अवैध रूप से बने बेसमेंटों में संचालित होती है कोचिंग, शोरूम, ऑफिस तथा अन्य गतिविधियां

  • व्यापारिक प्रतिष्ठानों द्वारा बेहिसाब बेसमेंट में बनाये गये शोरूम
  • बेसमेंट में ही अस्पतालो के साथ ओपीडी का भी हो रहा संचालन
  • शहर में बने हजारो अवैध बेसमेंटो का किया जा रहा व्यवसायिक उपयोग
  • मुस्लिम क्षेत्रों में बेसमेंट में चल रहे बडे-बडे कारखाने
कानपुर। पहले दिल्ली और फिर लखनऊ में हुए अग्निकाण्ड के बाद एक बार कानपुर का प्रशासन जाग उठा है, लेकिन प्रश्न यह उठता है कि इन अवैध बेसमेंटों का निर्माण हुआ कैसे या बेसमेंट को व्यापारिक गतिविधियों में कैसे उपयोग किया जा रहा है। यकीनन इसमें विभागीय अधिकारियों की सांठ-गांठ है। जब कोई बडा हादसा होता है तब महज दिखावे के लिए कुछ दिनों जांच, नोटिस का परपंच रचा जाता है, बाद इसके होना कुछ नही। हालांकि भाजपा प्रदेश सरकार के योगी शासन में अधिकारियों पर कुछ भय तो है ही , लेकिन फिर भी कार्यवाई कितनी होती है यह आने वाला समय ही तय करेगा। वर्तमान में हजारों की संख्या में या तो अवैध बेसमेंट बने है या फिर बेसमेंटों में अवैध तरीके से व्यापारिक गतिविधियों को किया जा रहा है।
यह भारत है यहां हर किसी को आजादी मिली हुई है और कोई भी अपनी मनमानी कर सकता है और करे भी क्यों न विभागीय अधिकारिया व कर्मचारियों की मेहरबानी बनी रहती है। शहर में हजारों की संख्या में अवैध बेसमेंट है, जहां कारखाने, कोचिंग, मैरिज हॉल यहां तक की अस्पताल व ओपीडी का संचालन किया जा रहा है। लखनऊ में हुए अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद केडीए अधिकारियों की नींद टूटी है और कार्यवाही के दौरान जहां कई अवैध बेसमेंट तथा उनमें होने वाली व्यापारिक गतिविधियों पर संचालकों को नोटिस जारी की गयी तो कई प्रतिष्ठानों को सील किया गया है।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल
ऐसा क्यों होता है कि सब कुछ सामान्य स चल रहा होता है, फिर कोई हादसा होता है और अचानक अधिकारी जाग जाते है। झटपट छापेमारी, जांच और कार्यवाई का दौर चलने लगता है और कुछ ही समय में फिर से सब सामान्य हो जाता है। बेसमेंट का व्यापारिक उपयोग कोई कल से नही शुरू हुआ। वर्षो से बेसमेंट में यह चल रहा है। सवाल यह उठता है कि अभी तक विभाग क्या कर रहा है। यह अवैध बेसमेंट तैयार कैसे हो गये और इन्हे व्यापार के लिए उपयोग में क्यो लाया जा रहा है।
पूरे शहर में बने अवैध बेसमेंटो का अवैध तरीके से व्यापारी उपयोग
कानपुर नगर में एक-दो नही हजारों की संख्या में अवैध बेसमेंट बने है और उन्हे व्यापार के लिए उपयोग किया जा रहा है। कानपुर कोचिंग हब कहे जाने वाले काकादेव, गीता नगर, विनायकपुर, रोशन नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में जहां एक ओर बेसमेंट में कोचिंग का संचालन बडे पैमाने पर किया जा रहा है तो वहीं बाहर से शहर आकर पढने वाले हजारो छात्रों को रहने के लिए चोरी छिपे घरों को हास्टल के रूप में परिवर्तित कर