में बस मिश्रा – मिश्रा खेल रहे  ! उधर हम सब अपने घरों में, अपने परिवार के साथ, रंग और गुलाल की तैयारी में लगे रहे, बच्चे पिचकारी देख रहे थे बाजारों में पर भाजपा नीतीश को निपटाने में लगी हुई थी। अमित शाह गुजराती गुझिया छोड़ बिहारी मिठाइयों की फ़िराक़ में सीएम हॉउस घूम रहें थे। सीएम नीतीश कुमार ने आखिरकार राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर ही दिया।
राजनीतिक आकाओं की माने तो नीतीश के जाने के बाद बिहार का एक और विभाजन होगा ?  बिहार की जनता को यह जान लेना चाहिए कि  बिहार विभाजन की ओर बढ़ रहा है। अपुष्ट सूत्र कह रहे कि पटना में आयोजित बैठक में अमित शाह ने पूर्वांचल और बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर केन्द्र शासित प्रदेश बनाने की योजना बनाई है। भाजपा नेताओं और नौकरशाहों को अवगत कराया गया है कि नये केन्द्र शासित प्रदेश बनाने का उद्देश्य मुस्लिम आबादी को इसके अधीन लाकर बिहार एवं बंगाल में हिन्दू आबादी के अनुपात को बढ़ाना है।  भाजपा का मानना है कि दोनों प्रदेशों में हिंदुओं के अनुपात में बढ़ोतरी के बाद भाजपा अपने दम पर सत्ता प्राप्त कर सकती है। जदयू का विलय और नीतीश का राज्य से केंद्र में माइग्रेसन विपक्षी खेमे में  चर्चा के लिए मशाला है। कुछ समय पूर्व अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में सम्राट चौधरी, प्रदेश के मुख्यसचिव, डीजीपी, जिलों के डीएम, एसपी शामिल थे। तब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश  को इसमें शामिल नहीं किया गया था।
यह पहली बार हुआ है जब इस तरह की बैठक से नीतीश कुमार को बाहर रखा गया। इस बैठक के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि नीतीश कुमार के बाद बिहार में अब सिर्फ मुखौटा मुख्यमंत्री बनाकर सत्ता देखा जायेगा ।  बिहार का कमान भाजपा के हाथों में चला गया है और अमित शाह बिहार के वास्तविक मुख्यमंत्री के रूप में काम करना शुरू कर चुके हैं। बिहार के विकास में नीतीश कुमार कि भूमिका और कद बहुत बड़ा है। मुख्यमंत्री बनाये जाने के बाद से अब तक देखा जाए तो विकास की कई माईल लस्टोन स्थापित करने का श्रेय इन्हीं नीतीश को जाता है। नीतीश के राज्यसभा नामांकन के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मीडिया के सामने आए और नीतीश की तारीफों के पुल बांध दिए. अमित शाह ने अपने 3 मिनट 41 सेकेंड के संबोधन में कई बातें कहीं। नितीश कुमार जी बतौर मुख्यमंत्री बिहार के ईमानदार नेताओं में अव्वल रहे जो उनकी सादगी आज भी सभी नेताओं के लिए मार्गदर्शन का कार्य करती रहेगी। जदयू के नेताओं ने कहा आपको सलाम कुमार साहब !
बिहार के अब तक के सबसे बेहतरीन मुख्यमंत्रियों की लिस्ट में आप सदैव प्रमुखता से याद किये जाएंगे। आपने बिहार को जिस दहशत और खौफ़ के माहौल से निकालकर सुशासन (हालांकि आपके सुशासन मॉडल से मेरी कुछ असहमतियाँ भी रही हैं) के पथ पर लाने की भरपूर कोशिश की और जिसमें आप बहुत हद तक सफल भी रहे, उसके लिए बिहार की अधिसंख्य जनता सदैव आपकी आभारी रहेगी। महिलाओं की सुरक्षा और आजादी पर तो खैर आप निःसन्देह सबसे बेहतरीन मुख्यमंत्री रहे ही हैं।  बिहार के मुख्यमंत्री से त्याग पत्र दे राज्य सभा के उम्मीदवार बने है आप तो जितेगे भी इसमें कत‌ई सन्देह नही है। देश को उनके अनुभव की जितनी जरूरत है उससे थोड़ा भी कम नही बिहार के चयनित नये नेतृत्व को भी उनके अनुभव और उनसे सीखने की उतनी ही जरूरत होगी ।
अमित शाह ने अपने क़सीदे में कहा कि ‘नीतीश कुमार जी नामांकन के साथ ही लंबे अर्से के बाद राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश करेंगे। उनका कार्यकाल एक प्रकार से बहुत ही यशस्वी रहा। उनका ये कार्यकाल बिहार के इतिहास में स्वर्णिम पृष्ठ के रूप में देखा जाएगा।  बिहार के विकास के सारे मायनों को उन्होंने गति देने का काम किया। उन्होंने अपने शासनकाल में बिहार को जंगलराज से मुक्त करने का काम किया।  उन्होंने बिहार की सड़कों को न सिर्फ गांव से जोड़ा बल्कि उसमें सुधार करने का भी काम किया।  इतने लंबे करियर में सांसद, विधायक, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री रहते हुए उनके कुर्ते पर कभी दाग नहीं लगा। इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है की अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, जो लोग पुराने ढर्रे पर संघ परिवार का रट्टा लगाते रहे हैं वह यह भूल जाते हैं कि तमाम सारे भाजपाई मुख्यमंत्रियों में सबसे ज्यादा चर्चित मुख्यमंत्री हेमंत विश्वशर्मा और योगी बाबा रहे हैं ।
जो लोग सोशल इंजीनियरिंग और अनुभव को ज्यादा महत्व दे रहे हैं वो मध्य प्रदेश और राजस्थान को नजरंदाज कर रहे हैं। राजस्थान में पहली बार विधायक बने व्यक्ति को भाजपा ने मुख्यमंत्री बना दिया और वहां के तमाम पुराने दिग्गज भाजपाई ताकते रह गए फिलहाल वो दाँव गलत लग गया और मोहन यादव एमपी में सवर्णो के लिए बबुल बने हुए है। एक बात तो तय है कि जिसे भी न बनाने के लिए नीतीश जी अपना वीटो पावर इस्तेमाल करेंगे अर्थात नीतीश जी को जिससे एलर्जी होगी, उसे सीएम नहीं बनाया जायेगा।
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी

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