मौत को मात देकर जनसेवा के पथ पर अडिग फतेहपुर के भाजपा नेता ‘इरशाद आलम’

  • जब एस. डी. हॉस्पिटल के निदेशक डा. एम. के. प्रजापति की सलाह उनके लिए वरदान साबित हुई 
फतेहपुर की धरती के एक समर्पित सिपाही और भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ता, इरशाद आलम की कहानी केवल एक बीमारी से लड़ने की नहीं, बल्कि अटूट विश्वास और संकल्प की गाथा है। 2018 का वह साल उनके जीवन में एक गहरा अंधेरा लेकर आया था, लेकिन आज वे एक नई रोशनी के साथ समाज की सेवा में जुटे हैं।
​”विश्वास की जीत: कैंसर को हराकर जनसेवा में जुटे भाजपा नेता इरशाद आलम।”
​जब वक्त ने ली कठिन परीक्षा:
इरशाद आलम बताते हैं कि 2018 में अचानक तबीयत बिगड़ने पर जब जांच कराई गई, तो रिपोर्ट ने सबको झकझोर दिया—उन्हें ‘ब्लड कैंसर’ जैसी जानलेवा बीमारी की पुष्टि हुई थी। उस वक्त उनके शरीर में टीएलसी  का स्तर डेढ़ लाख (1,50,000) तक पहुँच गया था, जो खतरे की घंटी थी।
​एस.डी. हॉस्पिटल के निदेशक  डॉ. एम. के. प्रजापति का मार्गदर्शन और टाटा हॉस्पिटल का साथ:
निराशा के उन क्षणों में कानपुर के एस. डी. हॉस्पिटल के संचालक डॉ. एम. के. प्रजापति उनके लिए देवदूत बनकर आए। डॉ. प्रजापति ने न केवल उन्हें ढांढस बंधाया, बल्कि सही समय पर बॉम्बे के टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल में इलाज कराने की सटीक सलाह दी। इरशाद जी बड़े गर्व से कहते हैं, “डॉक्टर साहब की वह एक सलाह मेरे जीवन के लिए वरदान साबित हुई।”
​विधायक विक्रम सिंह व योगी सरकार की संवेदनशीलता:
एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए कैंसर का खर्च उठाना पहाड़ तोड़ने जैसा था। ऐसे में क्षेत्रीय विधायक विक्रम सिंह ने उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीएम कोष से बीमारी के इलाज के लिए जारी धन उनकी बीमारी को मात देने में ब्रह्मास्त्र साबित हुआ. इरशाद आलम क्षेत्रीय विधायक विक्रम सिंह के प्रयासों द्वारा ‘मुख्यमंत्री राहत कोष’ से इलाज का सारा खर्च वहन किए जाने के उपकार का ऋण जीवन भर नहीं चुकता कर सकने की बात कहते हैं। इरशाद आलम भावुक होकर मुख्यमंत्री और अपनी पार्टी का धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने एक कार्यकर्ता को अकेला नहीं छोड़ा।
आज इरशाद आलम पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनका टीएलसी अब मात्र 8,000 (सामान्य सीमा) रहता है। वे कड़े अनुशासन के साथ डॉक्टरों द्वारा सुझाई गई दवा का पालन करते हैं और खुद को बेहद फिट महसूस करते हैं।
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पार्टी और समाज के प्रति समर्पण:
भाजपा मंडल समिति के सदस्य के रूप में वे पार्टी आलाकमान के निर्देशों का अक्षरशः पालन कर रहे हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को सुनना और अपने वरिष्ठजनों के माध्यम से उनका त्वरित निराकरण करवाना अब उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। फतेहपुर में उनकी छवि एक ‘जूझारू और निष्ठावान सिपाही’ की बन चुकी है।
​”इरशाद आलम जी का यह संघर्ष हमें सिखाता है कि सही डॉक्टरी सलाह और सरकार का सहयोग मिले, तो नामुमकिन को भी मुमकिन बनाया जा सकता है।
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