पश्चिम एशिया संघर्ष और भारत की ऊर्जा सुरक्षा की रणनीति

पश्चिम एशिया विश्व में एक महत्वपूर्ण तेल और गैस का उत्पादक है। जिसमें मुख्य रूप से ईरान, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और कतर शामिल हैं। इन देशों के द्वारा उत्पादित तेल और गैस का परिवहन हॉर्मूज जल डमरूमध्य से होता है और हॉर्मूज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के मध्य एक सकरा जलीय भाग है जो मुश्किल से 34 किलोमीटर चौड़ा है। ईरान ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और लायन रोर के पश्चात इसको बंद कर दिया है जिस कारण विश्व में तेल और गैस के दाम बढ़ गए हैं जिसका प्रभाव भारत पर भी दिखने लगा है। भारत में शेयर मार्केट में भी गिरावट दर्ज की गई है तथा भारत सरकार ने गैस सिलेंडर की बुकिंग की अवधि अब 25 दिन कर दी है विशेषज्ञ लोगों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चला तो क्रूड के दाम $100 के पार जा सकते हैं जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक होगा।
साथ ही साथ इसका प्रभाव भारत में भी पड़ेगा। जिससे भारत में महंगाई बढ़ने की संभावना है और भारत के प्रत्येक क्षेत्र पर इसका प्रभाव स्पष्ट दिखाई देगा। भारतीय मुद्रा पर भी इसका प्रभाव दिखाई देगा तथा भारत का जो व्यापार घटा है उसके भी बढ़ने की संभावना है। इन सब चुनौतियों से निपटने के लिए भारत को क्या उपाय करने होंगे। सर्वप्रथम भारत को एक दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की रणनीति तैयार करनी होगी और इसके लिए हमें स्ट्रैटेजिक तेल रिजर्व तैयार करने होंगे जिससे यदि अगर विश्व में क्रूड ऑयल के उत्पादन में या वितरण में कोई बाधा आती है तो हमारे पास क्रूड ऑयल रिजर्व रहेंगे और उनमें तेल सुरक्षित रहेगा। जिससे हमें किसी भी प्रकार की हानि नहीं होगी और हम  ऊर्जा सुरक्षा में जो उच्चावच होगा उससे अच्छी तरह से निपट पाएंगे।
दूसरा हमें ऊर्जा संक्रमण की नीति अपनानी होगी भारत को ऊर्जा उत्पादन के लिए अब तेल और गैस तथा कोयले के अलावा परमाणु ऊर्जा के उत्पादन की ओर बढ़ना होगा। जैसा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि उनका लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा का उत्पादन करना है। इसके अतिरिक्त पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा तथा ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा के उत्पादन में भी निवेश को बढ़ाना होगा तथा परिवहन को पेट्रोल और डीजल की बजाय विद्युत ऊर्जा से संचालित करना होगा।
तीसरा स्वयं के देश में क्रूड ऑयल के स्रोतों की खोज तथा उत्पादन को भी बढ़ावा देना होगा। जिससे भविष्य में होने वाले युद्धों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ सके तथा भारतीय लोगों का जीवन खुशहाल बन सके।
बाल गोविन्द साहू (लेखक) – कानपुर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Breaking News
'ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान 'कुछ भी' कर सकता है', राजनाथ सिंह ने किया सतर्क तो ख्वाजा आसिफ को लगी मिर्ची | Assam Election में Yogi Adityanath की हुंकार, एक-एक घुसपैठिए को बाहर निकालेगी NDA सरकार | महिला आरक्षण बिल पर Kiren Rijiju का बड़ा ऐलान, 16 April को बुलाया गया संसद का Special Session | PM Modi को धन्यवाद देकर बोले Chirag Paswan, उम्मीद है विपक्ष भी Nari Shakti Bill का साथ देगा
Advertisement ×