बाल श्रम उन्मूलन पर मंडलीय कार्यशाला का आयोजन सम्पन्न

  • दिसम्बर 2026 तक मण्डल के समस्त जनपदों को बाल श्रम से मुक्त कराया जाये
  • कार्यशाला का शुभारम्भ मुख्य विकास अधिकारी द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया
कानपुर। मण्डलायुक्त सभागार, कानपुर मण्डल में बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वासन के विषय पर एक मंडलीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वासन विषय पर विस्तृत चर्चा के उपरान्त सभी जिलों को निर्देश दिये गये कि दिसम्बर 2026 तक मण्डल के समस्त जनपदों को बाल श्रम से मुक्त कराया जाये।
कार्यशाला के पश्चात यह निर्णय लिया गया कि प्रत्येक जनपद में भी कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। साथ ही, बाल श्रम प्रभावित हॉट-स्पॉट क्षेत्रों का चिन्हांकन कर सर्वेक्षण कराया जायेगा। सभी जिलों को नवम्बर 2025 के प्रथम सप्ताह तक अपनी-अपनी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिये गये।
उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2027 तक प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाने की घोषणा की गई है। इस संकल्प के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु श्रम विभाग द्वारा के. विजयेन्द्र पांडियन, मण्डलायुक्त कानपुर मण्डल के निर्देशन में मंडलीय बाल श्रम उन्मूलन कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का शुभारम्भ मुख्य विकास अधिकारी कानपुर नगर दीक्षा जैन, अपर आयुक्त बृज किशोर एवं उप श्रमायुक्त शमीम अख़्तर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
अपर आयुक्त बृज किशोर ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार दिसम्बर 2027 तक पूरे प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाया जाना है, जबकि कानपुर मण्डल के सभी जिलों को दिसम्बर 2026 तक इस लक्ष्य को प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
सहायक श्रमायुक्त रामलखन पटेल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सभी प्रतिभागियों का परिचय कराया। श्रम विभाग के राज्य समन्वयक सैयद रिजवान अली ने “बाल एवं किशोर श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 2016” के प्रावधानों और राज्य कार्ययोजना की मुख्य विशेषताएँ प्रस्तुत कीं। उन्होंने विभिन्न विभागों की भूमिकाओं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तथा बाल श्रमिकों के पुनर्वास से जुड़ी जानकारियाँ साझा कीं।
कार्यशाला में विभागीय समन्वय, समुदायों, श्रमिक संगठनों एवं सामाजिक हितधारकों की भागीदारी के माध्यम से बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया। बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़े जाने पर भी विशेष जोर दिया गया।
जिला स्तरीय अधिकारियों ने समूह चर्चा के माध्यम से बाल श्रम की प्रकृति, चुनौतियों तथा समाधान संबंधी उपायों पर विचार-विमर्श किया और जनपद स्तरीय ऐक्शन प्लान विकसित करने की रूपरेखा साझा की।
महिला कल्याण विभाग, कानपुर नगर के उप निदेशक पुनीत मिश्रा ने बाल श्रमिकों के पुनर्वास हेतु विभाग द्वारा संचालित योजनाओं — जैसे स्पॉन्सरशिप, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना एवं विधवा पेंशन योजना की जानकारी दी।
कार्यशाला के दौरान भारतीय मजदूर संघ के अनिल उपाध्याय, बृजेश अवस्थी (अध्यक्ष, PIA) तथा फीटा संगठन के अध्यक्ष ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
उप श्रमायुक्त, मुख्यालय शमीम अख़्तर ने प्रतिभागियों को कार्यशाला के उद्देश्यों से अवगत कराते हुए भारत की पोलियो उन्मूलन रणनीति के कन्वर्जेंट मॉडल का उल्लेख किया और कहा कि इसी प्रकार का समन्वित प्रयास बाल श्रम उन्मूलन में भी प्रभावी सिद्ध हो सकता है।
कार्यशाला में कानपुर नगर, कानपुर देहात, कन्नौज, औरेया, इटावा एवं फर्रूखाबाद जनपदों के शिक्षा, महिला कल्याण, श्रम, पुलिस, कौशल विकास, अल्पसंख्यक कल्याण, ग्रामीण विकास, बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाइयों (DCPU), हेल्पलाइन (CHL), व्यापार संगठनों, एनजीओ, “एसोसिएशन ऑफ वॉलन्टरी एक्शन” के प्रतिनिधियों तथा मानव तस्करी विरोधी इकाइयों (AHTU) के सदस्यों ने सहभागिता की।

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