कानपुर। भारतीय कृषि उत्पाद उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अजय वाजपेयी, जिलाध्यक्ष अनुराग जायसवाल व जिला वरिष्ठ महामंत्री गोपाल शुक्ला के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पाद के व्यापार व उद्योग में प्रस्तावित जियोटैगिंग ऐप के माध्यम से वाहन लोडिंग/अनलोडिंग की समानांतर ऑनलाइन व्यवस्था को स्थगित/वापस लिए जाने को लेकर राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के निदेशक को संबोधित ज्ञापन कानपुर कृषि उत्पादन मंडी समिति के सचिव विजिन बलियान को सौंपा और मंडी सचिव से विस्तृत वार्ता में इससे होने वाली समस्या से अवगत कराया।
यह भी तय हुआ कि अगले 20 दिनों के दौरान प्रदेश की सभी 220 मंडियों से मंडी निदेशक को संबोधित ज्ञापन वहां के मंडियों के मंडी सचिव को दिए जाएंगे। वार्ता में भारतीय कृषि उत्पाद उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने मंडी सचिव को बताया कि राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद, उत्तर प्रदेश द्वारा वर्तमान में कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री हेतु 6-आर, 9-आर, गेट पास एवं अन्य राज्यों से कृषि उत्पाद आगमन हेतु प्री-एराइवल स्लिप जैसी ऑनलाइन व्यवस्थाएं पहले से प्रभावी रूप से संचालित हैं। विशेष रूप से, अन्य राज्यों से उत्तर प्रदेश में आने वाले कृषि उत्पादों के लिए लागू ऑनलाइन प्री-एराइवल स्लिप व्यवस्था के कारण मंडी शुल्क चोरी की संभावना नगण्य रह जाती है, क्योंकि प्रपत्र जारी होते ही समस्त विवरण मंडी परिषद के पोर्टल पर प्रदर्शित होने लगते हैं।
ऐसी स्थिति में, एक प्रभावी ऑनलाइन प्रणाली के समानांतर जियोटैगिंग ऐप के माध्यम से वाहन लोडिंग एवं अनलोडिंग के समय टैगिंग की नई व्यवस्था लागू किया जाना ‘Ease of Doing Business’ की अवधारणा के विपरीत प्रतीत होता है। इससे व्यापारियों, उद्यमियों एवं परिवहन व्यवस्था पर अनावश्यक अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा जिसके परिणामस्वरूप अनावश्यक हानि होगी। इसलिए इस नई समांतर ऑनलाइन व्यवस्था को
स्थगित किया जाए या वापस लिया जाए।
वार्ता में भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अजय बाजपेयी ने कहा कि गल्ला मंडियों से निकलने वाले कृषि उत्पादों, जैसे गल्ला, दलहन, तिलहन, किराना, गुड़ एवं अन्य कृषि आधारित उत्पादों तथा उनसे संबंधित उद्योगों पर इस व्यवस्था का सीधा प्रभाव पड़ेगा। प्रत्येक बार माल लोडिंग एवं गंतव्य पर पहुंचने के उपरांत वाहन संख्या को ऐप के माध्यम से टैग करना अनिवार्य होने से व्यापारिक प्रक्रियाएं जटिल बनेंगी। साथ ही, किसी तकनीकी अथवा मानवीय त्रुटि पर दंडात्मक प्रावधान होने के कारण व्यापारियों एवं उद्यमियों के उत्पीड़न की संभावना भी बढ़ेगी।
यह भी कहा कि विशेष रूप से, छोटी मात्रा में माल लेकर अन्य जनपदों में जाने वाले छोटे वाहनों के संदर्भ में यह व्यवस्था व्यवहारिक नहीं है। प्रायः छोटी गाड़ियां ट्रांसपोर्ट नगर तक माल पहुंचाती हैं जहां विभिन्न मालों को एक बड़े वाहन में समेकित कर गंतव्य तक भेजा जाता है। ऐसी परिस्थिति में प्रत्येक चरण पर पुनः वाहन टैगिंग कर पाना व्यावहारिक रूप से अत्यंत कठिन एवं लगभग असंभव होगा। वार्ता में भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश संगठन मंत्री संजय सिंह भदौरिया व जिला संयुक्त महामंत्री केके गुप्ता ने कहा कि वाहन टैगिंग व्यवस्था से संबंधित समस्याओं को लेकर तथ्यों एवं व्यावहारिक कठिनाइयों को दृष्टिगत रखते हुए इस प्रस्तावित व्यवस्था को लागू करने से पूर्व सभी संबंधित पक्षों, व्यापारिक व्यवहार्यता एवं संभावित प्रभावों का समुचित परीक्षण कराया जाए तथा तब तक इस व्यवस्था को स्थगित/वापस लिया जाए।
वार्ता व ज्ञापन देने वालों में प्रमुख रूप से भारतीय कृषि उत्पाद उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिला महामंत्री अर्जित गुप्ता अज्जू , जिला कोषाध्यक्ष राजेन्द्र मिश्र राजन, भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के दक्षिण युवा अध्यक्ष अनुज त्रिपाठी, राजकुमार जायसवाल, शिव कुमार गुप्ता, शिवकुमार साहू, विनोद गुप्ता छाने, राहुल गुप्ता, रामकिशोर गुप्ता, राहुल गुप्ता, आशीष ओमर, गोपाल वर्मा , नितिन त्रिवेदी, आशुतोष गुप्ता, सोनू गुप्ता, विनीत गुप्ता, कार्तिकेय गुप्ता, महेश शंकर गुप्ता आदि थे।
