- पुराने और जर्जर भवनों पर नहीं है विभागीय अधिकारियों का ध्यान, हादसो के बाद महज खाना पूर्ति
कानपुर। नगर में वर्तमान समय में पुराने क्षेत्रो में हजारों की संख्या में ऐसे जर्जर और पुराने मकान मौजूद हैं, जिनकी हालत बहुत ही खस्ता है। ये सभी मकान कभी भी किसी बड़ी घटना को दावत देते दिखाई देते हैं । हर वर्ष बारिश के सीजन में जर्जर भवनों के गिरने की घटनाएं सामने आती रहती है, जिसमें जान माल का नुकसान का भय लगातार बना रहता है, बावजूद इसके वर्ष दर वर्ष ऐसे ही बीतते चले जाते हैं, लेकिन इस ओर विभागीय अफसर का कोई भी ठोस कदम न उठाना उनके कार्य प्रणाली पर एक प्रश्न चिन्ह लगता है। यदि समय रहते ऐसे भवनों की एक लिस्ट तैयार करके उनको ठीक कराया जाए या उनके मालिकों को आदेश दिए जाएं की भवन के जर्जर वाला हिस्सा तत्काल ठीक कराए, ताकि किसी भी प्रकार की कोई अप्रिय घटना न घट सके।
कानपुर के थाना कोतवाली क्षेत्र में बंगाली मोहल्ले, अरुण आटा चक्की के पास स्थित कई वर्ष पुराने जर्जर धर्मशाला का छज्जा हल्की बारिश के दौरान अचानक भरभराकर गिर गया। सकरी गली में हादसे से आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जर्जर भवन को लेकर कई बार नगर निगम में शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। घटना के बाद क्षेत्रीय लोगों में आक्रोश है।
