कानपुर। महिला महाविद्यालय पीजी कॉलेज किदवई नगर के सभागार में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन का शुभारंभ तीसरे तकनीकी सत्र के साथ हुआ।तीसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. मोहिनी अग्रवाल ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि ई-पठन मंच, आभासी कक्षा और ऑनलाइन पाठ्यक्रमों ने शिक्षा को महाविद्यालय की दीवारों से बाहर निकाल कर आसान बना दिया है। इस सत्र में मुख्य वक्ता प्रो. जया मिश्रा रही। चौथे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. नलिनी मिश्रा ने की। उन्होंने कहा कि स्मार्ट कक्षा और बहुमाध्यम साधनों के उपयोग से कठिन विषयों को समझना और पढ़ाना बहुत आसान हो गया है। इस सत्र में विशिष्ट वक्ता डॉ. सैयद खुर्रम निसार रहे।
उन्होंने कहा कि कौशल विकास आज के समय की सबसे बड़ी मांग है जो छात्रों को सीधे उद्योग जगत से जोड़ती है। मुख्य वक्ता प्रो. इंद्रमणि रहे। उन्होंने कहा कि छात्रों में आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और मिलकर काम करने जैसे कोमल कौशल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। तकनीकी सत्रों में लगभग पैंतीस शोध पत्र शोधार्थियों द्वारा पढ़े गए। समापन सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं गणेश वंदना के साथ हुआ। स्वागत वक्तव्य प्राचार्या प्रो. प्रतिभा श्रीवास्तव द्वारा दिया गया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और यंत्र अधिगम जैसी तकनीक छात्रों को उनकी क्षमता के अनुसार व्यक्तिगत रूप से सीखने में मदद कर रही है। संगोष्ठी की संक्षिप्त रिपोर्ट डॉ. नूर फातिमा अंसारी द्वारा प्रस्तुत की गई। विशिष्ट अतिथि प्रो. राजेश कुमार त्रिपाठी रहे।
उन्होंने कहा कि नए जमाने की शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है बल्कि यह व्यावहारिक कौशल पर अधिक ध्यान देती है। द्वितीय विशिष्ट अतिथि डॉ. अंजलि मौर्य रहीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा में तकनीक का सही उपयोग दूरदराज ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों तक भी विश्व स्तरीय शिक्षा और संसाधन पहुंचा रहा है जिससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के बीच का अंतर समाप्त हो रहा है। अध्यक्षीय सत्र में प्रो. अंजू चौधरी ने कहा कि शिक्षा में तकनीक के समन्वय के तहत स्मार्ट कक्षा, ऑनलाइन पठन मंच और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को हमेशा बढ़ावा दिया जाना चाहिए। तीसरे एवं चौथे तकनीकी सत्र का मंच संचालन डॉ. निशी सिंह एवं समापन सत्र का मंच संचालन डॉ. अनामिका वर्मा द्वारा किया गया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. निशात फातिमा द्वारा किया गया।