दिया गया और इतना नही घरों में बेसमेंट बनवाकर छोटे छोटे कमरे बनवा दिये गये, जिसमें एक या दो बेड डालकर मोटी कमाई की जा रही है। पता यह भी लगा है छात्रों के खाने-पीने की व्यवस्था के लिए इन्ही बेसमेंटों में रसोई का भी संचालन किया जाता है। हादसे के बाद अधिकारी मौन है, जवाब नही दे पा रहे है लेकिन साफ समझ आता है कि बिना विभागयी सहायता के अवैध बेसमेंट न तो बन सकते है और न ही इनमें किसी प्रकार का व्यापार संचालित किया जा सकता है।
दुकानदारों ने बिना विभागीय सूचना के बनवा लिए बेसमेंट, चला रहे शो रूम
कानपुर में बडी बाजारो और थोक बाजारों में व्यापारियों ने अपनी सुविधा के हिसाब से काफी गहरे बेसमेंट बना लिए है। कुछ रिहाईशी क्षेत्रो और व्यापारिक क्षेत्रों में तीन-तीन मंजिल नीचे तक बेसमेंट बनाकर ऑफिस संचालित किए जा रहे है। नया गंज में जितनी बिल्डिंग ऊपर दिखाई देती है उससे कहीं ज्यादा अण्डर ग्राउण्ड बनी है।। इससे भी बडी बात कि यदि कोई हादसा होता है तो ऐसे बेसमेंट से निकलने का कोई दूसरा रास्ता नही है। शहर के गोविन्द नगर की चावला मार्केट, साकेत नगर, गुमटी नं0-5, नवीन मर्केट, पीपीएन मार्केट, शिवाला, मेस्टनरोड, नई सडक, बेगम गंज, चमनगंज, कलक्टर गंज, घसियारी मण्डी, भूसा टोली, आर्य नगर, स्वरूप नगर, नया गंज, शक्कर पटटी, हूलागंज, बिरहाना रोड, माल रोड सहित लगभग पूरे शहर में ही अवैध बेसमेंट तथा उनमें व्यापारिक गतिविधियां की जा रही है।
ज्यादा खतरनाक अस्पताल जहाँ बेसमेंट में चल रही ओपीडी
कानपुर में हजारो प्राइवेट अस्पताल है जो एक तरफ मानको के विपरीत बने तो वहीं इनमें गहरे-गहरे बने बेसमेंटो में ओपीडी तथा वार्ड का संचालन किया जा रहा है जिनमें हजारो मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इतना ही नही मरीजो के साथ रहने वाले तीमारदारो की भी इन हादसो के दैत्यो के बीच जिंदगी खतरे मे बनी रहती है। यहां इन अस्पतालों की संख्या को गिनाया नही जा सकता लेकिन कोई ऐसा अस्पताल नही जहां एक-दो खंड जमीन के नीचे न बने हो। इसके अलावा लापरवाही इतनी कि इन अस्पतालों में बाहर निकलने का रास्ता भी एक वह भी सीढियां, कुछ अस्पतालों में लिफ्ट लगी भी है तो भी यदि कोई दुघर्टना होती है जो जान हानि बडी होने से कोई नही रोक सकता।
कई होटलो में भी अवैध बेसमेंट बने है। होटलों में बेसमेंट पार्किग के लिए होता है लेकिन यहां व्यापार के लिए इनका उपयोग किया जा रहा है। जरनल गंज, काहूकोठी, कर्नलगंज, गम्मू खां का हाता, नई सडक, हालसी रोड जैसी भीड-भाड ऐरिया में बेसमेंट में व्यापार किया जा रहा है। कहीं कहीं तो बडे-बडे गोदामो के रूप में बेसमेंट का उपयोग हो रहा है। कुछ भी हो लेकिन विभागीय अधिकारी आंख बंद किए रहते है। कोई भी मोटी रकम देकर कितना भी गलत काम कर सकता है। अब देखना यह है कि योगी सरकार में अधिकारियों के कितने पेंच कसे जाते है और शहर के इन अवैध बेसमेटों पर कितनी कार्यवाई की जाती है।

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